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इसबार सात बजे के बाद करें होलिका दहन

Mon, 19 Feb 2018 11:49 PM IST
Updated Mon, 19 Feb 2018 11:49 PM IST
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इसबार सात बजे के बाद करें होलिका दहन
एक मार्च की शाम 6:58 मिनट पर खत्म होगी भद्रा
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अयोध्या। होली के त्योहार के एक दिन पूर्व होलिका दहन के दिन पवित्र अग्नि जलाई जाती है जो बुराई पर अच्छाई की जीत का संकेत है। इस बार होलिका दहन 01 मार्च को अगले दिन होली का त्योहार मनाया जाएगा। ज्योतिषियों के मुताबिक होलिका दहन 01 मार्च को शाम 7 बजे करना श्रेयस्कर होगा। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात्रि 8:55 मिनट तक है।
ज्योतिष गुरु स्वामी हरिदयाल मिश्र बताते हैं कि पूर्णिमा का मान 01 मार्च को सुबह 7:52 मिनट से 02 मार्च की सुबह 6 बजे तक है, जबकि भद्रा काल शाम 6:58 मिनट के बाद खत्म होगा। ऐसे में होलिका दहन शाम 7 बजे के बाद करना ही लाभकारी होगा। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात्रि 8:55 मिनट तक है। बताया कि होलिका से जुड़ी अलग-अलग परंपरा भी है। कुछ जगहों पर होलिका और प्रहलाद का पुतला भी बनाकर आग में रखा जाता है। भक्त इस पवित्र अग्नि में जौ को भूनकर अपने प्रियजनों को बांटते हैं और बदले में कुछ लेते हैं। ऐसा माना जाता है कि अग्नि में जौ जलाने से सभी तरह की समस्याएं नष्ट हो जाती हैं और जीवन में सकारात्मकता आती है।
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ऐसे करें होलिका पूजन
ज्योतिष गुरु के अनुसार होलिका दहन पूजन में ध्यान रखने योग्य बात यह है कि वृक्ष काटकर लकड़ियां एकत्र न करें, क्योंकि यह न तो विधान है और न ही पर्यावरण की दृष्टि से अनुकूल है। होलिका दहन पूजन के लिए रोली, कच्चा सूत, पुष्प, हल्दी की गांठे, खड़ी मूंग, बताशे, मिष्ठान, नारियल, बड़बुले आदि का प्रयोग किया जाता है। अबीर, गुलाल मिश्रित जल का प्रयोग पूजन में करना चाहिए। होलिका दहन से पूर्व विधिवत पूजन करने के बाद अर्घ्य देना चाहिए।
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इस तरह शुरू हुई होलिका दहन की रीति
होलिका मनाने के पीछे एक कहानी प्रचलित है। भक्त प्रहलाद के पिता हिरण्यकश्यप अपने बेटे से बहुत नफरत करते थे। उन्होंने प्रहलाद पर हजारों हमले करवाए फिर भी प्रहलाद सकुशल रहा। हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका को भेजा, होलिका को वरदान था कि वह आग से नहीं जलेगी। हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को बोला कि वह प्रहलाद को लेकर आग में बैठ जाए। होलिका प्रहलाद को लेकर आग में बैठ गई, लेकिन प्रहलाद अपने आराध्य भगवान विष्णु का नाम जपते रहे, परिणाम स्वरूप होलिका जल गई और प्रहलाद सकुशल बच गए। तब से होलिका दहन की परंपरा शुरू हुई।


होली को लेकर बाजारों में बड़ी रौनक
होली में हालांकि अभी 11 दिन का समय बचा है, फिर भी बाजारों में रौनक बढ़ गई हैं। रंग गुलाल, पिचकारी आदि से बाजार सजने लगे हैं। कपड़ों की दुकानों पर भीड़ बढ़ने लगी है। गुलाल के चटख रंग लोगों को लुभा रहे हैं, तो वहीं विभिन्न कार्टूनों की पिचकारियां बच्चों को आकर्षित कर रही हैं। होलिका दहन के लिए शहर में जगह-जगह चौक चौराहों पर अरंड की डाल भी स्थापित की जा चुकी है।
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