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जीका वायरस से निपटने को 35 बेड का वार्ड बना

Sat, 13 Nov 2021 11:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 13 Nov 2021 11:39 PM IST
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Zika became a 35-bed ward to deal with the virus
इटावा। डेंगू और वायरल बुखार अभी खतम भी नहीं हुआ था, कि पड़ोसी जिलों में जीका वायरस के दस्तक से लोग सहम गए हैं। वैसे जिले में अभी तक जीका का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन औरैया व कन्नौज में जीका के रोगी सामने आने के बाद जिले के स्वास्थ्य महकमे ने भी अपनी तैयारियां पहले से ही शुरू कर दी हैं।
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जीका वायरस से निपटने के लिए जिला अस्पताल में 35 बेड का वार्ड बनाया गया है। आप घबराएं नहीं, जिले के स्वास्थ्य विभाग ने जीका संक्रमण से निपटने के लिए सभी तैयारियां पहले से ही पूरी कर ली हैं।
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जिला अस्पताल में 35 बेड का जीका वार्ड बनकर तैयार हो गया है। इसके अलावा सभी 35 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जीका संक्रमित मरीजों के लिए बेड सुरक्षित कर दिए गए हैं। जीका से निपटने के लिए पर्याप्त दवाएं भी उपलब्ध हैं।
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साथ ही जीका से संक्रमित रोगी मिलने के बाद उनके घरों तक दवाएं पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। जिला अस्पताल में जीका वार्ड बनाने के बाद वायरल बुखार वार्ड में भी मच्छरों से बचाव के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
डॉक्टरों की टीम को रोगियों के उपचार के लिए तैयार कर लिया गया है। इलाज के सभी इंतजाम हैं। इस बाबत सीएमओ डॉ. भगवान दास ने बताया कि पहले जिला अस्पताल में जीका संक्रमित मरीजों के लिए 10 बेड सुरक्षित किए गए थे।
पिछले दिनों कानपुर मंडल के अपर निदेशक स्वास्थ्य इटावा की स्वास्थ्य सेवाओं का हाल देखने आए थे। तब उन्होंने जिला अस्पताल में जीका मरीजों के लिए 35 बेड का वार्ड बनाए जाने को कहा था।
इसके अलावा जिले की आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व 34 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 10-10 बेड जीका रोगियों के लिए सुरक्षित किए गए हैं। सभी अस्पतालों में पर्याप्त दवाएं व उपचार के लिए डॉक्टरों टीम को तैयार रखा गया है।
जीका से बचाव को क्या करें
खुद को मच्छरों के काटने से बचाएं, छत पर पड़े कबाड़ में पानी इकट्ठा न होने दें, घर के आसपास कूड़ा-कचरा, जलभराव न रहनें दें, रोगी को मच्छर दानी में रखें, खिड़कियों पर जाली लगाएं, बुखार के रोगी की खून की जांच कराएं बिना दवा न लें,
बुखार के रोगी खाली पेट दवा न लें, घर में कूलर, बॉल्टी, ड्रम का पानी एक हफ्ते में बदल दें, कूलर के टैंक को सूखा रखें, पानी की टंकियों और बर्तनों को ढक्कन से बंद रखें, पूरी आस्तीन का कपड़ा व जूता-मोजा पहनें, बुखार आने पर अस्पताल में परीक्षण कराएं।
जीका के लक्षण
सिर दर्द, बुखार, जोड़ों में दर्द, आंखों का लाल होना और त्वचा पर लाल चकत्ते उभरना।
कोरोना की तरह जीका की निगरानी
कोरोना की तरह जीका मरीजों की निगरानी की व्यवस्था की गई है। एएनएम और स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मचारियों को जीका संक्रमित रोगी पर नजर रखने को कहा गया है।
यह भी निर्देश दिया गया कि कहीं भी जीका संक्रमित मरीज हो, तो उसके बारे में संबंधित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर के साथ ही सीएमओ ऑफिस भी सूचना दी जाए।
अगर कहीं भी किसी के जीका संक्रमित होने का मामला सामने आता है, तो रोगी के घर के आसपास एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जाएगा। फागिंग भी कराई जाएगी।
कुल मिलाकर अगर जिले में जीका संक्रमण का मामला सामने आता है, तो उसके फैलाव को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया है। सभी व्यवस्थाएं भी लगभग पूरी कर लीं हैं।
हवा और छूने से नहीं फैलता जीका
जीका वायरस हवा और रोगी को छूने, उसके पास उठने बैठने से नहीं फैलता है। अगर मच्छर रोगी को काटने के बाद दूसरे व्यक्ति को काटेगा तभी संक्रमण होता है।
इसके अलावा जीका जानलेवा भी नहीं है। 60 फीसदी लोगों को तो पता ही नहीं चलता कि संक्रमण हुआ है। वायरल बढ़ने पर ही लक्षण उभरते हैं। जो पहले से किसी रोग की गिरफ्त में है, तो अन्य वायरल संक्रमण की तरह जीका भी पुराने रोग की जटिलताएं बढ़ा देगा।

इसमें बुखार वाली ही दवाएं चलती हैं। रोगी सात से 14 दिन के भीतर स्वस्थ हो जाता है।
जिला अस्पताल में 35 बेड का जीका वार्ड बना दिया गया है। इसमें रोगियों को लक्षण के आधार पर भर्ती कर उपचार किया जाएगा। बुखार के लिए पैरासिटामाल की टेबलेट दी जाती है। वार्ड में मच्छरदानी व मच्छर भगाने के लिए रिपेंलेंट की व्यवस्था कर दी गई है।
- डॉ. भगवान दास, सीएमओ, इटावा
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