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एडवायजरी... 16-16-33
Updated Thu, 12 Apr 2018 11:32 PM IST
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जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं का बोलबाला
फैजाबाद। जिले की 29 लाख की आबादी को बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के सरकार के दावे हकीकत में फेल होते नजर आ रहे हैं। जिला अस्पताल में व्याप्त तमाम अव्यवस्थाओं की वजह से मरीजों को सुविधाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। आलम यह है कि न तो समय से चिकित्सक पहुंच रहे हैं, न ही पर्याप्त दवाएं मिल रही हैं। जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही हो रही है। ‘अमर उजाला प्रतिनिधि’ ने बृहस्पतिवार जिला अस्पताल की सुविधाओं से रू-ब-रू होना चाहा तो हकीकत सामने आई। ज्यादातर डॉक्टर निर्धारित समय से काफी लेट रहे, ओपीडी की सेवाएं काफी विलंब से शुरू हुईं तो अल्ट्रासाउंड करीब 10 बजे शुरू हुआ। इस बीच मरीजों का कतारें लंबी होती गईं और अनेक दुश्वारियों से जूझना पड़ा।
9 बजे तक पहुंचते रहे चिकित्सक
जिला अस्पताल में कुल चिकित्सकों के 51 पद स्वीकृत हैं। जिसमें से तीन चिकित्सक अनाधिकृत रूप से लंबे समय से लापता हैं। बृहस्पतिवार को सुबह 8 बजे तक किसी डॉक्टर ने उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। 8:06 बजे डॉ. विजयहरि आर्य, 8:08 बजे डॉ एके पांडेय व जीसी पाठक, 8:12 पर डॉ. एसके वर्मा, 8:18 पर डॉ आरपी राय, 8:20 पर डॉ. राम किशोर, 8:45 पर डॉ. जीआर गौतम व 8:52 पर डॉ. नानक सरन अस्पताल में दाखिल हुए। इसी तरह अन्य कई चिकित्सकों के आने में काफी देर होती गई। ओपीडी में 8:20 पर सिर्फ डॉ. रामकिशोर व डॉ. आरपी राय बैठे मिले। 9 बजे के बाद बाल रोग विशेषज्ञ व डॉ. सत्येंद्र सिंह कक्ष में पहुंचे। चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. आरबी वर्मा 9:15 पर कक्ष में पहुंचे। वहीं 9:25 तक नई बिल्डिंग में एक भी सर्जन मौजूद नहीं था। मरीज अनीता देवी, रुखसाना, बसंती, रूपा, आशीष आदि ने बताया कि 8 बजे से बैठे हैं। 9 बजे एक निजी कर्मी ने पर्चा जमा किया लेकिन अभी तक कोई डॉक्टर नहीं आया। 9 बजे तक नेत्र परीक्षण कक्ष में ताला लटका रहा। 9:15 बजे तक अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. जीसी पाठक व डॉ. आशीष श्रीवास्तव अपने कक्ष में नहीं दिखे। इस बीच प्रत्येक कक्ष के सामने दर्जनों की तादाद में मरीज घंटों लाइन में खड़े रहे।
10 बजे शुरू हो सकी अल्ट्रासाउंड जांचें
अल्ट्रासाउंड सेवा गुरुवार को 10 बजे तक नहीं शुरू हो सकी। सुबह 8 बजे से ही मरीज पानी पी-पीकर डॉक्टर के आने का इंतजार करते रहे। भाईपुर की चमेला देवी, सरायरासी की विमला, मधुपुर के राम आशीष, दिल्ली दरवाजा की रेशम बानो सहित तमाम मरीज 8 बजे से अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर लाइन लगाए मिले।
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नहीं शुरू हो सका डिजिटल एक्स-रे
करीब 10 लाख की लागत से 2 माह पूर्व जिला अस्पताल को डिजिटल एक्स-रे मशीन मिली है। लेकिन तकनीकी खामियों व जगह के अभाव में आज तक इसका संचालन नहीं हो सका। इसकी वजह से प्रतिदिन काफी संख्या में मरीजों को बाहर भटकना पड़ता है, जहां करीब 510 रुपये की जांच की जाती है। दिल्ली दरवाजा की कहकशा, पंडित का पुरवा की सुनीता देवी ने बताया कि रीढ़ व कमर के इलाज के लिए डॉक्टर ने डिजिटल एक्स-रे कराने की सलाह दी है, लेकिन अस्पताल में सुविधा ना होने से डायग्नोस्टिक सेंटर से कराया गया।
