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रामनगरी में स्थापित होगी लीला संकुल एकेडमी
Updated Sat, 30 Jun 2018 12:33 AM IST
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रामनगरी में स्थापित होगी लीला संकुल एकेडमी
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में शीघ्र ही लीला संकुल एकेडमी स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसकी जिम्मेदारी अवध विश्वविद्यालय को सौंपी गई है। प्रदेश सरकार ने कुलपति से एकेडमी स्थापना के लिए प्रस्ताव मांगा है। लीला संकुल एकेडमी की स्थापना से रामलीला के वैश्विक स्वरूप पर शोध करने में सहायता मिलेगी। इसके माध्यम से रामलीला के मूल स्वरूप के संरक्षण, संवर्धन के लिए रामलीला का अलग-अलग संदर्भों में संकलन कर विभिन्न गतिविधियां भी संचालित कराई जाएंगी। राम की संस्कृति के अध्ययन के लिए कोर्सेज भी चलाए जाऐंगे। इसमें रामलीला आधारित म्यूजियम भी विकसित किया जाएगा।
अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने बताया कि राम की वैश्विकता पूरे विश्व में प्रमाणिकता के साथ है। बावजूद इसके रामलीला का मूल स्वरूप समाप्त हो रहा है। रामलीला के इसी मूल स्वरूप के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर लीला संकुल एकेडमी स्थापित करने की परिकल्पना की गई। प्रदेश सरकार द्वारा अवध विश्वविद्यालय से इसके लिए प्रस्ताव भी मांगा गया है। एक सप्ताह के भीतर प्रस्ताव बनाकर भेज दिया जाएगा। प्रदेश सरकार द्वारा योजना को हरी झंडी मिलते ही इसे मूर्त रूप देने का काम शुरू हो जाएगा। बताया कि लीला एकेडमी की स्थापना से राम की वैश्विक यात्रा पर शोध करने में मदद मिलेगी। यह लीला एकेडमी राम की संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान करने में मील का पत्थर साबित होगी। एकेडमी में एक म्यूजियम की भी स्थापना की जाएगी, जिसमें रामलीला के विभिन्न संदर्भों को चित्रों, भित्तिचित्रों आदि के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।
भारत में होती 100 तरह की रामलीलाएं
कुलपति बताते हैं कि रामलीला भारत के 20 राज्यों एवं विश्व के 65 देशों में प्रचलित है। भारत में करीब 100 तरह की रामलीलाएं होती हैं। पूरे विश्व को इकाई मानकर यदि इसे प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाए तो राम की संस्कृति दक्षिण पूर्ण एशिया से लेकर मध्य अमेरिका तक विस्तृत है। बताते हैं कि दक्षिण पूर्व एशिया के थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, कंबोडिया आदि तथा कैरेबियन देश वेस्टइंडीज, सूरीनाम मारीशस आदि में राम की संस्कृति फैली हुई है। इसी तरह मध्य पूर्व के ईराक, सीरिया, मिस्र व यूरोप के इंग्लैंड, बेल्जियम तथा मध्य अमेरिका तक राम की वैश्विकता का प्रमाण मिलता है।
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अयोध्या आकर हिंदू धर्म पर शोध करेंगे 30 अमेरिकी छात्र
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या विश्व भर के लिए श्रद्धा का केंद्र है तो यहां की सांस्कृतिक, धार्मिक आभा भी शोध का विषय रही है। जिसने दुनिया भर के लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया है। अब अमेरिका से 30 छात्रों का एक दल अयोध्या आकर हिंदू धर्म का अध्ययन करेगा और विभिन्न मंदिरों एवं पौराणिक स्थलों का दर्शन-पूजन कर उसकी धार्मिकता से परिचित होगा। छात्रों के लिए अवध विश्वविद्यालय में विशेष कार्यशाला का भी आयोजन किया जाएगा ताकि उन्हें हिंदू धर्म के बारे में ठीक से जानकारी मिल सके।
गत दिनों यूएस के एक छात्र दल ने प्रदेश के पर्यटन विभाग से यहां आने की लिए इच्छा जताई थी। जिसके बाद पर्यटन विभाग ने इसकी जिम्मेदारी अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित को सौंपी है। कुलपति ने बताया कि हिंदू धर्म को विश्व का प्राचीनतम धर्म कहा जाता है। विदेशी छात्र अब हिंदू धर्म का अध्ययन करने के लिए रामनगरी अयोध्या आ रहे हैं। कहा कि अमेरिका के करीब सात विश्वविद्यालयों में हिंदू धर्म का अध्ययन कराया जाता है। करीब 30 अमेरिकी छात्र अक्तूबर-नवंबर माह में अयोध्या आ सकते हैं। जिन्हें अयोध्या के विभिन्न धार्मिक स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। कहा कि हमारा प्रयास होगा कि हिंदू धर्म के विभिन्न आयामों से छात्रों को परिचित कराया जा सके, इसके लिए विश्वविद्यालय में एक विशेष कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी।
