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Etawah News: जाग जा मेरे लाल...देख ताई तुझे खिला रही है
Thu, 18 May 2023 12:09 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Thu, 18 May 2023 12:09 AM IST
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मन्नतों से मिला था छोटू...छह माह में मम्मी-पापा के साथ छोड़ गया दुनिया
माता-पिता और मासूम बेटे का शव देख परिजन बेहाल, बेटी के शव को सीधे ले गए श्मशान
फोटो 20:::अनिल। फाइल फोटो
फोटो 21:::यशोदा। फाइल फोटो
फोटो 22:::पल्लवी। फाइल फोटो
फोटो 23::::छोटू उर्फ लव। फाइल फोटो
फोटो 24:::अनिल और यशोदा के शव घर से उठते ही बिलखने लगे परिजन। संवाद
फोटो 25::: घटना से बिलखती अनिल की मौसी राजकुमारी। संवाद
फोटो 26:::शव जाने के बाद बिलखती अनिल की बेटी पायल। संवाद
फोटो 27:::बंगाली कॉलोनी से जाती अनिल और यशोदा की अर्थी। संवाद
फॉलोअप
- फतेहपुर के जहानाबाद में हुए हादसे में दंपती और उनके दो बच्चों की गई जान
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। मम्मी-पापा के लाड़ले छोटू उर्फ लव का शव उनके ही साथ बुधवार सुबह पहुंचा तो कोहराम मच गया। रोते-बिलखते परिजन बस यही कह रहे थे कि सबको हंसते खेलते लाने का वादा करके अनिल क्यों बच्चों को अपने साथ लेकर चला गया।
फतेहपुर के जहानाबाद में हुए हादसे में शहर के बंगाली कॉलोनी निवासी अनिल, उसकी पत्नी यशोदा, बेटी पल्लवी और सबसे छोटा लाड़ला बेटा छोटू उर्फ लव की हादसे में मौत हो गई थी। रात में हादसे की जानकारी के बाद परिवार के बेहाल थे। रातभर पूरा घर चीत्कारों से गूंजता रहा। करीब छह बजे शव पहुंचे तो सिसकियां चीखों में बदल गई। चिल्ला-चिल्ला कर परिजन रोने लगे। भाभी श्रीकांता रोते-रोते बस यही कह रही थी कि ससुराल जाते वक्त तो वादा किया था फिर हंसते खेलते जल्दी वापस आएंगे। छोटू के शव से लिपटकर फफकने लोगी। बोली- जाग जा मेरे लाल...देख ताई तुझे खिला रही है...हर बार तो चाची की गोद में आकर खिलखिला उठता था, आज क्या हुआ, उठ जा मेरे लाल।
वहीं, अनिल का भाई राजू कह रहा था, किसी ने भी ऐसे कंधों पर तुझे लाने की नहीं सोची थी...उठ जा मेरे भाई। अन्य भाई सुरेश, राजेश सतीश भी रो-रोकर यही कह रहे थे कि हम सब बड़े थे तुझे इतनी जल्दी जाने की क्या थी। प्रभु हम में से किसी को उठा लेता। करीब छह घंटे तक तीनों के शव घर पर ही रखे रहे। इसके बाद श्मशान घाट ले जाए गए। यहां लगभग एक बजे तीनों का अंतिम संस्कार किया गया। बेटी पल्लवी का शव देर से आने की वजह से उसे सीधे ले जाया गया। यहां शाम करीब चार बजे उसका भी अंतिम संस्कार किया।
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चार बेटियों के बाद छोटू ने भरी थी गोद
अनिल और यशोदा के चार बेटियां थीं। सबसे बड़ी पायल (10), प्रियांशी (8), सौम्या (7), पल्लवी (3) बेटियां थीं। ऐसे में दोनों को एक बेटे की चाहत थी। इसके लिए उन्होंने कई मंदिरों और दरगाहों में मन्नतें भी मांगीं। लगभग दो साल पहले अनिल अपनी पत्नी के साथ ससुराल मूसानगर के शिव मंदिर में दर्शन करने गया था। यहां पर भी दोनों ने बेटा होने की मन्नत मांगी थी। इसके बाद ही यशोदा गर्भवती हो गई थी। ऐसे में छोटू के छह माह होने के बाद करीब डेढ़ माह पहले दोनों ने इसी मंदिर में मुंडन कराकर मन्नत पूरी करने के लिए का धन्यवाद दिया था। सास-ससुर के दबाव बनाने पर अनिल परिवार के साथ वहीं रुक गया था।