- सुबह राउंड के बाद चिकित्सक नौ बजे तक ओपीडी में बैठ जाते हैं। विलंब से आने वाले चिकित्सकों को गैरहाजिर किया जाता है। कल से स्वयं आठ बजे से अपने सामने ही उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर कराएंगे। चिकित्सकों की कमी से काफी किल्लत है, फिर भी मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास किया जा रहा है।-डॉ. हरिओम श्रीवास्तव, सीएमएस जिला अस्पताल फैजाबाद
जिला अस्पताल में दवाओं की भारी किल्लत
फैजाबाद। जिला अस्पताल में दवाओं की भी किल्लत से मरीजों की जेब में भी खूब ढीली की जा रही है। चिकित्सक देखने के बाद मरीजों को दवाओं की दो स्लिप देते हैं, जिसमें एक अस्पताल के स्टोर रूम से मिलने वाली दवाएं होती हैं, जबकि दूसरी स्लिप में बाहर स्थित मेडिकल स्टोर की दवाई लिखी होती हैं। भदरसा के मंगल ने बताया कि सांस लेने में दिक्कत थी, जिसके लिए सिर्फ दो दवा ही यहां मिलीं। शेष के लिए मेडिकल स्टोर जाना पड़ा। पिलखावां के दिनेश यादव ने बताया कि सीने में दर्द था, जिसके लिए डॉक्टर ने जो दवा लिखी उसमें से सिर्फ एक ही यहां से मिली है। 270 रुपये की दवा बाहर से ली।
अस्पताल में 106 प्रकार की दवाएं होने का दावा
सीएमएस डॉ. हरिओम श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल में दवाओं की कोई कमी नहीं है। इमरजेंसी की अनिवार्य 21 दवाओं के अतिरिक्त कुल 106 प्रकार की दवाएं स्टोर में उपलब्ध हैं। जिनकी सूची सभी चिकित्सकों को दे दी गई है। लेकिन सूचना मिल रही है कि कुछ चिकित्सक निजी लाभ के लिए मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं लिख रहे हैं। निगरानी की जा रही है, कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. आरबी वर्मा ने बताया कि इन दिनों दाद से पीड़ित करीब 15 से 20 मरीज आ रहे हैं, लेकिन उनके इलाज के लिए इस समय फंगल क्रीम, एंटी एलर्जी टैबलेट आदि उपलब्ध ना होने से मजबूरी में बाहर की दवाई लिखी जा रही हैं।
जिला अस्पताल की ओपीडी प्रतिदिन 1500 से 2000 रोगी
कुल स्वीकृत चिकित्सकों के पद 51, तैनाती 27,
अनाधिकृत रूप से लापता 03
कुल बेड 212
कुल वार्ड 10
कुल व्हीलचेयर 15
कुल स्ट्रेचर 20
अस्पताल का वार्षिक बजट 3.5 करोड़
प्रतिमाह ऑपरेशन औसतन 200
लापरवाही के आरोप में कई बार हुआ हंगामा
छह अप्रैल को थाना पूराकलंदर के रंजीत का पुरवा सरियांवा निवासी लगभग 70 वर्षीय केदारनाथ पांडेय को लेकर उनके पुत्र कौशल पांडेय व पुत्री सुभद्रा देवी ने जिला अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष में दिखाया। करीब तीन घंटे बाद मरीज की मौत हो गई। जिस पर परिवारीजनों ने कई बार भर्ती कर स्थाई इलाज का आग्रह करने पर भी स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा अनसुना करने का आरोप लगाकर घंटों हंगामा किया। 8 मार्च को लवकुशनगर वजीरगंज निवासी आकाश मणि त्रिपाठी ने बाहर से अधिक दवाएं लिखने व निजी प्रैक्टिस के लिए घर पर बुलाने के लिए जिला अस्पताल के एक चिकित्सक पर आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। बीते वर्ष कुढ़ाकेशवपुर निवासी उदय तिवारी ने पिता के इलाज के समय इमरजेंसी कक्ष में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों से अभद्रता का आरोप लगाते हुए मारपीट करने का आरोप लगाते हुए घंटों प्रदर्शन किया।
