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विटामिन सी से निमोनिया से बचाव संभव
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इटावा। विटामिन सी का सेवन संतुलित मात्रा में करने से खांसी, जुकाम, वायरल संक्रमण, निमोनिया जैसी समस्याएं दूर हो सकती हैं। निमोनिया का मुख्य कारण न्यूमोकोकस जीवाणु होता है।
इससे बचने के लिए न्यूमोकोकल वैक्सीन लगवानी चाहिए। ये बात शनिवार को आयोजित होने वाले विश्व निमोनिया दिवस से पूर्व उप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई रेस्पिरेटरी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. आदेश कुमार ने कही।
उन्हाेंने बताया कि फेफड़ों में सूजन या पानी भरने की स्थिति को निमोनिया कहते हैं। यह एक आम बीमारी है लेकिन समय पर सही इलाज न मिलने पर गंभीर रूप भी ले सकती है। बच्चों और वृद्धों को इसके प्रति बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है।
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उन्होंने बताया कि 65 वर्ष से ऊपर के व्यक्ति, जटिल हृदय रोग, लिवर व किडनी रोगी, दमा व सांस के मरीज, मधुमेह व एड्स पीड़ितों को वैक्सीन अवश्य लगवानी चाहिए।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीके गुप्ता ने बताया कि बच्चों में निमोनिया के लक्षण तेज बुखार आना, नाक बहना, जुकाम, खांसी, छाती में खरखराहट है। बच्चों को सर्दी से बचाकर रखें। पानी गुनगुना पिलाएं। भाप दिलवाएं।
किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय लखनऊ के रेस्पिरेटरी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष बमनीपुर निवासी डॉ. सूर्यकांत का कहना है कि फेफड़े के संक्रमण की वजह से निमोनिया हो सकता है। देश में 20 फीसदी मौतें निमोनिया की वजह से होती हैं। जबकि कुछ अन्य कारण भी हैं। फंगस व परजीवी रोगाणुओं के कारण भी निमोनिया हो सकता है। टीबी के कारण भी फेफड़े में निमोनिया हो सकता है।
कारण : सांस के रास्ते, खांसने या छींकने से, खून के रास्ते, डायलिसिस वाले मरीज या अस्पताल में लंबे समय से भर्ती मरीज।
लक्षण: तेज बुखार, खांसी व बलगम (कई बार खून के छींटे भी हो सकते हैं), सीने में दर्द, सांस फूलना व कुछ मरीजों में दस्त, मतली और उल्टी, व्यवहार में परिवर्तन जैसे मतिभ्रम, चक्कर, भूख न लगना, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, सर्दी लगकर शरीर ठंडा पड़ जाना, सिरदर्द, चमड़ी का नीला पड़ना आदि हैं।
जांच : खून व बलगम की जांच, छाती का एक्स-रे, निमोनिया की पहचान करने के लिए महत्वपूर्ण जांचें हैं। कोविड निमोनिया की जांच के लिए आरटीपीसीआर की जांच के अतिरिक्त फेफड़े का सीटी स्कैन भी कराना पड़ता है।
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इससे बचने के लिए न्यूमोकोकल वैक्सीन लगवानी चाहिए। ये बात शनिवार को आयोजित होने वाले विश्व निमोनिया दिवस से पूर्व उप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई रेस्पिरेटरी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. आदेश कुमार ने कही।
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उन्हाेंने बताया कि फेफड़ों में सूजन या पानी भरने की स्थिति को निमोनिया कहते हैं। यह एक आम बीमारी है लेकिन समय पर सही इलाज न मिलने पर गंभीर रूप भी ले सकती है। बच्चों और वृद्धों को इसके प्रति बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है।
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उन्होंने बताया कि 65 वर्ष से ऊपर के व्यक्ति, जटिल हृदय रोग, लिवर व किडनी रोगी, दमा व सांस के मरीज, मधुमेह व एड्स पीड़ितों को वैक्सीन अवश्य लगवानी चाहिए।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीके गुप्ता ने बताया कि बच्चों में निमोनिया के लक्षण तेज बुखार आना, नाक बहना, जुकाम, खांसी, छाती में खरखराहट है। बच्चों को सर्दी से बचाकर रखें। पानी गुनगुना पिलाएं। भाप दिलवाएं।
किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय लखनऊ के रेस्पिरेटरी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष बमनीपुर निवासी डॉ. सूर्यकांत का कहना है कि फेफड़े के संक्रमण की वजह से निमोनिया हो सकता है। देश में 20 फीसदी मौतें निमोनिया की वजह से होती हैं। जबकि कुछ अन्य कारण भी हैं। फंगस व परजीवी रोगाणुओं के कारण भी निमोनिया हो सकता है। टीबी के कारण भी फेफड़े में निमोनिया हो सकता है।
कारण : सांस के रास्ते, खांसने या छींकने से, खून के रास्ते, डायलिसिस वाले मरीज या अस्पताल में लंबे समय से भर्ती मरीज।
लक्षण: तेज बुखार, खांसी व बलगम (कई बार खून के छींटे भी हो सकते हैं), सीने में दर्द, सांस फूलना व कुछ मरीजों में दस्त, मतली और उल्टी, व्यवहार में परिवर्तन जैसे मतिभ्रम, चक्कर, भूख न लगना, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, सर्दी लगकर शरीर ठंडा पड़ जाना, सिरदर्द, चमड़ी का नीला पड़ना आदि हैं।
जांच : खून व बलगम की जांच, छाती का एक्स-रे, निमोनिया की पहचान करने के लिए महत्वपूर्ण जांचें हैं। कोविड निमोनिया की जांच के लिए आरटीपीसीआर की जांच के अतिरिक्त फेफड़े का सीटी स्कैन भी कराना पड़ता है।