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माता-पिता और मासूम बेटे का शव देख परिजन बेहाल, बेटी के शव को सीधे ले गए श्मशान
फोटो 20:::अनिल। फाइल फोटो
फोटो 21:::यशोदा। फाइल फोटो
फोटो 22:::पल्लवी। फाइल फोटो
फोटो 23::::छोटू उर्फ लव। फाइल फोटो
फोटो 24:::अनिल और यशोदा के शव घर से उठते ही बिलखने लगे परिजन। संवाद
फोटो 25::: घटना से बिलखती अनिल की मौसी राजकुमारी। संवाद
फोटो 26:::शव जाने के बाद बिलखती अनिल की बेटी पायल। संवाद
फोटो 27:::बंगाली कॉलोनी से जाती अनिल और यशोदा की अर्थी। संवाद
फॉलोअप
- फतेहपुर के जहानाबाद में हुए हादसे में दंपती और उनके दो बच्चों की गई जान
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। मम्मी-पापा के लाड़ले छोटू उर्फ लव का शव उनके ही साथ बुधवार सुबह पहुंचा तो कोहराम मच गया। रोते-बिलखते परिजन बस यही कह रहे थे कि सबको हंसते खेलते लाने का वादा करके अनिल क्यों बच्चों को अपने साथ लेकर चला गया।
फतेहपुर के जहानाबाद में हुए हादसे में शहर के बंगाली कॉलोनी निवासी अनिल, उसकी पत्नी यशोदा, बेटी पल्लवी और सबसे छोटा लाड़ला बेटा छोटू उर्फ लव की हादसे में मौत हो गई थी। रात में हादसे की जानकारी के बाद परिवार के बेहाल थे। रातभर पूरा घर चीत्कारों से गूंजता रहा। करीब छह बजे शव पहुंचे तो सिसकियां चीखों में बदल गई। चिल्ला-चिल्ला कर परिजन रोने लगे। भाभी श्रीकांता रोते-रोते बस यही कह रही थी कि ससुराल जाते वक्त तो वादा किया था फिर हंसते खेलते जल्दी वापस आएंगे। छोटू के शव से लिपटकर फफकने लोगी। बोली- जाग जा मेरे लाल...देख ताई तुझे खिला रही है...हर बार तो चाची की गोद में आकर खिलखिला उठता था, आज क्या हुआ, उठ जा मेरे लाल।
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वहीं, अनिल का भाई राजू कह रहा था, किसी ने भी ऐसे कंधों पर तुझे लाने की नहीं सोची थी...उठ जा मेरे भाई। अन्य भाई सुरेश, राजेश सतीश भी रो-रोकर यही कह रहे थे कि हम सब बड़े थे तुझे इतनी जल्दी जाने की क्या थी। प्रभु हम में से किसी को उठा लेता। करीब छह घंटे तक तीनों के शव घर पर ही रखे रहे। इसके बाद श्मशान घाट ले जाए गए। यहां लगभग एक बजे तीनों का अंतिम संस्कार किया गया। बेटी पल्लवी का शव देर से आने की वजह से उसे सीधे ले जाया गया। यहां शाम करीब चार बजे उसका भी अंतिम संस्कार किया।
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चार बेटियों के बाद छोटू ने भरी थी गोद
अनिल और यशोदा के चार बेटियां थीं। सबसे बड़ी पायल (10), प्रियांशी (8), सौम्या (7), पल्लवी (3) बेटियां थीं। ऐसे में दोनों को एक बेटे की चाहत थी। इसके लिए उन्होंने कई मंदिरों और दरगाहों में मन्नतें भी मांगीं। लगभग दो साल पहले अनिल अपनी पत्नी के साथ ससुराल मूसानगर के शिव मंदिर में दर्शन करने गया था। यहां पर भी दोनों ने बेटा होने की मन्नत मांगी थी। इसके बाद ही यशोदा गर्भवती हो गई थी। ऐसे में छोटू के छह माह होने के बाद करीब डेढ़ माह पहले दोनों ने इसी मंदिर में मुंडन कराकर मन्नत पूरी करने के लिए का धन्यवाद दिया था। सास-ससुर के दबाव बनाने पर अनिल परिवार के साथ वहीं रुक गया था।