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फैजाबाद। जिले की 29 लाख की आबादी को बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के सरकार के दावे हकीकत में फेल होते नजर आ रहे हैं। जिला अस्पताल में व्याप्त तमाम अव्यवस्थाओं की वजह से मरीजों को सुविधाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। आलम यह है कि न तो समय से चिकित्सक पहुंच रहे हैं, न ही पर्याप्त दवाएं मिल रही हैं। जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही हो रही है। ‘अमर उजाला प्रतिनिधि’ ने बृहस्पतिवार जिला अस्पताल की सुविधाओं से रू-ब-रू होना चाहा तो हकीकत सामने आई। ज्यादातर डॉक्टर निर्धारित समय से काफी लेट रहे, ओपीडी की सेवाएं काफी विलंब से शुरू हुईं तो अल्ट्रासाउंड करीब 10 बजे शुरू हुआ। इस बीच मरीजों का कतारें लंबी होती गईं और अनेक दुश्वारियों से जूझना पड़ा।
9 बजे तक पहुंचते रहे चिकित्सक
जिला अस्पताल में कुल चिकित्सकों के 51 पद स्वीकृत हैं। जिसमें से तीन चिकित्सक अनाधिकृत रूप से लंबे समय से लापता हैं। बृहस्पतिवार को सुबह 8 बजे तक किसी डॉक्टर ने उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। 8:06 बजे डॉ. विजयहरि आर्य, 8:08 बजे डॉ एके पांडेय व जीसी पाठक, 8:12 पर डॉ. एसके वर्मा, 8:18 पर डॉ आरपी राय, 8:20 पर डॉ. राम किशोर, 8:45 पर डॉ. जीआर गौतम व 8:52 पर डॉ. नानक सरन अस्पताल में दाखिल हुए। इसी तरह अन्य कई चिकित्सकों के आने में काफी देर होती गई। ओपीडी में 8:20 पर सिर्फ डॉ. रामकिशोर व डॉ. आरपी राय बैठे मिले। 9 बजे के बाद बाल रोग विशेषज्ञ व डॉ. सत्येंद्र सिंह कक्ष में पहुंचे। चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. आरबी वर्मा 9:15 पर कक्ष में पहुंचे। वहीं 9:25 तक नई बिल्डिंग में एक भी सर्जन मौजूद नहीं था। मरीज अनीता देवी, रुखसाना, बसंती, रूपा, आशीष आदि ने बताया कि 8 बजे से बैठे हैं। 9 बजे एक निजी कर्मी ने पर्चा जमा किया लेकिन अभी तक कोई डॉक्टर नहीं आया। 9 बजे तक नेत्र परीक्षण कक्ष में ताला लटका रहा। 9:15 बजे तक अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. जीसी पाठक व डॉ. आशीष श्रीवास्तव अपने कक्ष में नहीं दिखे। इस बीच प्रत्येक कक्ष के सामने दर्जनों की तादाद में मरीज घंटों लाइन में खड़े रहे।
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10 बजे शुरू हो सकी अल्ट्रासाउंड जांचें
अल्ट्रासाउंड सेवा गुरुवार को 10 बजे तक नहीं शुरू हो सकी। सुबह 8 बजे से ही मरीज पानी पी-पीकर डॉक्टर के आने का इंतजार करते रहे। भाईपुर की चमेला देवी, सरायरासी की विमला, मधुपुर के राम आशीष, दिल्ली दरवाजा की रेशम बानो सहित तमाम मरीज 8 बजे से अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर लाइन लगाए मिले।
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नहीं शुरू हो सका डिजिटल एक्स-रे
करीब 10 लाख की लागत से 2 माह पूर्व जिला अस्पताल को डिजिटल एक्स-रे मशीन मिली है। लेकिन तकनीकी खामियों व जगह के अभाव में आज तक इसका संचालन नहीं हो सका। इसकी वजह से प्रतिदिन काफी संख्या में मरीजों को बाहर भटकना पड़ता है, जहां करीब 510 रुपये की जांच की जाती है। दिल्ली दरवाजा की कहकशा, पंडित का पुरवा की सुनीता देवी ने बताया कि रीढ़ व कमर के इलाज के लिए डॉक्टर ने डिजिटल एक्स-रे कराने की सलाह दी है, लेकिन अस्पताल में सुविधा ना होने से डायग्नोस्टिक सेंटर से कराया गया।
