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पालने में झूले तीर्थंकर, बजीं बधाइयां

Sat, 27 Nov 2021 12:09 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 27 Nov 2021 12:09 AM IST
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Tirthankar swinging in the cradle, congratulations
इटावा। अयोध्या नगरी में तीर्थकर बालक का जन्म होते ही पूरी अयोध्या नगरी खुशी से झूम उठी। चारों और बधाइयां और नृत्य के साथ जमकर एक दूसरे को बधाईयां दी। पूरे नगर में इंद्रों ने रत्नों की वर्षों की, वहीं हाथी-घोड़ों पर बैठकर अन्य राज्यों के इंद्र भी अयोध्या नगरी पहुंचे।
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यह पूरा दृश्य रामलीला रोड स्थित हिंदू हॉस्टल में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव में दर्शाया गया। पंचकल्याणक महोत्सव पंडाल में सुबह साढ़े छह बजे जिनाभिषेक, नित्यार्चना प्रारंभ हुई।
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गणाचार्य विराग सागर महाराज एवं आचार्य प्रमुख सागर महाराज अपने संघ सहित पंचकल्याण के मंच पर विराजमान हुए। जिनका पाद प्रछालन सुबोध प्रकाश जैन, विशाल जैन परिवार ने किया।
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मेडिटेशन मुनि विहसंत सागर महाराज की देखरेख में माता मरू देवी रचना जैन द्वारा तीर्थंकर बालक को जन्म दिया। जन्म की खुशियां बाहर आते ही पूरी अयोध्या नगरी में बधाइयां गूंज उठी। चारों और तीर्थंकर बालक के जन्म होने की खुशियां मनाई गई।
कुबेर इंद्र अनूप जैन, सविता जैन परिवार द्वारा रत्नों की वर्षा की गई, तो सौधर्म इंद्र तरुण जैन अपने अन्य इंद्रों सानत कुमार, इंद्र नरेश जैन, ईशान इंद्र विशाल जैन, महेंद्र इंद्र टिंकू जैन, ब्रह्म इंद्र सुशील जैन, ब्रइमोत्तर इंद्र रवीन्द्र जैन, लांतव इंद्र राहुल जैन, कापिष्ठ इंद्र अनूप जैन, शुक्र इंद्र महेन्द्र जैन हाथी और रथों पर सवार होकर अयोध्या नगरी में प्रवेश किया।
तीर्थकर बालक को ऐरावत हाथी पर बैठाकर पांडुक वन की ओर प्रस्थान किया। सायं सात बजे धर्मचंद्र जैन, राहुल जैन परिवार को महाआरती का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
पूर्व सांसद रघुराज सिंह शाक्य ने महोत्सव में पहुंचकर आरती उतारी। रात आठ बजे से तीर्थंकर बालक को पालने में झुलाया गया। बाल क्रीड़ा का मनोहारी दृश्य का मंचन मंच कलाकार उमेश जैन द्वारा किया गया। महिला एवं बालिका मंडल बरहीपुरा द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

बालक का हुआ 1008 कलशों से अभिषेक
तीर्थंकर बालक का जन्म होते ही सौधर्म इंद्र सहित अन्य इंद्रों द्वारा पांडुक शिला पर तीर्थंकर बालक का 1008 कलशों से अभिषेक हुआ। जिसके बाद अयोध्या नगरी की जनता (श्रद्धालुओं) द्वारा बारी-बारी से स्वर्ण कलशों से तीर्थंकर बालक का अभिषेक किया गया।
हर्ष उल्लास के साथ एक दूसरे को बधाईयां दी गईं।
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