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रामलला को फूल-माला चढ़ाने की मिले अनुमति

Tue, 02 Mar 2021 10:53 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 02 Mar 2021 10:53 PM IST
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अयोध्या-रामलला का विग्रह - फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। श्रीरामजन्म भूमि में भव्य राममंदिर का निर्माण शुरू हो चुका है। मंदिर के लिए नींव खोदाई का कार्य भी अंतिम चरण में है। रामलला के भक्तों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। वहीं रामनगरी के संत-धर्माचार्यों ने मांग उठाई है कि अब रामलला कैद से आजाद होकर अस्थायी मंदिर में विराजते हैं। ऐसे में रामलला के पूजन-अर्चन के लिए पवित्र परंपरा का निर्वाह भी किया जाना चाहिए।
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रामनगरी के संत-धर्माचार्यों ने मांग उठाई है कि रामलला को फूल-माला, प्रसाद चढ़ाने की अनुमति मिलनी चाहिए। साथ ही जूता-चप्पल पहनकर दर्शन करने पर भी रोक लगनी चाहिए, क्योंकि सनातन परंपरा में यह पूजन पद्घति के विरूद्घ है। संत अतिशीघ्र श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पत्र लिखकर मांग करेंगे। बताते चलें कि रामलला में दर्शन के दौरान भक्तों को फूल-माला ले जाने की अनुमति नहीं होती है। इसके विपरीत भक्त जूता-चप्पल पहनकर दर्शन करने जा सकते हैं। अब चूंकि रामलला टेंट से आजाद हो गए हैं और नए अस्थायी मंदिर में स्थापित हुए उन्हें करीब एक साल बीत रहे हैं। ऐसे में संतों का कहना है कि पूजा-पद्घति की जो पवित्र परंपरा है उसका भी निर्वहन किया जाना चाहिए।
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ज.गु.रत्नेशप्रपन्नाचार्य का कहना है कि अब स्थिति बदल गई है। इसलिए रामलला के दर्शन-पूजन की व्यवस्था में भी बदलाव होना चाहिए। कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में जूता-चप्पल धारण कर दर्शन-पूजन की विधि नहीं है। इसलिए अब जब सारे संकट समाप्त हो गए हैं और रामलला का भव्य मंदिर भी बन रहा है। ऐसे में जूता-चप्पल रहित होकर लोग दर्शन करने जाएं ताकि हमारी पवित्र परंपरा का निर्वाह हो सके। शास्त्रों के अनुसार भगवान के यहां खाली हाथ नहीं जाना चाहिए। पत्र, पुष्प, फल कुछ भी लेकर जाने की मान्यता है। कम से कम भक्त अपनी भावना पुष्प के रूप में अर्पित कर सकें इसकी व्यवस्था तो करनी ही चाहिए। महंत परमहंस दास ने कि जूता-चप्पल पहनकर मंदिर में प्रवेश करना मंदिर की मर्यादा के विरुद्घ है। पूजन पद्घति का पालन न करने पर पूजा-अर्चना का फल भी नहीं मिलता।
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रामलला के भक्तों को फूल-माला प्रसाद चढ़ाने की भी अनुमति ट्रस्ट को देना चाहिए। इसके लिए हम ट्रस्ट को पत्र लिखकर मांग करेंगे। उन्होंने यह भी मांग की है कि राममंदिर निर्माण के बाद जो पैसा बचे उससे माता सीता संस्कृति विश्वविद्यालय की स्थापना अयोध्या में की जाए। हनुमानगढ़ी के पुजारी राजूदास ने कहा कि जूता-चप्पल पहनकर दर्शन करना सनातन धर्म के विरुद्घ है। इसलिए सबसे पहले जूता-चप्पल रहित होकर भक्त दर्शन करने के लिए जाएं इसकी व्यवस्था तत्काल ट्रस्ट को करनी चाहिए। ऐसी व्यवस्था हो जाएगी तो भक्त इसका स्वयं अनुपालन करेंगे। इसके साथ ही साथ फूल-माला, प्रसाद चढ़ाने की भी व्यवस्था करनी चाहिए क्योंकि यही भगवान के प्रति अपनी आस्था प्रकट करने का भक्तों केे पास सशक्त माध्यम होता है।

रामादल के अध्यक्ष पंडित कल्किराम ने कहा कि जूता-चप्पल पहनकर दर्शन करना तो पूरी तरह से धर्म विरुद्घ है। अब तो सारी बाधाएं दूर हो गयी हैं। राममंदिर का निर्माण भी शुरू हो चुका है। ऐसे में भक्तों की भावनाओं की कद्र करते हुए ट्रस्ट को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे पूजन की परंपरा का निर्वाह हो सके। उन्होंने कहा कि रामादल इसके लिए श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पत्र भी लिखेगा। वहीं किष्किंधा से अयोध्या पहुंचे संत गोविंदानंद सरस्वती ने भी मांग की है कि रामलला को फूल-माला चढ़ाने की अनुमति मिलनी चाहिए। कहा कि भगवान राम ने नंगे पांव भ्रमण किया था तो भक्तों को भी उनके दरबार में नंगे पाव प्रवेश की व्यवस्था होनी चाहिए। अब कोई समस्या नहीं है ट्रस्ट को इस पर विचार करना चाहिए।
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