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बढ़ी ठंड, निकल आए ऊनी कपड़े
Faizabad
Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
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रायबरेली। दीपावली के बाद से पारा गिरने से ठंड बढ़ने लगी है। ठिठुरन का एहसास इसी से लगाया जा सकता है कि बक्सों और अलमारी में रखे गर्म कपड़े लोगों ने निकाल लिए हैं। कहीं-कहीं अलाव भी जलने लगे हैं। खासकर सुबह और शाम ठिठुरन अधिक होती है। अब छांव के बजाय लोग धूप में बैठना पसंद कर रहे हैं। दफ्तरों में कर्मचारी धूप में ही बैठकर काम निपटाते देखे जा सकते हैं।
जिले में अब सर्दी का असर दिखने लगा है। इधर एक सप्ताह से ठंडक अधिक बढ़ी है। ठंडी बढ़ने के साथ ही ठिठुरन से बचने के लिए लोगों ने उपाय भी शुरू कर दिए हैं। यानी बक्सों और अलमारी में रखे गर्म कपड़े निकाल लिए हैं। सुबह और शाम ठंड अधिक होने पर लोग अलाव जलाने लगे हैं। ठिठुरन की वजह से ही बच्चों को स्वेटर पहनकर स्कूल जाना पड़ रहा है। सुबह धूप खिलने पर लोगों को राहत मिलती है। सरकारी दफ्तरों के कर्मचारियों पर भी ठंडी का असर दिखने लगा है। यही वजह है कि कुछ कर्मचारी बाहर कुर्सी पर बैठकर काम निपटाते नजर आने लगे हैं। रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन पर भी ठंडी का असर देखा जा सकता है। ट्रेन और बस में सवार यात्री स्वेटर, जैकेट और शाल ओढ़कर सफर कर रहे हैं।
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जिले में अब सर्दी का असर दिखने लगा है। इधर एक सप्ताह से ठंडक अधिक बढ़ी है। ठंडी बढ़ने के साथ ही ठिठुरन से बचने के लिए लोगों ने उपाय भी शुरू कर दिए हैं। यानी बक्सों और अलमारी में रखे गर्म कपड़े निकाल लिए हैं। सुबह और शाम ठंड अधिक होने पर लोग अलाव जलाने लगे हैं। ठिठुरन की वजह से ही बच्चों को स्वेटर पहनकर स्कूल जाना पड़ रहा है। सुबह धूप खिलने पर लोगों को राहत मिलती है। सरकारी दफ्तरों के कर्मचारियों पर भी ठंडी का असर दिखने लगा है। यही वजह है कि कुछ कर्मचारी बाहर कुर्सी पर बैठकर काम निपटाते नजर आने लगे हैं। रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन पर भी ठंडी का असर देखा जा सकता है। ट्रेन और बस में सवार यात्री स्वेटर, जैकेट और शाल ओढ़कर सफर कर रहे हैं।
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