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एसिड अटैक पर महिलाएं चिंतित
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इटावा। अमर उजाला का चुनावी रथ सत्ता का संग्राम के तहत मंगलवार को चाय की चर्चा के बाद दोपहर में सिंचाई विभाग के प्रशासनिक भवन के सभागार में आधी आबादी पर चर्चा पर आयोजित हुई।
महिलाओं ने खुलकर अपनी बात रखी। महिलाओं ने पिछले दिनों शहर में महिलाओं पर हुईं एसिड की घटनाओं से लेकर महिला सुरक्षा को लेकर खुलकर अपनी बात रखीं।
समाज सेविका पूनम तिवारी ने बदलाव की बात करते हुए कहा कि अब बच्चियां पढ़ने और कोचिंग जाने में खुद को सुरक्षित महसूस कर रही हैं। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बन रही हैं।
क्षमा दीक्षित का कहना था कि महिला सुरक्षा को लेकर थोड़ी सुरक्षा और होनी चाहिए। जैसे हर स्कूल के सामने महिला पुलिस होनी चाहिए। मलिन बस्ती की महिला आवाज बुलंद नहीं करती।
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बाजार के अंदर होने वाली घटनाएं रुकनी चाहिए। हर सोसायटी की महिलाएं आगे नहीं जाती। समारंभा फाउंडेशन की सदस्य पूनम अग्रवाल ने कहा कि महिला सुरक्षा जरूर होनी चाहिए।
शहर में तिकोनिया के पास एसिड अटैक की घटनाएं हों चुकी हैं। सुरक्षा कम है, चौराहा पर महिला पुलिस नहीं दिखाई देती। कहा कि पुलिस वाले भी ध्यान नहीं देते हैं।
आकांक्षा गुप्ता का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा को और बढ़ाया जाए। अभी कमजोर है, लेकिन पहले से बेहतर हुई है। समारंभा फाउंडेशन की जिला कोआर्डिनेटर संगीता अग्रवाल ने कहा कि कोई भी सरकार हो पूर्व से स्थिति से बेहतर है। कमियां हमेशा रहेंगी।
महिलाएं पूरी तरह सुरक्षित है कहना सही नहीं है। अक्षत फाउंडेशन की अध्यक्ष व शिक्षिका वीनस सेंगर ने खाक इतने हैं तरक्की से हमारे कुछ लोग, पांव हम जहां शरर रखते हैं, के शायराना अंदाज में अपनी बात रखी।
कहा कि महिला सुरक्षा जरूरी हो, जिससे महिलाएं सुरक्षित हों। पितृ सत्ता की मानसिकता है, जरूरी नहीं पितृ सत्ता, बल्कि महिलाओं में भी है इसे तोड़ने की जरूरत है।
प्रधानाचार्या पिंकी दोहरे ने कहा कि सबसे पहले स्त्री को स्वयं इतना सक्षम होना चाहिए कि सामने से फेस कर सके। मेरे पिता ने मुझे ताइक्वांडो सिखाया। आज के दौर में छोटे-छोटे लड़के भी सुरक्षित नहीं हैं।
प्रमिला पालीवाल ने कहा कि सौ प्रतिशत कभी सही नहीं होता। वर्तमान सरकार अच्छा काम कर रही है। मातृशक्ति हर क्षेत्र में आगे नजर आ रही है। महिला थानों में महिला हेल्प डेस्क बनाई है। आज आधी आबादी फ्रंट पर है और काम कर रही हैं।
आशा बहन शकुंतला देवी ने अपनी समस्या बताई। कोविड में ड्यूटी में लगाई गई, छुट्टी नहीं मिलती है। बावजूद इसके कम मानदेय मिलता हैं। बिरला शाक्य ने कहा कि आशा बहन की समस्या को दूर कराने का प्रयास करेंगे।
पहले अकेले निकलने में दिक्कत, अब नहीं
