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क्लोरीनयुक्त जलापूर्ति में अयोध्या पीछे
Updated Mon, 14 Aug 2017 11:04 PM IST
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जलजनित रोगों से बचाव को लेकर लापरवाही उजागर
फैजाबाद। अयोध्या क्षेत्र से लिए गए जलापूर्ति के पानी के नमूने ओटी टेस्ट में फेल हो रहे हैं। रिपोर्ट में पता चला कि, जलजनित रोगों से बचाव के लिए नगर निगम द्वारा की जाने वाली जलापूर्ति में क्लोरीन का प्रयोग अयोध्या क्षेत्र में कम हो रहा है।
इससे लोगों में जल से जनित तमाम तरह के रोग फैलने का खतरा व्याप्त है। स्वास्थ्य विभाग व नगर निगम की संयुक्त टीम द्वारा प्रतिदिन किए जा रहे ओटी टेस्ट में अयोध्या क्षेत्र में सर्वाधिक अनियमितता सामने आई है।
बता दें कि, लोगों को पेट की बीमारियों व अन्य जलजनित रोगों से बचाव के लिए नगर निगम द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले पानी में क्लोरीन मिलाई जाती है। क्लोरीन के मिश्रण से माइक्रो बैक्टीरिया व कैलीफाम बैक्टीरिया तुरंत मर जाते हैं।
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कम मात्रा में क्लोरीन के मिश्रण से बैक्टीरिया जल में बने रहते हैं और जलीय अशुद्धियों से सेहत को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है। हालांकि अधिक मात्रा में क्लोरीन का मिश्रण भी नुकसानदायक है। क्लोरीनयुक्त जल की साल भर आपूर्ति नगर निगम द्वारा कराई जाती है।
क्लोरीनयुक्त जल के परीक्षण के लिए स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की चार सदस्यीय संयुक्त टीम गठित की गई है। स्वास्थ्य विभाग के दो और नगर निगम के दो लोगों द्वारा प्रतिदिन मोहल्लेवार आपूर्ति किए गए जल का नमूना लेकर परीक्षण किया जाता है और प्रतिदिन इसकी रिपोर्ट डीएम को प्रेषित की जाती है।
इस परीक्षण में फैजाबाद की स्थिति तो अमूमन बेहतर है लेकिन अयोध्या क्षेत्र की स्थिति दयनीय है। पिछले सप्ताह हुए परीक्षण में करीब 33 प्रतिशत ही क्लोरीनयुक्त जल मिला है। अयोध्या क्षेत्र में छह से 12 अगस्त तक कुल 102 नमूने लिए गए।
इनमें से 36 नमूनों में क्लोरीन की मात्रा मिली और 66 नमूने क्लोरीन विहीन पाए गए। वहीं, फैजाबाद क्षेत्र में कुल 105 नमूने लिए गए, परीक्षण के बाद इनमें से 92 नमूनों में क्लोरीनयुक्त जल पाया गया।
एसीएमओ डॉ. सीबी द्विवेदी का कहना है कि, जल में क्लोरीन मिश्रित करने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। टीम द्वारा किए गए परीक्षण से प्राप्त रिपोर्ट की जानकारी प्रतिदिन डीएम को भेजी जाती है। इस संबंध में डीएम द्वारा ही कार्रवाई की जाती है।
ऐसे होता परीक्षण
ओटी टेस्ट से पानी में क्लोरीन की मात्रा का परीक्षण किया जाता है। इसके तहत स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों की टीम पांच मिली जल परखनली में लेकर ओटी सॉल्यूशन उसमें मिलाते हैं। क्लोरीन की मात्रा होने पर पीले रंग का मिश्रण बनता है।
जलजनित प्रमुख रोग
वैसे तो दूषित जल पीने से व्यक्ति अनेक रोगों की चपेट में आ जाता है मगर इनमें डायरिया, टाइफाइड, मलेरिया, अतिसार, पेचिश, मियादी बुखार, अतिज्वर, हैजा, कुकुर खांसी, सूजाक, क्षय रोग, पायरिया, निद्रा रोग, मलेरिया आदि प्रमुख हैं।
