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गदर का गवाह बिलैया मठ बदहाली के बहा रहा आंसू

Wed, 26 Jan 2022 12:03 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 26 Jan 2022 12:03 AM IST
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Witness of Mutiny Bilaiya Math is shedding tears of plight
जसवंतनगर। 1857 के गदर का गवाह रहा जसवंतनगर का बिलैयामठ अपने उद्धार की बाट जोह रहा है। कभी यहां पर क्रांतिकारियों ने अपना खून बहाया था।
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क्रांति के प्रतीक इस स्थान के जीर्णोद्धार के लिए शासन-प्रशासन की तरफ से कोई कदम नहीं उठाया है। सिर्फ कस्बे के लोग चंदा एकत्रित कर समय-समय पर कुछ काम करवाते रहे हैं।
कस्बे के मोहल्ला फक्कड़पुरा के पास स्थित बिलैयामठ को मंगल पांडेय के क्रांतिकारी साथियों ने 1857 में बिलैयामठ को अपना ठिकाना बनाया था। उनकी योजना थी कि ईस्ट इंडिया कंपनी के मुख्यालय कलकत्ता से मेरठ भेजी जा रही सैन्य और रसद सामग्री को यहीं पर लूट लिया जाए, जिससे मेरठ के विद्रोह को कुचलने का अंग्रेजों का कुचक्र यहीं धराशायी हो जाए।
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क्रांतिकारी अपनी योजना में सफल भी हुए थे। क्रांतिकारियों ने न सिर्फ रसद और सैन्य सामग्री यहां लूटी, बल्कि कई अंग्रेज सैनिकों को भी मार गिराया। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को गोली मार दी गई, स्वयं को घिरा देखकर कलक्टर एओ ह्यूम को वापस इटावा भागना पड़ा था।
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प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण घटना को लेकर शासन-प्रशासन कभी संवेदनशील नहीं रहा। कभी इस धरोहर को सहेजने का प्रयास नहीं किया गया। शहीद होने वाले क्रांतिकारियों की स्मृति में न तो कोई स्मारक बनवाया गया और न ही इस घटना की जानकारी देने वाला कोई शिलापट्ट है।
इटावा के जिला सूचना विभाग की ओर से कुछ साल पहले एक पुस्तक प्रकाशित करवाई गई थी, उसमें जरूर इसका जिक्र किया गया था। इसके अलावा इस स्थल को सहेजने की कोशिश नहीं की गई।

शहीदों की याद में जो पुराने अंश थे अब वह भी खत्म हो गए हैं।
ऐतिहासिक मामलों के जानकार और पूर्व पत्रकार अनुराग गुप्ता कहते हैं कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के दौरान यहां पर इतना बड़ा घटनाक्रम हुआ, इसका कई जगह उल्लेख भी है, लेकिन सरकार ने यहां पर एक शिलालेख लगवाना भी जरूरी नहीं समझा, जिससे नई पीढ़ी इस ऐतिहासिक घटना के बारे में जान सके।
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