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पंचनद बांध से बुझेगी प्यास, होगा बीहड़का विकास
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इटावा। पंचनद पर बनाने बनाने से न केवल कई जिलों के लोगों की प्यास बुझेगी बल्कि बीहड़ क्षेत्र का विकास भी तेजी से होगा। पंचनद बांध विकास के नए आयाम स्थापित करेगा। यह बात गुरुवार को राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ श्यामपाल सिंह ने कही।
महाविद्यालय में हुई संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्राचार्य ने कहा कि पंचनद विश्व के अद्भुत भौगोलिक अवस्थिति में स्थापित है। उन्होंने जिले के राजनीतिक झुकाव, संचार, पर्यटन, फिल्म से संबद्धता आदि के विषयों पर चर्चा की।
सांस्कृतिक संबंधों की न्यास भूमि, इटावा मूल्यांकन के विविध आयाम पर कर्मक्षेत्र महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि लोकल को पहचानने के लिए जो मशाल जली है उससे लंबे समय तक प्रकाश मिलतारहेगा। उन्होंने कहा कि शोधपत्रों को भविष्य के लिए संरक्षित करें। गोष्ठी में पारित किए गए प्रस्ताव शासन को भेजें।
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दूसरे दिन के तृतीय सत्र की अध्यक्षता करते हुए चौधरी चरण सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हेवरा के प्राचार्य डॉॅ शैलेंद्र शर्मा ने कहा कि इटावा के इतिहास पर काम करने की आवश्यकता है। यहां यज्ञ की वेदिका के लिए ईंट बनाई जाती थीं। यह जिले के समृद्ध और अग्रगामी सोच का द्योतक भी है। उन्होंने कहा कि सिंधु घाटी की सभ्यता में जो ईंटें प्रयुक्त होती थीं, वह कच्ची होती थीं किंतु ईंट का आंवा होने के कारण ही इसे इटावा कहा गया।
तृतीय तकनीकी सत्र में अपना शोध पत्र प्रस्तुत करते हुए संगीता ने बताया कि इटावा महाभारत युद्ध में कौरवों के साथ मिलकर लड़ा था। संगीता ने पंचनद की पवित्र भूमि के बारे में बताया। सामाजिक कार्यकर्ता शाह आलम ने चंबल के बीहड़ क्षेत्र की विशिष्टताओं को सामने रखा और स्वाधीनता सेनानी गेंदालाल दीक्षित के बारे में बताया।
संगोष्ठी में चिकित्सा विश्वविद्यालय सैफई में जूनियर रेजिडेंट डॉ विनीत कुमार ने मधुमेह की बढ़ती चुनौतियों पर बात की। उन्होंने कहा कि इटावा जैसे क्षेत्रों में मधुमेह और हाइपर टेंशन जैसी व्याधियां बढ़ रही हैं। कोरोना की दूसरी लहर में चिकित्सा के क्षेत्र की चुनौतियों पर भी विस्तार से बात की। अपना शोधपत्र प्रस्तुत करते हुए डॉ अनुपम ने जिले में शिक्षा, बालिका मृत्यु दर, अपराध और दहेज प्रथा पर आंकड़े रखकर रखकर स्पष्ट किया कि कई मामलों में जनपद अनूठा है।
प्रख्यात कवि और आलोचक डॉ. राजीव राज ने महाकवि गोपाल दास नीरज की जन्मभूमि इटावा पर अपना आलेख पढ़ा। संचालन गृह विज्ञान की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. डौली रानी ने किया। सचिव डॉ. रमाकांत राय ने बताया कि डॉ. हिमांशु कुमार, डॉ. रेखा, डॉ. अनुपम, डॉ. सुभाष चंद्र और डॉ. अजय कुमार, संस्कृत विभाग की प्रो बिंदु सिंह, मास्टर विनोद गौतम, डॉ. कमल आदि की गरिमामयी उपस्थिति रही। डॉ. चंद्रप्रभा, डॉ. अजय दुबे, प्रो दुर्गेश लता, डॉ. रेखा, डॉ. अमित कुमार, डॉ. अनुपम सिंह, डॉ. सपना वर्मा, डॉ. श्याम देव यादव, डॉ. श्वेता की सहभागिता रही।
