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अयोध्या रामायण की धरती : माताप्रसाद
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 18 Dec 2015 11:41 PM IST
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अयोध्या रामायण की धरती है। संत तुलसीदास ने श्रीरामचरित मानस लिखकर समाज में जीने का संबल दिया लेकिन यहां इतिहास को दूसरे कसौटी पर कसा जाता है। श्रद्धा से देखते हैं तो दूसरा रूप दिखता है।
जहां श्रद्धा होती है वहां सत्यता नहीं परखी जाती। यह बातें शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने 34वें रामायण मेला के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कही।
उन्होंने कहा कि पहले गांव स्तर पर श्रीरामचरित मानस लालटेन की रोशनी में लोग सामूहिक रूप से पढ़ते थे, जो अब नहीं दिखता है। यही नहीं रामलीला मंचन में भी कमी आई है।
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कहा कि राम की मर्यादा, चरित्र, कर्म, संस्कृति का आधार जन-जन तक पहुंचे यह हमारी कोशिश होनी चाहिए लेकिन यह वैश्विक गतिविधियां बंद होती जा रही हैं। हमें संस्कृति को संजो कर रखना है।
साथ ही संतों को भी सम्मान देना है। पांडेय ने कहा कि डा. राम मनोहर लोहिया की कल्पना रामायण मेला थी और राम-कृष्ण पर उन्होंने किताब भी लिखी। राम, कृष्ण, शंकर, गंगा, सरयू भारतीय संस्कृति का आधार हैं।
इन्हें संजोने की जरूरत है। कहा कि विदेशी शक्तियों द्वारा लगातार विभिन्न माध्यमों से मन को बदलने की कोशिशें हो रही हैं। हमारी वैश्विक ताकत पर हमले हो रहे हैं। नौजवानों से कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम के आचरण को अपनाएं।
श्रीराम जन्मभूमि न्यास के कार्याध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने अध्यक्षता करते हुए विधानसभा अध्यक्ष से सरयू और राम की पैड़ी को आकर्षक बनाए जाने की बात रखी। कहा कि यह मुद्दा विस अध्यक्ष विधानसभा में भी उठाएं।
साथ ही सरयू को प्रदूषण मुक्त करने के लिए नालों को बंद कराने की बात कही। समारोह में अतिथियों ने रामायण मेले की पत्रिका 39वें ‘तुलसी दल’ का विमोचन भी किया।
समारोह में वन राज्यमंत्री तेज नारायण पांडेय, डा. सुनीता शास्त्री, महंत नारायणाचारी, नागा रामलखन दास, भवनाथ दास, महंत कन्हैया दास, विधायक अभय सिंह, महंत जन्मेजय शरण, शीतला सिंह, प्रभात शर्मा, महंत अरुण दास मौजूद रहे।
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जहां श्रद्धा होती है वहां सत्यता नहीं परखी जाती। यह बातें शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने 34वें रामायण मेला के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कही।
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उन्होंने कहा कि पहले गांव स्तर पर श्रीरामचरित मानस लालटेन की रोशनी में लोग सामूहिक रूप से पढ़ते थे, जो अब नहीं दिखता है। यही नहीं रामलीला मंचन में भी कमी आई है।
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कहा कि राम की मर्यादा, चरित्र, कर्म, संस्कृति का आधार जन-जन तक पहुंचे यह हमारी कोशिश होनी चाहिए लेकिन यह वैश्विक गतिविधियां बंद होती जा रही हैं। हमें संस्कृति को संजो कर रखना है।
साथ ही संतों को भी सम्मान देना है। पांडेय ने कहा कि डा. राम मनोहर लोहिया की कल्पना रामायण मेला थी और राम-कृष्ण पर उन्होंने किताब भी लिखी। राम, कृष्ण, शंकर, गंगा, सरयू भारतीय संस्कृति का आधार हैं।
इन्हें संजोने की जरूरत है। कहा कि विदेशी शक्तियों द्वारा लगातार विभिन्न माध्यमों से मन को बदलने की कोशिशें हो रही हैं। हमारी वैश्विक ताकत पर हमले हो रहे हैं। नौजवानों से कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम के आचरण को अपनाएं।
श्रीराम जन्मभूमि न्यास के कार्याध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने अध्यक्षता करते हुए विधानसभा अध्यक्ष से सरयू और राम की पैड़ी को आकर्षक बनाए जाने की बात रखी। कहा कि यह मुद्दा विस अध्यक्ष विधानसभा में भी उठाएं।
साथ ही सरयू को प्रदूषण मुक्त करने के लिए नालों को बंद कराने की बात कही। समारोह में अतिथियों ने रामायण मेले की पत्रिका 39वें ‘तुलसी दल’ का विमोचन भी किया।
समारोह में वन राज्यमंत्री तेज नारायण पांडेय, डा. सुनीता शास्त्री, महंत नारायणाचारी, नागा रामलखन दास, भवनाथ दास, महंत कन्हैया दास, विधायक अभय सिंह, महंत जन्मेजय शरण, शीतला सिंह, प्रभात शर्मा, महंत अरुण दास मौजूद रहे।