- सुबह राउंड के बाद चिकित्सक नौ बजे तक ओपीडी में बैठ जाते हैं। विलंब से आने वाले चिकित्सकों को गैरहाजिर किया जाता है। कल से स्वयं आठ बजे से अपने सामने ही उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर कराएंगे। चिकित्सकों की कमी से काफी किल्लत है, फिर भी मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास किया जा रहा है।-डॉ. हरिओम श्रीवास्तव, सीएमएस जिला अस्पताल फैजाबाद
जिला अस्पताल में दवाओं की भारी किल्लत
फैजाबाद। जिला अस्पताल में दवाओं की भी किल्लत से मरीजों की जेब में भी खूब ढीली की जा रही है। चिकित्सक देखने के बाद मरीजों को दवाओं की दो स्लिप देते हैं, जिसमें एक अस्पताल के स्टोर रूम से मिलने वाली दवाएं होती हैं, जबकि दूसरी स्लिप में बाहर स्थित मेडिकल स्टोर की दवाई लिखी होती हैं। भदरसा के मंगल ने बताया कि सांस लेने में दिक्कत थी, जिसके लिए सिर्फ दो दवा ही यहां मिलीं। शेष के लिए मेडिकल स्टोर जाना पड़ा। पिलखावां के दिनेश यादव ने बताया कि सीने में दर्द था, जिसके लिए डॉक्टर ने जो दवा लिखी उसमें से सिर्फ एक ही यहां से मिली है। 270 रुपये की दवा बाहर से ली।
अस्पताल में 106 प्रकार की दवाएं होने का दावा
सीएमएस डॉ. हरिओम श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल में दवाओं की कोई कमी नहीं है। इमरजेंसी की अनिवार्य 21 दवाओं के अतिरिक्त कुल 106 प्रकार की दवाएं स्टोर में उपलब्ध हैं। जिनकी सूची सभी चिकित्सकों को दे दी गई है। लेकिन सूचना मिल रही है कि कुछ चिकित्सक निजी लाभ के लिए मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं लिख रहे हैं। निगरानी की जा रही है, कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. आरबी वर्मा ने बताया कि इन दिनों दाद से पीड़ित करीब 15 से 20 मरीज आ रहे हैं, लेकिन उनके इलाज के लिए इस समय फंगल क्रीम, एंटी एलर्जी टैबलेट आदि उपलब्ध ना होने से मजबूरी में बाहर की दवाई लिखी जा रही हैं।
जिला अस्पताल की ओपीडी प्रतिदिन 1500 से 2000 रोगी
कुल स्वीकृत चिकित्सकों के पद 51, तैनाती 27,
अनाधिकृत रूप से लापता 03
कुल बेड 212
कुल वार्ड 10
कुल व्हीलचेयर 15
कुल स्ट्रेचर 20
अस्पताल का वार्षिक बजट 3.5 करोड़
प्रतिमाह ऑपरेशन औसतन 200
लापरवाही के आरोप में कई बार हुआ हंगामा
छह अप्रैल को थाना पूराकलंदर के रंजीत का पुरवा सरियांवा निवासी लगभग 70 वर्षीय केदारनाथ पांडेय को लेकर उनके पुत्र कौशल पांडेय व पुत्री सुभद्रा देवी ने जिला अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष में दिखाया। करीब तीन घंटे बाद मरीज की मौत हो गई। जिस पर परिवारीजनों ने कई बार भर्ती कर स्थाई इलाज का आग्रह करने पर भी स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा अनसुना करने का आरोप लगाकर घंटों हंगामा किया। 8 मार्च को लवकुशनगर वजीरगंज निवासी आकाश मणि त्रिपाठी ने बाहर से अधिक दवाएं लिखने व निजी प्रैक्टिस के लिए घर पर बुलाने के लिए जिला अस्पताल के एक चिकित्सक पर आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। बीते वर्ष कुढ़ाकेशवपुर निवासी उदय तिवारी ने पिता के इलाज के समय इमरजेंसी कक्ष में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों से अभद्रता का आरोप लगाते हुए मारपीट करने का आरोप लगाते हुए घंटों प्रदर्शन किया।