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वोट डालने की चाहत जवान
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इटावा। उम्र के शुरुआती दौर देखने के बाद अब अंतिम पड़ाव की ओर जा रहे वृद्धों में वोट डालने की चाहत अभी जवान नजर आ रही है। सौ साल उम्र के करीब के बुजुर्ग चुनाव के बदले माहौल से एक दम से दूर है। वह सोशल मीडिया से हो रहे चुनाव प्रचार से पूरी तरह से अंजान है।
कहते हैं कि जब तक चुनाव में गाड़ियों से प्रचार न हो, पर्चे व बिल्ले न बंटें, तब तक चुनाव में मजा नहीं आता, लेकिन उनका मानना है कि इस तरह के चुनाव-प्रचार से आपसी रंजिश नहीं होती।
पहले तो बात-बात पर लोग आपस में झगड़ा करने पर आमादा हो जाते थे। बसरेहर क्षेत्र के बुजुर्ग श्याम बाबू शाक्य नेे बताया कि उन्होंने शादी के बाद पहली बार वोट डाला था।
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उस समय हाथ उठा कर पहली बार मतदान किया था। बाद में बैलेट पेपर से मतदान किया। अब मशीन का बटन दबाकर मतदान करते हैं। इस बार भी वह बटन दबाने के लिए मतदान केंद्र पर जाएंगे।
शकुंतला देवी ने कहा कि पहले वह स्वयं मतदान करने के लिए मतदान केंद्र पर मोहल्ले की महिलाओं के साथ जाती थी, लेकिन अब उनके घर वाले वोट कराने के लिए मतदान केंद्र ले जाते है।
भीड़ तो होती है, लेकिन वृद्धावस्था को देखते हुए उन्हें पहले वोट डलवा दिया जाता है। वह वोट डालने जरूर जाती है। शाति देवी ने बताया कि नेता चुनाव के समय तो बहुत से वादे करते हैं, लेकिन बाद में उन्हें अपने वादों की याद नहीं रहती।
नेता चुनाव के बाद भी लोगों के साथ किए वादों को याद रखें, तो उन्हें मतदाताओं के घरों के चक्कर न लगाने पडे़।
गंगा देवी ने कहा कि पहले घर के लोग चुनाव निशान बता देते थे कि उसमें वोट डालना है उसी हिसाब से वोट डाल आते थे, लेकिन अब घर की लड़कियां व नई बहुएं अपने हिसाब से वोट करने कीबात कहती हैं।
यह अच्छी बात है महिलाओं को भी जागरूक होना चाहिए। नेता बदल जाते हैं, तो वोटर को भी बदलना चाहिए। वृद्ध महिला सोनी देवी ने बताया कि पहले नेता वोट मांगने के लिए टोलियों में आते थे। खूब साउंड बजता था। अब समय बदल गया।
कहा कि सरकार उसकी बने जो किसानों व गरीब जनता के बारे में सोचे और क्षेत्र का विकास कराए। बुजुर्ग माया देवी ने बताया कि चुनाव का माहौल एक दम से बदल गया है।
फोन पर प्रचार होता है और फोन पर ही बातें हो जाती हैं। पहले गांव के बुजुर्ग जिसे वोट देने के लिए कह देते थे। सब उसी को वोट देते थे, लेकिन अब कोई किसी की बात नहीं मानता।
सब अपने हिसाब से वोट करते हैं। एक परिवार के लोगों के मत भी अलग-अलग है। अब कोई शोरशराबा दिखाई नहीं दे रहा।
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कहते हैं कि जब तक चुनाव में गाड़ियों से प्रचार न हो, पर्चे व बिल्ले न बंटें, तब तक चुनाव में मजा नहीं आता, लेकिन उनका मानना है कि इस तरह के चुनाव-प्रचार से आपसी रंजिश नहीं होती।
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पहले तो बात-बात पर लोग आपस में झगड़ा करने पर आमादा हो जाते थे। बसरेहर क्षेत्र के बुजुर्ग श्याम बाबू शाक्य नेे बताया कि उन्होंने शादी के बाद पहली बार वोट डाला था।
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उस समय हाथ उठा कर पहली बार मतदान किया था। बाद में बैलेट पेपर से मतदान किया। अब मशीन का बटन दबाकर मतदान करते हैं। इस बार भी वह बटन दबाने के लिए मतदान केंद्र पर जाएंगे।
शकुंतला देवी ने कहा कि पहले वह स्वयं मतदान करने के लिए मतदान केंद्र पर मोहल्ले की महिलाओं के साथ जाती थी, लेकिन अब उनके घर वाले वोट कराने के लिए मतदान केंद्र ले जाते है।
भीड़ तो होती है, लेकिन वृद्धावस्था को देखते हुए उन्हें पहले वोट डलवा दिया जाता है। वह वोट डालने जरूर जाती है। शाति देवी ने बताया कि नेता चुनाव के समय तो बहुत से वादे करते हैं, लेकिन बाद में उन्हें अपने वादों की याद नहीं रहती।
नेता चुनाव के बाद भी लोगों के साथ किए वादों को याद रखें, तो उन्हें मतदाताओं के घरों के चक्कर न लगाने पडे़।
गंगा देवी ने कहा कि पहले घर के लोग चुनाव निशान बता देते थे कि उसमें वोट डालना है उसी हिसाब से वोट डाल आते थे, लेकिन अब घर की लड़कियां व नई बहुएं अपने हिसाब से वोट करने कीबात कहती हैं।
यह अच्छी बात है महिलाओं को भी जागरूक होना चाहिए। नेता बदल जाते हैं, तो वोटर को भी बदलना चाहिए। वृद्ध महिला सोनी देवी ने बताया कि पहले नेता वोट मांगने के लिए टोलियों में आते थे। खूब साउंड बजता था। अब समय बदल गया।
कहा कि सरकार उसकी बने जो किसानों व गरीब जनता के बारे में सोचे और क्षेत्र का विकास कराए। बुजुर्ग माया देवी ने बताया कि चुनाव का माहौल एक दम से बदल गया है।
फोन पर प्रचार होता है और फोन पर ही बातें हो जाती हैं। पहले गांव के बुजुर्ग जिसे वोट देने के लिए कह देते थे। सब उसी को वोट देते थे, लेकिन अब कोई किसी की बात नहीं मानता।
सब अपने हिसाब से वोट करते हैं। एक परिवार के लोगों के मत भी अलग-अलग है। अब कोई शोरशराबा दिखाई नहीं दे रहा।