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महाविद्यालय में हुई संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्राचार्य ने कहा कि पंचनद विश्व के अद्भुत भौगोलिक अवस्थिति में स्थापित है। उन्होंने जिले के राजनीतिक झुकाव, संचार, पर्यटन, फिल्म से संबद्धता आदि के विषयों पर चर्चा की।
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सांस्कृतिक संबंधों की न्यास भूमि, इटावा मूल्यांकन के विविध आयाम पर कर्मक्षेत्र महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि लोकल को पहचानने के लिए जो मशाल जली है उससे लंबे समय तक प्रकाश मिलतारहेगा। उन्होंने कहा कि शोधपत्रों को भविष्य के लिए संरक्षित करें। गोष्ठी में पारित किए गए प्रस्ताव शासन को भेजें।
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दूसरे दिन के तृतीय सत्र की अध्यक्षता करते हुए चौधरी चरण सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हेवरा के प्राचार्य डॉॅ शैलेंद्र शर्मा ने कहा कि इटावा के इतिहास पर काम करने की आवश्यकता है। यहां यज्ञ की वेदिका के लिए ईंट बनाई जाती थीं। यह जिले के समृद्ध और अग्रगामी सोच का द्योतक भी है। उन्होंने कहा कि सिंधु घाटी की सभ्यता में जो ईंटें प्रयुक्त होती थीं, वह कच्ची होती थीं किंतु ईंट का आंवा होने के कारण ही इसे इटावा कहा गया।
तृतीय तकनीकी सत्र में अपना शोध पत्र प्रस्तुत करते हुए संगीता ने बताया कि इटावा महाभारत युद्ध में कौरवों के साथ मिलकर लड़ा था। संगीता ने पंचनद की पवित्र भूमि के बारे में बताया। सामाजिक कार्यकर्ता शाह आलम ने चंबल के बीहड़ क्षेत्र की विशिष्टताओं को सामने रखा और स्वाधीनता सेनानी गेंदालाल दीक्षित के बारे में बताया।
संगोष्ठी में चिकित्सा विश्वविद्यालय सैफई में जूनियर रेजिडेंट डॉ विनीत कुमार ने मधुमेह की बढ़ती चुनौतियों पर बात की। उन्होंने कहा कि इटावा जैसे क्षेत्रों में मधुमेह और हाइपर टेंशन जैसी व्याधियां बढ़ रही हैं। कोरोना की दूसरी लहर में चिकित्सा के क्षेत्र की चुनौतियों पर भी विस्तार से बात की। अपना शोधपत्र प्रस्तुत करते हुए डॉ अनुपम ने जिले में शिक्षा, बालिका मृत्यु दर, अपराध और दहेज प्रथा पर आंकड़े रखकर रखकर स्पष्ट किया कि कई मामलों में जनपद अनूठा है।
प्रख्यात कवि और आलोचक डॉ. राजीव राज ने महाकवि गोपाल दास नीरज की जन्मभूमि इटावा पर अपना आलेख पढ़ा। संचालन गृह विज्ञान की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. डौली रानी ने किया। सचिव डॉ. रमाकांत राय ने बताया कि डॉ. हिमांशु कुमार, डॉ. रेखा, डॉ. अनुपम, डॉ. सुभाष चंद्र और डॉ. अजय कुमार, संस्कृत विभाग की प्रो बिंदु सिंह, मास्टर विनोद गौतम, डॉ. कमल आदि की गरिमामयी उपस्थिति रही। डॉ. चंद्रप्रभा, डॉ. अजय दुबे, प्रो दुर्गेश लता, डॉ. रेखा, डॉ. अमित कुमार, डॉ. अनुपम सिंह, डॉ. सपना वर्मा, डॉ. श्याम देव यादव, डॉ. श्वेता की सहभागिता रही।