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पार्क की मिट्टी शेरों के लिए मुफीद
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इटावा। इटावा लॉयन सफारी पार्क के लॉयन पार्क की मिट्टी बब्बर शेरों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। पार्क की मिट्टी में न तो किसी तरह का वायरस है और न ही बैक्टीरिया।
पार्क की मिट्टी के सैंपल की जांच रिपोर्ट नेशनल वर्टिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट लखनऊ से सैफई पार्क प्रशासन को मिल गई है। मिट्टी की रिपोर्ट ओके आने के बाद अब सफारी प्रशासन ने लॉयन पार्क खोलने की कवायद तेज कर दी है।
सफारी पार्क की झाड़ियों की कटाई और सफाई का काम शुरू हो गया है। सीजेडीए व वन विभाग के अधिकारियों की हरी झंडी मिलते ही लॉयन पार्क को खोल दिया जाएगा, ताकि पर्यटक शेरों का दीदार कर सकें।
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दरअसल इटावा सफारी पार्क करीब दो साल पहले पर्यटकों लिए खोला गया था, लेकिन सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र लॉयन सफारी अभी तक नहीं खुल सका है। इससे पर्यटकों को निराशा होती है।
अब सफारी पार्क प्रशासन पर्यटकों की निराशा को दूर करने की तैयारी कर रहा है। इसका तानाबाना भी बुन रहा है। लॉयन सफारी पार्क की मिट्टी को अक्तूूबर 2021 में जांच के लिए लखनऊ के नेशनल वर्टिकल रिसर्च सेंटर (राष्ट्रीय मृदा प्रयोगशाला) में भेजा गया था।
इसके पीछे सफारी प्रशासन के मकसद यह जानना था कि मिट्टी में किसी तरह का वॉयरस है या नहीं। ताकि मिट्टी में वायरस होने के चलते शेरों की किसी तरह का नुकसान न हो और पर्यटक आराम से शेरों का दीदार कर सकें।
लॉयन सफारी पार्क के उप निदेशक अरुण सिंह ने बताया कि लॉयन सफारी पार्क की मिट्टी का सैंपल जांच के लिए राष्ट्रीय मृदा प्रयोगशाला लखनऊ भेजा गया था। उसकी जांच रिपोर्ट आ गई है। किसी में किसी तरह का वायरस या बैक्टीरिया नहीं मिला है।
बताया कि पार्क की मिट्टी बब्बर शेरों व शेरों के लिए पूरी तरह से उपयुक्त है। मिट्टी की जांच रिपोर्ट से सीजेडीए व विभाग के अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
अब लॉयन सफारी को विधिवत तरीके से शुरू करने की अनुमति मांगी गई है। इनकी हरी झंडी मिलते ही लॉयन सफारी को पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा।
350 हेक्टेयर जमीन पर बना है पार्क
इटावा सफारी पार्क 350 हेक्टेयर जमीन पर बना है। इसकी खासियत है कि यहां पांच सफारी पार्क बने हैं, जिनमें लॉयन सफारी (शेर), डीयर सफारी (हिरण), बेयर (भालू) सफारी और लेपर्ड (तेंदुआ) शामिल है।
लॉयन सफारी को अभी शुरू नहीं किया गया है। बाकी सफारी चल रहे और देश-विदेश से पर्यटक यहां पशु-पक्षियों का दीदार करने के लिए बड़ी संख्या में आते हैं।
लॉयन सफारी पार्क में हैं 18 शेर
लॉयन सफारी पार्क में इस समय 18 शेर हैं। इनमें शेरनी जेनिफर और गौरी भी हैं, जिन्हें दूसरी लहर के दौरान कोरोना संक्रमण हो गया था। दोनों को दो महीने से अधिक समय तक पार्क में बने पशु अस्पताल में भर्ती रखा गया।
वन विभाग और सफारी प्रशासन ने देश व प्रदेश के नामचीन पशु चिकित्सकों की देखरेख में दोनों शेरनियों का उपचार कराया। अब दोनों स्वस्थ हैं।
प्रजनन केंद्र भी है पार्क में ही
बब्बर शेरों का प्रजनन केंद्र भी है। यहां कई शावकों का जन्म भी हो चुका है। प्रजनन केंद्र बनाने के पीछे शासन की मंशा रही कि सफारी पार्क में शेरों के दूसरे स्थानों से लेकर न आना पड़े।
यहां शावकों का जन्म हो और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने। जरूरत होने पर शेरों को दूसरे प्रांतों व जिले के चिड़ियाघरों में भेजा जा सके।
80 से ज्यादा हैं सफाई में कर्मचारी
लॉयन सफारी पार्क में शेरों और अन्य पशु-पक्षियों की देखभाल के लिए भारी-भरकम स्टाफ है। अधिकारी और कर्मचारियों को मिलाकर 80 से ज्यादा कर्मचारी यहां काम करते हैं।
