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इटावा हिंदी सेवा निधि के मंच पर काव्य संध्या

Mon, 23 Dec 2019 06:18 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 23 Dec 2019 06:18 PM IST
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Whether the decision of the court or Khuda ...
हिंदी सेवा निधि के 27वें सारस्वत समारोह में रविवार की रात संपन्न कवि सम्मेलन में देश विदेश में प्रतिष्ठित रचनाकारों ने अपनी काव्य प्रतिभा से श्रोताओं को आनंदित कर आयोजन को यादगार बना दिया। अध्यक्षता पूर्व सांसद प्रोफेसर ओम पाल सिंह निडर ने की। वहीं, कवि शिक्षक डॉ. कुश चतुर्वेदी ने परंपरानुसार संचालन किया।
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इटावा के शिक्षक डॉ. राजीव राज ने मां शारदे की वंदना से सम्मेलन का आगाज करते हुए कवित्व धर्म को रेखांकित किया। ‘‘बूंद हूं समंदर से जंग जारी है। मौत की धमकियों से जिंदगी न हारी है, हौसला कम न हो, यही दुआ करना, एक दीपक से कई आंधियां भी हारी है।।
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चर्चित युवा कवि रोहित चैधरी अपने जोशीले अंदाज में प्रयाग में तीन नदियों के संगम से इटावा के पांच नदियों में संगम स्थल पचनद की महत्ता स्थापित करते नजर आए और वर्तमान परिस्थितियों के झंझावात के समाधान हेतु चिंतित दिखे। घर-घर में रामचरित मानस का संविधान लागू कर दो..आज इसी मंच पर सम्मानित हुए युवा कवि देवेंद्र प्रताप ‘आग’ ने रानी झांसी के शौर्य और बलिदान पर रचित काव्य पाठ से प्रशंसा बटोरी।
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‘‘नेता जी लेपेटे में’’’ जैसे टीवी मंच के स्थायी कवि से लेकर अपनी जोशीली कविताओं से प्रसिद्धि का मुकाम हासिल करने वाले शिक्षक कवि गौरव चौहान मोदी-केजरीवाल के संवाद से लेकर अनेक बिंदुओं पर आकर्षण का केंद्र बिंदु बनने में कामयाब रहे। ये जज्बा जंग लड़ने का कभी चूक नहीं सकता, बदन में जान है तब तक, तिरंगा झुक नहीं सकता।
भारत भर में चर्चित गीतकार कवि विष्णु सक्सेना ने अपना पुराना प्रतिष्ठित गीत ‘‘रेत पर नाम लिखने का क्या फायदा’’ सुनाया। जुगनू ही रोशनी की पहचान हो न जाये, ये रास्ते का पत्थर भगवान हो न जाये, जो कुछ दिया है प्रभु ने अहसान मानता हूँ बस चाहता यही हूँ कि अभिमान हो न जाए, प्रतिष्ठित कवि शायर मासूम गाजियाबादी ने सुनाया ‘‘दिया रोशन किसी दरवेश के हाथों हुआ होगा। नहीं तो बेसबब ये आधियां क्यूं खामोश हो जाएं।
‘‘लुहार की लली’’ जैसे गीतों से काव्यमंचों पर आधा शतक गुजार चुके प्रथम श्रेणी के अधिकारी रहे कवियों के अग्रज राम्रेंद्र मोहन त्रिपाठी पर वक्त की पाबंदियों का असर भला पड़ता कहां है।
अपनी ओजस्वी राष्ट्रवादी कविताओं की हुंकार के लिये देश भर में हाथों हाथ लिये जाने वाले प्रो. ओमपाल सिंह निडर ने अपनी कविता पढ़ते हुए कहा ‘‘चंद सुविधाओं के लिये जो बेच दें कलम, ऐसे संपादकों की कमी नहीं है देश में।।
’’ इस अवसर पर इटावा हिंदी सेवा निधि की ओर से 21 हजार की राशि सोमा घोष के उस ट्रस्ट को प्रदान करने की घोषणा की गई जो साधनहीन संगीतकारों की सहायता करती है।

काव्य संध्या में प्रख्यात न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल, न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी, बापू की सुपौत्री तारा गांधी भट्टाचार्या, प्रख्यात संगीतज्ञ सोमा घोष, कथा शिल्पी चित्रा मुदगल, जया वर्मा (इंग्लैण्ड) न्यायमूर्ति अशोक कुमार गुप्ता, जिला जज सी.जे.एम. अनेक प्रशासन पुलिस अधिकारी नगर के अतिविशिष्ट साहित्यकार वकील काव्य प्रेमी समारोह के विसर्जन तक उपस्थित रहे।
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