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बारिश थमी, ठंड बढ़ी, कंपकंपाए लोग

Fri, 07 Jan 2022 10:54 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 07 Jan 2022 10:54 PM IST
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The rain stopped, the cold increased, people shivered
इटावा। मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव होने से अनिश्चितता की स्थिति लगातार बनी हुई है। बृहस्पतिवार को हुई रिमझिम बारिश ने लोगों को कंपकंपाने पर मजबूर कर दिया, वहीं, शुक्रवार को हालांकि बारिश तो नहीं हुई, लेकिन बादल दिनभर छाए रहे।
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धूप न निकलने से लोगों को ठंड से राहत नहीं मिली और कंपकंपाते रहे। बारिश के बाद बढ़ी ठंड की वजह से जनजीवन पर असर पड़ा है। बाजार और दफ्तरों में कम चहलपहल रही। सामान्य कारोबार में गिरावट आई है।
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उधर, मौसम के जानकार शनिवार को भी बारिश की आशंका जता रहे हैं। एक दिन पहले बारिश होने और धूप न निकलने की वजह से सुबह गलनभरी सर्दी रही। लोगों की सामान्य दिनचर्या थोड़ी देर से शुरू हुई।
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जरूरी काम से बाहर निकले लोग भी आग का सहारा ढूंढते नजर आए। शहर में जल रहे अलावों से थोड़ी सी राहत मिली। शुक्रवार की दोपहर में कुछ देर के लिए सूर्य देव चमके जरूर, लेकिन उससे लोगों को राहत कतई नहीं मिल सकी। इस वजह से सर्दी का दौर जारी रहा।
हालांकि, बृहस्पतिवार की अपेक्षा शुक्रवार को अधिकतम तापमान में तीन और न्यूनतम तापमान में एक डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी जरूर दर्ज की गई। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 21 और न्यूनतम 14 डिग्री सेल्सियस रहा।
उधर, बढ़ती सर्दी में दुधारू पशुओं में उत्पादन घटने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में किसानों को दुधारू पशुओं की देखभाल पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
जिला पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि पहली बात तो पशुओं को सीधी हवा लगने से बचाएं, उन्हें ताजा पानी पिलाएं, रखा हुआ ठंडा पानी कतई न पिलाएं।
कहा कि पशुओं को प्रतिदिन 30 ग्राम मिनरल मिक्चर, 100 ग्राम गुड़ और लगभग 20 ग्राम अजवाइन प्रतिदिन खिलाएं।
बताया कि इसके अलावा दुधारू पशुओं में कैल्शियम की कमी हो जाती है, जिससे बीमार होने और ठंड लगने की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए दूध देने वाले मवेशी को प्रतिदिन 50 ग्राम कैल्शियम अवश्य दें।
डा. गुप्ता ने बताया कि मवेशी को कीड़ों की दवा और नमक भी समय-समय पर देते रहें, जिससे उनके बीमार होने की आशंका कम रहती है। इसके अलावा पशुओं के बाड़े में अलाव की व्यवस्था करें अथवा 100 वाट के दो बल्ब भी लगाए जा सकते हैं, जिससे वहां गर्माहट बनी रहेगी।
धान खरीद केंद्रों पर पसरा सन्नाटा
बारिश होने और ठंड बढ़ने की वजह से धान खरीद केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। बीते शुक्रवार और शनिवार को धान खरीद केंद्र हड़ताल की वजह से बंद रहे, जिससे बड़ी संख्या में किसान खरीद केंद्रों से लौट गए थे।
उन्होंने अपनी उपज या तो आढ़तियों को बेच दी थी, अथवा घर ले गए। हड़ताल खत्म होने के बाद भी खरीद केंद्रों पर धान की तुलाई शुरू नहीं हो सकी। अब दो दिन से खराब मौसम की वजह से किसान अपनी उपज लेकर नहीं पहुंच रहे हैं।
बदली, बूंदाबांदी से आलू में लगता झुलसा रोग
इटावा। जनपद में आलू के अच्छे उत्पादन के लिए कीट का सही समय पर नियंत्रण जरूरी है। आलू की फसल पिछैती झुलसा रोग के प्रति अति संवेदनशील होती है।
बदली व बूंदाबांदी के दौरान आलू में झुलसा रोग का प्रकोप बहुत तेजी से फैलता है, फसल को भी काफी क्षति पहुंचती है। यह जिला उद्यान अधिकारी सुनील कुमार ने कही।
बताया कि पिछैती रोग के प्रकोप से पत्तियां सिरे से झुलसना शुुरू हो जाती हैं। पत्तियों पर भूरे काले रंग के जलीय धब्बे बनते हैं, पत्तियों के निचली सतह पर रुई की तरह फफूंदी दिखाई देती है।
बदलीयुक्त 80 प्रतिशत से अधिक आद्र वातावरण एवं 10 से 20 डिग्री तापमान पर रोग का प्रकोप बहुत तेजी से होता है। दो से चार दिन के अंदर पूरी तरह नष्ट हो जाती है।

आलू की फसल को झुलसा रोग से बचाने को जिंक मैग्नीज कार्बोमेट 2.0 से 2.5 किलो को 800 से 1000 लीटर पानी घोलकर हेक्टेयर की दर से छिड़काव किया जाए।
सरसों को माहू से बचाने के लिए करें दवा का छिड़काव
शनिवार को बूंदाबांदी होने की आशंका है। आलू की फसल को झुलसा रोग से बचाने के लिए खेतों में भभूतीनाशक दो ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव कर दें।
सरसों की फसल को माहू आने की संभावना को देखते हुए कोई भी कीटनाशक दवा का छिड़काव कर दें। इसके लिए नीम ऑयल दवा या जैविक दवा का छिड़काव करें।
- डॉ. विजय बहादुर जायसवाल, मौसम वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र
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