दीप्ती सिंघल ने कहा कि घटिया स्तर का नालियां बनाई जाती हैं, चार या छह माह में ध्वस्त हो जाती है। श्यामला पांडेय ने कहा कि पहले अकेले निकलने में दिक्कत होती थीं, अब बेहतर है। अपराध इसलिए कम नहीं हो रहे कि युवा शिक्षा की ओर नहीं, बल्कि रोड रोमियो बन रहे हैं।
स्थानीय परिवाद समिति की अध्यक्ष व संस्कृत प्रवक्ता डॉ. ज्योति वर्मा का कहना है कि बेटियों को बहुत कुछ दे सकते हैं। बेटों को भी नैतिकता का पाठ पढ़ाना चाहते हैं। बेटियों को सरकार हमें अभियान सुरक्षा दे रही है।
हम सुरक्षा का लाभ नहीं ले पा रहे है। इसलिए नहीं ले पा रहे हैं कि हम बेटे और बेटियों में भेद कर रहे हैं। संस्कार और नैतिकता नहीं ला सकते तो सरकार को दोष भी नहीं दे सकते।
सरकार पूरा काम कर रही है। आज महिलाएं रात का सफर कर सकतीं थीं। जब से भाजपा सरकार बनी हैं स्वच्छंद तरीके से आती जाती हूं।
इतनी सुरक्षा पहले कमी नहीं देखी
छात्रा जाग्रति वर्मा ने आज कोई चौराहा नहीं जहां पांच से दस पुलिस कर्मी नहीं है। इटावा में इतनी सुरक्षा पहले कभी नहीं देखी। जितनी अब है। किसान संघ की प्रदेश संयोजिका सुशीला राजावत ने कहा कि किसानों का मुद्दा असर पड़ेगा।
महिलाएं आज वाकई सुरक्षित हैं। थाने जाने पर जल्दी सुनवाई होती है। चित्रा परिहार ने कहा कि मुद्दे केवल इटावा नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश, देश में हैं। महिलाओं को अधिकार तो मिल रहे हैं, लेकिन कानूनन नहीं। मानसिकताओं से अधिकार नहीं मिल रहे हैं।
महिलाएं आचार विचार से सुरक्षित होंगी। एक महिला सौ के बराबर होती है। पूर्व बीडीओ सुप्रिया मिश्रा ने कहा कि आज पहले की अपेक्षा काफी सुरक्षित हैं। आज महिलाएं खुद निर्भर हैं। गृहणी अंजली कश्यप ने कहा कि इटावा बेहतर है।
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महिलाओं ने खुलकर अपनी बात रखी। महिलाओं ने पिछले दिनों शहर में महिलाओं पर हुईं एसिड की घटनाओं से लेकर महिला सुरक्षा को लेकर खुलकर अपनी बात रखीं।
समाज सेविका पूनम तिवारी ने बदलाव की बात करते हुए कहा कि अब बच्चियां पढ़ने और कोचिंग जाने में खुद को सुरक्षित महसूस कर रही हैं। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बन रही हैं।
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क्षमा दीक्षित का कहना था कि महिला सुरक्षा को लेकर थोड़ी सुरक्षा और होनी चाहिए। जैसे हर स्कूल के सामने महिला पुलिस होनी चाहिए। मलिन बस्ती की महिला आवाज बुलंद नहीं करती।
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बाजार के अंदर होने वाली घटनाएं रुकनी चाहिए। हर सोसायटी की महिलाएं आगे नहीं जाती। समारंभा फाउंडेशन की सदस्य पूनम अग्रवाल ने कहा कि महिला सुरक्षा जरूर होनी चाहिए।
शहर में तिकोनिया के पास एसिड अटैक की घटनाएं हों चुकी हैं। सुरक्षा कम है, चौराहा पर महिला पुलिस नहीं दिखाई देती। कहा कि पुलिस वाले भी ध्यान नहीं देते हैं।
आकांक्षा गुप्ता का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा को और बढ़ाया जाए। अभी कमजोर है, लेकिन पहले से बेहतर हुई है। समारंभा फाउंडेशन की जिला कोआर्डिनेटर संगीता अग्रवाल ने कहा कि कोई भी सरकार हो पूर्व से स्थिति से बेहतर है। कमियां हमेशा रहेंगी।
