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पानी का संकट पहुंचा रहा मौत के घाट

Sun, 15 May 2022 11:30 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 15 May 2022 11:30 PM IST
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Water crisis is causing death
चंबल नदी किनारे मिटहटी गांव का सूखा पड़ा तालाब। संवाद - फोटो : ETAWAH
चकरनगर/उदी(इटावा)। 15 दिनों में मगरमच्छ का निवाला बनी दो बच्चियों के परिवारों के साथ चंबल के आसपास बसे गांवों के लोग भयभीत हैं। उनका कहना है कि न चाहते हुए भी उन्हें चंबल की ओर जाना पड़ता है। गांवों के सूखे तालाब और नहरें उन्हें मौत की ओर खींच ले जाती हैं।
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चंबल नदी आसपास बसे करीब 200 गांवों तक ज्यादातर सरकारी योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित रहता है। मनरेगा से खोदे गए तालाब इसका सबसे बड़ा प्रमाण हैं। कई गांवों में एक भी तालाब नहीं है। जिन गांवों में तालाब हैं, उनमें नालियां का गंदा पानी भरा है या सूखे पड़े हैं। इससे ग्रामीण मवेशियों को पानी निलाने चंबल नदी पर ले जाते हैं। नदी में मौजूद मगरमच्छ और घड़ियाल मवेशियों व लोगों को शिकार बना लेते हैं। हाल में ऐसे दो-तीन हादसे हो चुके हैं।
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चकरनगर क्षेत्र का सहसों गांव चंबल नदी के किनारे बसा है। तीन हजार आबादी के इस गांव का पानी खारा हैं। ग्रामीण पीने में नदी के पानी का उपयोग करते हैं। गांव में एक छोटा सा तालाब है, जो बारिश में भर जाता है। इस समय तालाब सूखा पड़ा है। ग्रामीण नहाने और मवेशियों को पानी पिलाने चंबल ले जाने के लिए मजबूर हैं। एक हजार आबादी वाले गांव नदा में एक भी तालाब नहीं है। दो हजार की आबादी वाले मिटहैटी गांव का एकमात्र छोटा तालाब सूखा पड़ा है। गांव का पानी भी खारा है। दोनों गांवों के ज्यादातर हैंडपंप भी खारा पानी देते हैं। इस गांव के लोग भी पीने, नहाने और मवेशियों को पानी पिलाने के लिए चंबल के सहारे हैं।
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कुंदौल के तालाब में मगरमच्छ का डेरा
ग्रामीणों के अनुसार, कुंदौल गांव में बीचोबीच एक तालाब बना है। पर यहां करीब दो साल से एक मगरमच्छ का डेरा डला हुआ है। कई बार शिकायतों के बावजूद मगरमच्छ को बाहर नहीं निकाला जा सका है। ऐसे में लोग डर की वजह से तालाब के पानी का उपयोग नहीं करते हैं।

इनसेट
इन गांवों में भी पानी का संकट
कोला, सिरसा, विंडवाकला, बरेछा, जगतोली, ददरा, वरचौली, ढकरा, कुंदोल, पाली, छिवरौली, पथर्रा, ख्यालीपुरा, हरपुरा, पहलन, राऊनी, वंशरी, कतरौली, कधावली, बिठोली, अनेठा आदि गांव में भी जल संकट होने की वजह से यहां के ग्रामीण आए दिन चंबल नदी के पानी का प्रयोग करते हैं।
वर्जन
गांवों की स्थितियां दिखवाई जा रही हैं। यदि वहां इस तरह का संकट है तो जल्द तालाबों की व्यवस्थाएं इन गांवों में कराई जाएगी।
संतोष राय, सीडीओ
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