इनमें बड़ी संख्या आउट सोर्सिंग के कर्मचारी हैं। कोरोना काल के दौरान कर्मचारियों को कई महीनों तक वेतन भी नहीं मिला था। उसके बाद भी कर्मचारियों शेरों व अन्य पशु पक्षियों की सेवा में लगे रहे।
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पार्क की मिट्टी के सैंपल की जांच रिपोर्ट नेशनल वर्टिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट लखनऊ से सैफई पार्क प्रशासन को मिल गई है। मिट्टी की रिपोर्ट ओके आने के बाद अब सफारी प्रशासन ने लॉयन पार्क खोलने की कवायद तेज कर दी है।
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सफारी पार्क की झाड़ियों की कटाई और सफाई का काम शुरू हो गया है। सीजेडीए व वन विभाग के अधिकारियों की हरी झंडी मिलते ही लॉयन पार्क को खोल दिया जाएगा, ताकि पर्यटक शेरों का दीदार कर सकें।
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दरअसल इटावा सफारी पार्क करीब दो साल पहले पर्यटकों लिए खोला गया था, लेकिन सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र लॉयन सफारी अभी तक नहीं खुल सका है। इससे पर्यटकों को निराशा होती है।
अब सफारी पार्क प्रशासन पर्यटकों की निराशा को दूर करने की तैयारी कर रहा है। इसका तानाबाना भी बुन रहा है। लॉयन सफारी पार्क की मिट्टी को अक्तूूबर 2021 में जांच के लिए लखनऊ के नेशनल वर्टिकल रिसर्च सेंटर (राष्ट्रीय मृदा प्रयोगशाला) में भेजा गया था।
इसके पीछे सफारी प्रशासन के मकसद यह जानना था कि मिट्टी में किसी तरह का वॉयरस है या नहीं। ताकि मिट्टी में वायरस होने के चलते शेरों की किसी तरह का नुकसान न हो और पर्यटक आराम से शेरों का दीदार कर सकें।
लॉयन सफारी पार्क के उप निदेशक अरुण सिंह ने बताया कि लॉयन सफारी पार्क की मिट्टी का सैंपल जांच के लिए राष्ट्रीय मृदा प्रयोगशाला लखनऊ भेजा गया था। उसकी जांच रिपोर्ट आ गई है। किसी में किसी तरह का वायरस या बैक्टीरिया नहीं मिला है।
बताया कि पार्क की मिट्टी बब्बर शेरों व शेरों के लिए पूरी तरह से उपयुक्त है। मिट्टी की जांच रिपोर्ट से सीजेडीए व विभाग के अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
अब लॉयन सफारी को विधिवत तरीके से शुरू करने की अनुमति मांगी गई है। इनकी हरी झंडी मिलते ही लॉयन सफारी को पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा।
350 हेक्टेयर जमीन पर बना है पार्क
इटावा सफारी पार्क 350 हेक्टेयर जमीन पर बना है। इसकी खासियत है कि यहां पांच सफारी पार्क बने हैं, जिनमें लॉयन सफारी (शेर), डीयर सफारी (हिरण), बेयर (भालू) सफारी और लेपर्ड (तेंदुआ) शामिल है।
लॉयन सफारी को अभी शुरू नहीं किया गया है। बाकी सफारी चल रहे और देश-विदेश से पर्यटक यहां पशु-पक्षियों का दीदार करने के लिए बड़ी संख्या में आते हैं।
लॉयन सफारी पार्क में हैं 18 शेर
लॉयन सफारी पार्क में इस समय 18 शेर हैं। इनमें शेरनी जेनिफर और गौरी भी हैं, जिन्हें दूसरी लहर के दौरान कोरोना संक्रमण हो गया था। दोनों को दो महीने से अधिक समय तक पार्क में बने पशु अस्पताल में भर्ती रखा गया।
वन विभाग और सफारी प्रशासन ने देश व प्रदेश के नामचीन पशु चिकित्सकों की देखरेख में दोनों शेरनियों का उपचार कराया। अब दोनों स्वस्थ हैं।
प्रजनन केंद्र भी है पार्क में ही
बब्बर शेरों का प्रजनन केंद्र भी है। यहां कई शावकों का जन्म भी हो चुका है। प्रजनन केंद्र बनाने के पीछे शासन की मंशा रही कि सफारी पार्क में शेरों के दूसरे स्थानों से लेकर न आना पड़े।
यहां शावकों का जन्म हो और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने। जरूरत होने पर शेरों को दूसरे प्रांतों व जिले के चिड़ियाघरों में भेजा जा सके।
80 से ज्यादा हैं सफाई में कर्मचारी
लॉयन सफारी पार्क में शेरों और अन्य पशु-पक्षियों की देखभाल के लिए भारी-भरकम स्टाफ है। अधिकारी और कर्मचारियों को मिलाकर 80 से ज्यादा कर्मचारी यहां काम करते हैं।
इनमें बड़ी संख्या आउट सोर्सिंग के कर्मचारी हैं। कोरोना काल के दौरान कर्मचारियों को कई महीनों तक वेतन भी नहीं मिला था। उसके बाद भी कर्मचारियों शेरों व अन्य पशु पक्षियों की सेवा में लगे रहे।