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Ayodhya News: बिना प्लान बनवाने जा रहे भवन...ऐसे नहीं चलता मेडिकल कॉलेज
Thu, 15 Jun 2023 10:52 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Thu, 15 Jun 2023 10:52 PM IST
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मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण करते प्रमुख सचिव। -संवाद
संवाद न्यूज एजेंसीअयोध्या। दर्शननगर मेडिकल कॉलेज में बन रहे भवन और उसकी योजना आम आदमी को भी हैरान करती है। जहां चाहे वहां भवन बनाए जा रहे हैं। बजट के सदुपयोग की कोई चिंता नहीं। आने वाले वर्षों में होने वाले रिहाइश, पार्किंग की कोई योजना ही नहीं। यह देख प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार का मूड उखड़ गया। उन्होंने सख्त लहजे में प्राचार्य से कहा कि ऐसे मनमाने ढंग से भवन नहीं बनते। कम से कम 25 साल की प्लानिंग होनी चाहिए। इस तरह से मेडिकल कॉलेज नहीं चलता।
प्रमुख सचिव बुधवार शाम दर्शननगर पहुंचे। यहां उन्होंने ट्रॉमा सेंटर की ओर से पीछे, तालाब से लेकर आवासीय क्षेत्र और स्वास्थ्य विभाग के एनएनएम ट्रेनिंग सेंटर तक का पैदल ही निरीक्षण किया। प्रमुख सचिव यह देखकर हैरान हो गए कि पहले जो भवन बने हैं, उन्हें भी बिना किसी व्यवस्थित प्लान के बनाया गया है। अब जो स्थान प्रस्तावित हैं, यह भी योजना विहीन हैं।
इसके बाद उन्होंने फैकल्टी व प्राचार्य के साथ नए भवन में बैठक भी की। इस दौरान कहा कि एक आर्किटेक्ट हायर करके कम से कम 25 साल की जरूरतों और उपलब्ध जमीन का सदुपयोग करते हुए तीन चार अलग-अलग मैप तैयार कराएं। जिससे कि अधिक से अधिक स्थान खुला रह सके। भविष्य में जमीन की कमी न आए।
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उन्होंनें ट्रॉमा सेंटर को पुराने 300 बेड अस्पताल के बगल बनवाने का सुझाव दिया। इसी के बगल सुपर स्पेशियलिटी सेंटर बनाने का भी सुझाव दिया। कहा कि ट्रॉमा सेंटर तक आने जाने का काफी बेहतर रास्ता होना चाहिए। हालांकि इसका निर्णय आर्किटेक्ट के प्लान के अनुसार ही लिया जाए। इस प्लान में भविष्य में डॉक्टरों की रिहाइश और पर्याप्त पार्किंग सुविधा का भी इंतजाम रखा जाए। इस दौरान प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा के अलावा अन्य विभागों के विभागाध्यक्ष भी मौजूद रहे।
एएनएम ट्रेनिंग सेंटर को बनाएं बीएससी नर्सिंग का भवन
प्रमुख सचिव ने स्वास्थ्य विभाग के ट्रेनिंग सेंटर को देखकर कहा कि यदि यह भवन स्वास्थ्य विभाग से चिकित्सा शिक्षा को मिल जाए तो इसी में बीएससी नर्सिंग का भवन बन सकता है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की एनएनएम और जीएनएम को बीएससी नर्सिंग की ही फैकल्टी ट्रेनिंग दे सकती है। इससे ट्रेनिंग की गुणवत्ता भी बढ़ जाएगी, जमीन भी बचेगी और 20 करोड़ के बीएससी नर्सिंग के प्रस्तावित भवन की लागत भी आधी से कम हो जाएगी।
पुराने भवन को भी बहुमंजिला बनाने का सुझाव
प्रमुख सचिव के साथ बैठक के दौरान यह विषय भी उठा कि 200 बेड के नए अस्पताल में कहीं भी रैंप नहीं है। ऐसे में मरीजों का इलाज यहां नहीं हो सकता है। रक्त विभाग के विभागाध्यक्ष ने सुझाव दिया कि यदि पुराने 300 बेड के अस्पताल पर दो मंजिल और निर्माण करा दिया जाए तो उसके रैंप नए भवन के रैंप के बराबर आ जाएंगे। ऐसे में स्थान भी बचेगा और नए भवन में रैंप की समस्या भी खत्म हो जाएगी। ऐसे में प्रमुख सचिव ने प्राचार्य से कहा कि तमाम भवन अब इसी तरह से बन रहे हैं तो आप ऐसा क्यों नहीं कर रहे हैं? डीएम की रिपोर्ट अब तक क्यों नहीं मिली