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फैजाबाद। अयोध्या क्षेत्र से लिए गए जलापूर्ति के पानी के नमूने ओटी टेस्ट में फेल हो रहे हैं। रिपोर्ट में पता चला कि, जलजनित रोगों से बचाव के लिए नगर निगम द्वारा की जाने वाली जलापूर्ति में क्लोरीन का प्रयोग अयोध्या क्षेत्र में कम हो रहा है।
इससे लोगों में जल से जनित तमाम तरह के रोग फैलने का खतरा व्याप्त है। स्वास्थ्य विभाग व नगर निगम की संयुक्त टीम द्वारा प्रतिदिन किए जा रहे ओटी टेस्ट में अयोध्या क्षेत्र में सर्वाधिक अनियमितता सामने आई है।
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बता दें कि, लोगों को पेट की बीमारियों व अन्य जलजनित रोगों से बचाव के लिए नगर निगम द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले पानी में क्लोरीन मिलाई जाती है। क्लोरीन के मिश्रण से माइक्रो बैक्टीरिया व कैलीफाम बैक्टीरिया तुरंत मर जाते हैं।
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कम मात्रा में क्लोरीन के मिश्रण से बैक्टीरिया जल में बने रहते हैं और जलीय अशुद्धियों से सेहत को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है। हालांकि अधिक मात्रा में क्लोरीन का मिश्रण भी नुकसानदायक है। क्लोरीनयुक्त जल की साल भर आपूर्ति नगर निगम द्वारा कराई जाती है।
क्लोरीनयुक्त जल के परीक्षण के लिए स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की चार सदस्यीय संयुक्त टीम गठित की गई है। स्वास्थ्य विभाग के दो और नगर निगम के दो लोगों द्वारा प्रतिदिन मोहल्लेवार आपूर्ति किए गए जल का नमूना लेकर परीक्षण किया जाता है और प्रतिदिन इसकी रिपोर्ट डीएम को प्रेषित की जाती है।
इस परीक्षण में फैजाबाद की स्थिति तो अमूमन बेहतर है लेकिन अयोध्या क्षेत्र की स्थिति दयनीय है। पिछले सप्ताह हुए परीक्षण में करीब 33 प्रतिशत ही क्लोरीनयुक्त जल मिला है। अयोध्या क्षेत्र में छह से 12 अगस्त तक कुल 102 नमूने लिए गए।
इनमें से 36 नमूनों में क्लोरीन की मात्रा मिली और 66 नमूने क्लोरीन विहीन पाए गए। वहीं, फैजाबाद क्षेत्र में कुल 105 नमूने लिए गए, परीक्षण के बाद इनमें से 92 नमूनों में क्लोरीनयुक्त जल पाया गया।
एसीएमओ डॉ. सीबी द्विवेदी का कहना है कि, जल में क्लोरीन मिश्रित करने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। टीम द्वारा किए गए परीक्षण से प्राप्त रिपोर्ट की जानकारी प्रतिदिन डीएम को भेजी जाती है। इस संबंध में डीएम द्वारा ही कार्रवाई की जाती है।
ऐसे होता परीक्षण
ओटी टेस्ट से पानी में क्लोरीन की मात्रा का परीक्षण किया जाता है। इसके तहत स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों की टीम पांच मिली जल परखनली में लेकर ओटी सॉल्यूशन उसमें मिलाते हैं। क्लोरीन की मात्रा होने पर पीले रंग का मिश्रण बनता है।
जलजनित प्रमुख रोग
वैसे तो दूषित जल पीने से व्यक्ति अनेक रोगों की चपेट में आ जाता है मगर इनमें डायरिया, टाइफाइड, मलेरिया, अतिसार, पेचिश, मियादी बुखार, अतिज्वर, हैजा, कुकुर खांसी, सूजाक, क्षय रोग, पायरिया, निद्रा रोग, मलेरिया आदि प्रमुख हैं।