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बदहाल स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर प्रसव व टीकाकरण सुविधा नहीं
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मवई। मातृ, शिशु मृत्यु दर में कमी लाने और ग्रामीणों को गांव में ही स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से एनआरएचएम के तहत लाखों रुपये खर्च कर बने स्वास्थ्य उपकेंद्र विभागीय उदासीनता के चलते बदहाल हैं। नवजात शिशुओं और गर्भधात्री माताओं व ग्रामीणों को इसका तनिक भी लाभ नहीं मिल पा रहा। ऐसे में ग्रामीण महिलाएं लंबी दूरी तय कर उमापुर पीएचसी या मवई सीएचसी पर ही जाने को मजबूर हैं।
मवई ब्लॉक के नेवरा, रैछ, गनेशपुर, कसारी, पटरंगा, दुल्लापुर, मैरामऊ, कुशहरी, रानीमऊ, डिलवल, चंद्रामऊ, सैदपुर, जयसुखपुर, शेरपुर, भवानीपुर, रामपुर जनक, नौगवां डीह, शेरपुर गांव में 11 साल पहलेे एएनएम सेंटर का निर्माण कराया गया था। ग्रामीण सुनील कुमार, हरिश्चंद्र, सियाराम, राजू का कहना है कि इन गांवों में स्वास्थ्य उपकेंद्र भवन निर्माण होने पर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं व नवजात शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिलने की उम्मीद जगी थी। लेकिन संसाधनों की कमी व विभागीय जिम्मेदारों की उदासीनता से कुछ दिन बाद उम्मीदें मायूसी में बदल गई।
महमदवापुर गांव के राजेश वर्मा, सुरेश, सुनील व रानेपुर के अंकित, अजय, श्रवण कुमार ने बताया कि एएनएम सेंटर बना तो है लेकिन यहां कोई कभी आता नहीं है जिससे सेंटर जर्जर हो चुका है। यही हाल नेवरा, शेरपुर, रामपुर जनक, भवानीपुर, गनेशपुर एएनएम सेंटर की है, जहां बाउंड्रीवाल टूटी हुई है। भवन के छत जर्जर हालत में है, बिजली के तार खुले हुए हैं।
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जिससे कभी भी कोई बड़ी घटना होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। नूरअलीपुर के विंध्य प्रसाद बताते हैं कि नेवरा उपकेंद्र के भवन की रंगाई पुताई कई वर्षों से नहीं की गई है और वहां लगे बोर्ड और दीवाल का भी कुछ पता नहीं है। ऐसे में प्रसव और टीकाकरण के लिए ग्रामीणों को भटकना पड़ता है।
जर्जर उपकेंद्रों की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी गई है। आदेश और बजट जारी होने के बाद मरम्मत कराई जाएगी। टीकाकरण, प्रसव और अन्य सुविधाएं ग्रामीणों को पीएचसी सीएचसी के अलावा डोर टू डोर आंगनबाड़ी केंद्रों या विद्यालय पर मुहैया कराई जाती है। गांवों में कैंप लगाकर टीकाकरण कराया जाता है।
- डॉ. रविकांत वर्मा, सीएचसी अधीक्षक
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मवई ब्लॉक के नेवरा, रैछ, गनेशपुर, कसारी, पटरंगा, दुल्लापुर, मैरामऊ, कुशहरी, रानीमऊ, डिलवल, चंद्रामऊ, सैदपुर, जयसुखपुर, शेरपुर, भवानीपुर, रामपुर जनक, नौगवां डीह, शेरपुर गांव में 11 साल पहलेे एएनएम सेंटर का निर्माण कराया गया था। ग्रामीण सुनील कुमार, हरिश्चंद्र, सियाराम, राजू का कहना है कि इन गांवों में स्वास्थ्य उपकेंद्र भवन निर्माण होने पर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं व नवजात शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिलने की उम्मीद जगी थी। लेकिन संसाधनों की कमी व विभागीय जिम्मेदारों की उदासीनता से कुछ दिन बाद उम्मीदें मायूसी में बदल गई।
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महमदवापुर गांव के राजेश वर्मा, सुरेश, सुनील व रानेपुर के अंकित, अजय, श्रवण कुमार ने बताया कि एएनएम सेंटर बना तो है लेकिन यहां कोई कभी आता नहीं है जिससे सेंटर जर्जर हो चुका है। यही हाल नेवरा, शेरपुर, रामपुर जनक, भवानीपुर, गनेशपुर एएनएम सेंटर की है, जहां बाउंड्रीवाल टूटी हुई है। भवन के छत जर्जर हालत में है, बिजली के तार खुले हुए हैं।
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जिससे कभी भी कोई बड़ी घटना होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। नूरअलीपुर के विंध्य प्रसाद बताते हैं कि नेवरा उपकेंद्र के भवन की रंगाई पुताई कई वर्षों से नहीं की गई है और वहां लगे बोर्ड और दीवाल का भी कुछ पता नहीं है। ऐसे में प्रसव और टीकाकरण के लिए ग्रामीणों को भटकना पड़ता है।
जर्जर उपकेंद्रों की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी गई है। आदेश और बजट जारी होने के बाद मरम्मत कराई जाएगी। टीकाकरण, प्रसव और अन्य सुविधाएं ग्रामीणों को पीएचसी सीएचसी के अलावा डोर टू डोर आंगनबाड़ी केंद्रों या विद्यालय पर मुहैया कराई जाती है। गांवों में कैंप लगाकर टीकाकरण कराया जाता है।
- डॉ. रविकांत वर्मा, सीएचसी अधीक्षक