300 बेड के अस्पताल के रेनोवेशन के लिए एक बार करीब पांच तो दूसरी बार 10 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। ऐसे में प्रमुख सचिव के निर्देश पर जिलाधिकारी ने चंद दिन पहले ही इस भवन का निरीक्षण कर लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से रिपोर्ट देने को कहा था। अभी तक प्राचार्य के माध्यम से यह रिपोर्ट प्रमुख सचिव को नहीं मिली है। प्रमुख सचिव ने इस बात पर भी नाराजगी जताते हुए प्राचार्य से कहा कि उन्हें अभी तक यह रिपोर्ट क्यों नहीं मिली है? प्राचार्य ने आश्वस्त किया कि जल्द ही रिपोर्ट मिल जाएगी।
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प्रमुख सचिव बुधवार शाम दर्शननगर पहुंचे। यहां उन्होंने ट्रॉमा सेंटर की ओर से पीछे, तालाब से लेकर आवासीय क्षेत्र और स्वास्थ्य विभाग के एनएनएम ट्रेनिंग सेंटर तक का पैदल ही निरीक्षण किया। प्रमुख सचिव यह देखकर हैरान हो गए कि पहले जो भवन बने हैं, उन्हें भी बिना किसी व्यवस्थित प्लान के बनाया गया है। अब जो स्थान प्रस्तावित हैं, यह भी योजना विहीन हैं।
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इसके बाद उन्होंने फैकल्टी व प्राचार्य के साथ नए भवन में बैठक भी की। इस दौरान कहा कि एक आर्किटेक्ट हायर करके कम से कम 25 साल की जरूरतों और उपलब्ध जमीन का सदुपयोग करते हुए तीन चार अलग-अलग मैप तैयार कराएं। जिससे कि अधिक से अधिक स्थान खुला रह सके। भविष्य में जमीन की कमी न आए।
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उन्होंनें ट्रॉमा सेंटर को पुराने 300 बेड अस्पताल के बगल बनवाने का सुझाव दिया। इसी के बगल सुपर स्पेशियलिटी सेंटर बनाने का भी सुझाव दिया। कहा कि ट्रॉमा सेंटर तक आने जाने का काफी बेहतर रास्ता होना चाहिए। हालांकि इसका निर्णय आर्किटेक्ट के प्लान के अनुसार ही लिया जाए। इस प्लान में भविष्य में डॉक्टरों की रिहाइश और पर्याप्त पार्किंग सुविधा का भी इंतजाम रखा जाए। इस दौरान प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा के अलावा अन्य विभागों के विभागाध्यक्ष भी मौजूद रहे।
एएनएम ट्रेनिंग सेंटर को बनाएं बीएससी नर्सिंग का भवन
प्रमुख सचिव ने स्वास्थ्य विभाग के ट्रेनिंग सेंटर को देखकर कहा कि यदि यह भवन स्वास्थ्य विभाग से चिकित्सा शिक्षा को मिल जाए तो इसी में बीएससी नर्सिंग का भवन बन सकता है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की एनएनएम और जीएनएम को बीएससी नर्सिंग की ही फैकल्टी ट्रेनिंग दे सकती है। इससे ट्रेनिंग की गुणवत्ता भी बढ़ जाएगी, जमीन भी बचेगी और 20 करोड़ के बीएससी नर्सिंग के प्रस्तावित भवन की लागत भी आधी से कम हो जाएगी।
पुराने भवन को भी बहुमंजिला बनाने का सुझाव
प्रमुख सचिव के साथ बैठक के दौरान यह विषय भी उठा कि 200 बेड के नए अस्पताल में कहीं भी रैंप नहीं है। ऐसे में मरीजों का इलाज यहां नहीं हो सकता है। रक्त विभाग के विभागाध्यक्ष ने सुझाव दिया कि यदि पुराने 300 बेड के अस्पताल पर दो मंजिल और निर्माण करा दिया जाए तो उसके रैंप नए भवन के रैंप के बराबर आ जाएंगे। ऐसे में स्थान भी बचेगा और नए भवन में रैंप की समस्या भी खत्म हो जाएगी। ऐसे में प्रमुख सचिव ने प्राचार्य से कहा कि तमाम भवन अब इसी तरह से बन रहे हैं तो आप ऐसा क्यों नहीं कर रहे हैं? डीएम की रिपोर्ट अब तक क्यों नहीं मिली
300 बेड के अस्पताल के रेनोवेशन के लिए एक बार करीब पांच तो दूसरी बार 10 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। ऐसे में प्रमुख सचिव के निर्देश पर जिलाधिकारी ने चंद दिन पहले ही इस भवन का निरीक्षण कर लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से रिपोर्ट देने को कहा था। अभी तक प्राचार्य के माध्यम से यह रिपोर्ट प्रमुख सचिव को नहीं मिली है। प्रमुख सचिव ने इस बात पर भी नाराजगी जताते हुए प्राचार्य से कहा कि उन्हें अभी तक यह रिपोर्ट क्यों नहीं मिली है? प्राचार्य ने आश्वस्त किया कि जल्द ही रिपोर्ट मिल जाएगी।