महिलाएं पूरी तरह सुरक्षित है कहना सही नहीं है। अक्षत फाउंडेशन की अध्यक्ष व शिक्षिका वीनस सेंगर ने खाक इतने हैं तरक्की से हमारे कुछ लोग, पांव हम जहां शरर रखते हैं, के शायराना अंदाज में अपनी बात रखी।
कहा कि महिला सुरक्षा जरूरी हो, जिससे महिलाएं सुरक्षित हों। पितृ सत्ता की मानसिकता है, जरूरी नहीं पितृ सत्ता, बल्कि महिलाओं में भी है इसे तोड़ने की जरूरत है।
प्रधानाचार्या पिंकी दोहरे ने कहा कि सबसे पहले स्त्री को स्वयं इतना सक्षम होना चाहिए कि सामने से फेस कर सके। मेरे पिता ने मुझे ताइक्वांडो सिखाया। आज के दौर में छोटे-छोटे लड़के भी सुरक्षित नहीं हैं।
प्रमिला पालीवाल ने कहा कि सौ प्रतिशत कभी सही नहीं होता। वर्तमान सरकार अच्छा काम कर रही है। मातृशक्ति हर क्षेत्र में आगे नजर आ रही है। महिला थानों में महिला हेल्प डेस्क बनाई है। आज आधी आबादी फ्रंट पर है और काम कर रही हैं।
आशा बहन शकुंतला देवी ने अपनी समस्या बताई। कोविड में ड्यूटी में लगाई गई, छुट्टी नहीं मिलती है। बावजूद इसके कम मानदेय मिलता हैं। बिरला शाक्य ने कहा कि आशा बहन की समस्या को दूर कराने का प्रयास करेंगे।
पहले अकेले निकलने में दिक्कत, अब नहीं
दीप्ती सिंघल ने कहा कि घटिया स्तर का नालियां बनाई जाती हैं, चार या छह माह में ध्वस्त हो जाती है। श्यामला पांडेय ने कहा कि पहले अकेले निकलने में दिक्कत होती थीं, अब बेहतर है। अपराध इसलिए कम नहीं हो रहे कि युवा शिक्षा की ओर नहीं, बल्कि रोड रोमियो बन रहे हैं।
स्थानीय परिवाद समिति की अध्यक्ष व संस्कृत प्रवक्ता डॉ. ज्योति वर्मा का कहना है कि बेटियों को बहुत कुछ दे सकते हैं। बेटों को भी नैतिकता का पाठ पढ़ाना चाहते हैं। बेटियों को सरकार हमें अभियान सुरक्षा दे रही है।
हम सुरक्षा का लाभ नहीं ले पा रहे है। इसलिए नहीं ले पा रहे हैं कि हम बेटे और बेटियों में भेद कर रहे हैं। संस्कार और नैतिकता नहीं ला सकते तो सरकार को दोष भी नहीं दे सकते।
सरकार पूरा काम कर रही है। आज महिलाएं रात का सफर कर सकतीं थीं। जब से भाजपा सरकार बनी हैं स्वच्छंद तरीके से आती जाती हूं।
इतनी सुरक्षा पहले कमी नहीं देखी
छात्रा जाग्रति वर्मा ने आज कोई चौराहा नहीं जहां पांच से दस पुलिस कर्मी नहीं है। इटावा में इतनी सुरक्षा पहले कभी नहीं देखी। जितनी अब है। किसान संघ की प्रदेश संयोजिका सुशीला राजावत ने कहा कि किसानों का मुद्दा असर पड़ेगा।
महिलाएं आज वाकई सुरक्षित हैं। थाने जाने पर जल्दी सुनवाई होती है। चित्रा परिहार ने कहा कि मुद्दे केवल इटावा नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश, देश में हैं। महिलाओं को अधिकार तो मिल रहे हैं, लेकिन कानूनन नहीं। मानसिकताओं से अधिकार नहीं मिल रहे हैं।
महिलाएं आचार विचार से सुरक्षित होंगी। एक महिला सौ के बराबर होती है। पूर्व बीडीओ सुप्रिया मिश्रा ने कहा कि आज पहले की अपेक्षा काफी सुरक्षित हैं। आज महिलाएं खुद निर्भर हैं। गृहणी अंजली कश्यप ने कहा कि इटावा बेहतर है।