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अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में शीघ्र ही लीला संकुल एकेडमी स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसकी जिम्मेदारी अवध विश्वविद्यालय को सौंपी गई है। प्रदेश सरकार ने कुलपति से एकेडमी स्थापना के लिए प्रस्ताव मांगा है। लीला संकुल एकेडमी की स्थापना से रामलीला के वैश्विक स्वरूप पर शोध करने में सहायता मिलेगी। इसके माध्यम से रामलीला के मूल स्वरूप के संरक्षण, संवर्धन के लिए रामलीला का अलग-अलग संदर्भों में संकलन कर विभिन्न गतिविधियां भी संचालित कराई जाएंगी। राम की संस्कृति के अध्ययन के लिए कोर्सेज भी चलाए जाऐंगे। इसमें रामलीला आधारित म्यूजियम भी विकसित किया जाएगा।
अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने बताया कि राम की वैश्विकता पूरे विश्व में प्रमाणिकता के साथ है। बावजूद इसके रामलीला का मूल स्वरूप समाप्त हो रहा है। रामलीला के इसी मूल स्वरूप के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर लीला संकुल एकेडमी स्थापित करने की परिकल्पना की गई। प्रदेश सरकार द्वारा अवध विश्वविद्यालय से इसके लिए प्रस्ताव भी मांगा गया है। एक सप्ताह के भीतर प्रस्ताव बनाकर भेज दिया जाएगा। प्रदेश सरकार द्वारा योजना को हरी झंडी मिलते ही इसे मूर्त रूप देने का काम शुरू हो जाएगा। बताया कि लीला एकेडमी की स्थापना से राम की वैश्विक यात्रा पर शोध करने में मदद मिलेगी। यह लीला एकेडमी राम की संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान करने में मील का पत्थर साबित होगी। एकेडमी में एक म्यूजियम की भी स्थापना की जाएगी, जिसमें रामलीला के विभिन्न संदर्भों को चित्रों, भित्तिचित्रों आदि के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।
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भारत में होती 100 तरह की रामलीलाएं
कुलपति बताते हैं कि रामलीला भारत के 20 राज्यों एवं विश्व के 65 देशों में प्रचलित है। भारत में करीब 100 तरह की रामलीलाएं होती हैं। पूरे विश्व को इकाई मानकर यदि इसे प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाए तो राम की संस्कृति दक्षिण पूर्ण एशिया से लेकर मध्य अमेरिका तक विस्तृत है। बताते हैं कि दक्षिण पूर्व एशिया के थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, कंबोडिया आदि तथा कैरेबियन देश वेस्टइंडीज, सूरीनाम मारीशस आदि में राम की संस्कृति फैली हुई है। इसी तरह मध्य पूर्व के ईराक, सीरिया, मिस्र व यूरोप के इंग्लैंड, बेल्जियम तथा मध्य अमेरिका तक राम की वैश्विकता का प्रमाण मिलता है।
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अयोध्या आकर हिंदू धर्म पर शोध करेंगे 30 अमेरिकी छात्र
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या विश्व भर के लिए श्रद्धा का केंद्र है तो यहां की सांस्कृतिक, धार्मिक आभा भी शोध का विषय रही है। जिसने दुनिया भर के लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया है। अब अमेरिका से 30 छात्रों का एक दल अयोध्या आकर हिंदू धर्म का अध्ययन करेगा और विभिन्न मंदिरों एवं पौराणिक स्थलों का दर्शन-पूजन कर उसकी धार्मिकता से परिचित होगा। छात्रों के लिए अवध विश्वविद्यालय में विशेष कार्यशाला का भी आयोजन किया जाएगा ताकि उन्हें हिंदू धर्म के बारे में ठीक से जानकारी मिल सके।
गत दिनों यूएस के एक छात्र दल ने प्रदेश के पर्यटन विभाग से यहां आने की लिए इच्छा जताई थी। जिसके बाद पर्यटन विभाग ने इसकी जिम्मेदारी अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित को सौंपी है। कुलपति ने बताया कि हिंदू धर्म को विश्व का प्राचीनतम धर्म कहा जाता है। विदेशी छात्र अब हिंदू धर्म का अध्ययन करने के लिए रामनगरी अयोध्या आ रहे हैं। कहा कि अमेरिका के करीब सात विश्वविद्यालयों में हिंदू धर्म का अध्ययन कराया जाता है। करीब 30 अमेरिकी छात्र अक्तूबर-नवंबर माह में अयोध्या आ सकते हैं। जिन्हें अयोध्या के विभिन्न धार्मिक स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। कहा कि हमारा प्रयास होगा कि हिंदू धर्म के विभिन्न आयामों से छात्रों को परिचित कराया जा सके, इसके लिए विश्वविद्यालय में एक विशेष कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी।