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बैंडबाजों संग गुरु ग्रंथ साहिब यात्रा का स्वागत
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
Updated Sat, 02 May 2015 11:15 PM IST
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श्रीगुरु तेग बहादुर साहिब गुरुद्वारा में शनिवार को हस्तलिखित गुरु ग्रंथ साहिब यात्रा का भव्य स्वागत किया गया। स्वागत का सिलसिला कुलदीप मोटर्स से शुरू हुआ।
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उसके बाद कई जगह पर सिख समुदाय के लोगों ने इसका फूल-मालाओं के साथ स्वागत किया। गुरुद्वारा में इस पावन गुरु ग्रंथ साहिब के दर्शन कराए गए। इस दौरान लंगर का भी आयोजन किया गया।
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इटावा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरजीत सिंह इस यात्रा के साथ आए। हस्तलिखित गुरु ग्रंथ साहिब जी का स्वरूप एवं पंच प्यारों को एक सुसज्जित गाड़ी में रखा गया था। इस यात्रा में कई बसें व कारें शामिल रहीं। औरैया व नगर इटावा में बैंडबाजों से यात्रा का स्वागत किया गया।
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पंजाबी कालोनी में चिंटू छाबड़ा, कमल छाबड़ा, मनदीप कालरा, जसपाल सिंह पोपली, जसपाल सिह टुटेजा, जितेंदर सिंह किंद्रा एवं पप्पू पोपली, तरनपाल सिंह कालड़ा ने स्वागत किया।
इसके अलावा सतनाम सिंह अरोरा, अजीत सिंह पोपली, बॉबी पोपली, ऋषि अरोरा, महेंद्र कौर अरोरा, सतेंद्र कौर पोपली, लबली अरोरा, मनदीप सिंह अरोरा, उत्कर्ष, मनजोत सिंह अरोरा, पवन शर्मा, सुरजीत सिंह, राजा पोपली ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया।
गुरुद्वारा में गुरुमुख सिंह अरोड़ा, संत गुरनाम सिंह, हरविंदर, जोगेंदर सिंह कानपुर, हरेंदर पाल सिंह को सरोपा देकर सम्मानित किया गया। गुरुद्वारा में ही गतका का प्रदर्शन हुआ। इस बीच जो बोले सो निहाल... के उद्घोष लगते रहे।
कमेटी अध्यक्ष हरजीत सिंह ने बताया कि हस्तलिखित गुरु ग्रंथ साहिब की रचना विशेष आकार में की गई है। इस धर्म ग्रंथ का प्रकाश (प्राण प्रतिष्ठा) श्री हरमंदिर साहिब स्वर्ण मंदिर अमृतसर में किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस हस्तलिखित गुरु ग्रंथ साहिब की अलौकिक यात्रा तख्त श्री दमदमा साहिब, साहिबों की तलबंडी के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी गुरुमुख सिंह के नेतृत्व में कानपुर से शुरू हुई है। यह यात्रा प्रमुख रूप से संत गुरनाम सिंह सिंह महेंदापुर व हरेंदर पाल सिंह के अगुवाई में चली है।
इसकी रचना अकाल तख्त के अनुरूप कानपुर के हरिनदर पाल सिंह ने की है। जबकि पंच प्यारों ने हस्तलिखित श्री गुरु ग्रंथ साहिब की शुद्धि की है। उन्होंने यातायात व्यवस्था का सुचारू बनाए रखने के लिए डीएम व एसएसपी का आभार जताया।
इस दौरान मनदीप सिंह कालड़ा, जसवीर सिंह पप्पी, चरनजीत सिंह काके, राजासाहनी, कुलबंत सिंह बग्गा, दलजीत सिंह पनेसर, दीपू सिंह, गुरुबचन सिंह मोगा, लवी कालड़ा, त्रिलोचन सिंह, राजा छाबड़ा, राजू गुलाटी, रंजीत सिंह बग्गा, रिषी लूथरा आदि सहयोग रहा।