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संसार में ईश्वर जैसा दयालु कोई नहीं: संत रमेश भाई
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महेवा। ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम आनेपुर में श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाई गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
कथावाचक संत रमेश भाई शुक्ल ने कहा कि संसार में ईश्वर जैसा दयालु कोई नहीं है। हमें सदैव आभारी रहते हुए प्रभु का स्मरण करना चाहिए।
यह कथा ग्राम आनेपुर स्थित झाड़ी वाले मंदिर परिसर में हो रही थी। आखिरी दिन कथा व्यास ने कृष्ण के जीवन से जुड़े कई प्रसंग सुनाए।
सुदामा प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि गरीबी का नाम सुदामा नहीं है, प्रभु के प्रति अपार श्रद्धा भक्ति और प्रेम का नाम सुदामा है। संसार में जितने भी पाप हो रहे हैं, उसके पीछे सिर्फ लोभ है।
लोभ को जिसने त्यागा वो कभी दुखी नहीं रह सकता है। उन्होंने कहा कि भगवान की कथाओं से हमें सीख मिलती है कि कितनी भी मुसीबत आ जाए जीवन से निराश नहीं होना चाहिए।
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परीक्षित मोक्ष की कथा ने सभी को भाव विभोर कर दिया। कथा विराम में उन्होंने भक्तों को भागवत को अपने जीवन में उतारने की बात कही जिससे सभी लोग धर्म की ओर अग्रसर हों।
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कथावाचक संत रमेश भाई शुक्ल ने कहा कि संसार में ईश्वर जैसा दयालु कोई नहीं है। हमें सदैव आभारी रहते हुए प्रभु का स्मरण करना चाहिए।
यह कथा ग्राम आनेपुर स्थित झाड़ी वाले मंदिर परिसर में हो रही थी। आखिरी दिन कथा व्यास ने कृष्ण के जीवन से जुड़े कई प्रसंग सुनाए।
सुदामा प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि गरीबी का नाम सुदामा नहीं है, प्रभु के प्रति अपार श्रद्धा भक्ति और प्रेम का नाम सुदामा है। संसार में जितने भी पाप हो रहे हैं, उसके पीछे सिर्फ लोभ है।
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लोभ को जिसने त्यागा वो कभी दुखी नहीं रह सकता है। उन्होंने कहा कि भगवान की कथाओं से हमें सीख मिलती है कि कितनी भी मुसीबत आ जाए जीवन से निराश नहीं होना चाहिए।
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परीक्षित मोक्ष की कथा ने सभी को भाव विभोर कर दिया। कथा विराम में उन्होंने भक्तों को भागवत को अपने जीवन में उतारने की बात कही जिससे सभी लोग धर्म की ओर अग्रसर हों।