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लॉयन सफारी में गूंजी शावकों की किलकारी, ज्योतिष शास्त्र से होगा नामकरण

Sat, 12 Dec 2020 10:47 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 12 Dec 2020 10:47 PM IST
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The lion safari will have the buzzing of buzzing cubs, naming it from astrology
फोटो संख्या 33 व 34 शेरनी जेसिका और शावकों की सीसीटीवी तस्वीर - फोटो : ETAWHA
इटावा। लॉयन सफारी में नन्हें शावकों की आवाज से खुशियां बिखर गईं। 105 दिन के इंतजार के बाद शुक्रवार आधी रात को शेरनी जेसिका ने दो बच्चों को जन्म दिया। सफारी प्रशासन फिलहाल शेरनी और बच्चों की देखरेख में जुटा है। करीब 10 दिन बाद बच्चों की आंख खुलने पर शेरनी को बाहर लाया जाएगा। इस दौरान धूूमधाम से जश्न मनाने की तैयारी है। सफारी के निदेशक राजीव मिश्रा ने बताया कि जच्चा और बच्चे स्वस्थ हैं। उन्होंने बताया कि शावकों का नामकरण ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि साढे़ तीन माह पहले शेर मनन से जेसिका की मेटिंग कराई गई थी। तभी से जेसिका की निगरानी और देखभाल चल रही थी। प्रसव के लिए तीन कमरे का अलग सेट बनाया गया था। सप्ताह भर से जेसिका इसी विशेष कक्ष में रह रही थी। उसके खाने आराम करने और प्रसव के लिए अंधेरा कमरा बनाया गया था। शुक्रवार रात 12:08 बजे जेसिका ने पहले बच्चे को जन्म दिया। इसके करीब एक घंटे बाद 1:13 बजे दूसरा शावक जन्मा।
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उन्होंने बताया कि बच्चा अस्वस्थ होने या उनका असामान्य व्यवहार होने पर अमूनन शेरनी बच्चे को खुद से दूर कर देती है, लेकिन जेसिका ने प्रसव के कुछ देर बाद ही दोनों शावकों को दूध पिलाना शुरू कर दिया। इससे साफ है कि दोनों शावक स्वस्थ हैं।
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सफारी के उप निदेशक सुरेश चंद्र राजपूत ने बताया कि जेसिका की देखभाल के लिए अलग केयर टेकर नियुक्त किया गया था। इस वक्त उसके बाड़े तक वही जा सकता है लेकिन बच्चों को छूने या उनके पास जाने पर शेरनी के व्यवहार में परिवर्तन आने का खतरा है। इसलिए बच्चों की आंख खुलने तक करीब 10 दिन तक इंतजार किया जाएगा। इसके बाद उन्हें बाहर लाने पर पता चलेगा की शावक नर हैं या मादा। उन्होंने बताया कि जेसिका के खानपान में बदलाव करके उसे बीफ की जगह अब हल्का चिकन, मटन और सूप दिया जाएगा। दो सप्ताह तक वह यही खाना खाएगी।

निदेशक राजीव मिश्रा ने बताया कि प्रसव के दिन और समय के मुताबिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पूरे विधि विधान से शावकों का नामकरण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिस तरह मानव जीवन में ग्रह नक्षत्रों का प्रभाव होता है उसी तरह यह अन्य जीवों को भी प्रभावित करते हैं। कोरोना काल में ऐसी मान्यताएं और बढ़ गई है। इससे स्वास्थ्य और जीवन के अन्य पहलू प्रभावित होते हैं। इन्हें देखते हुए शावकों का नामकरण और अन्य संस्कार ज्योतिष शास्त्र के अनुसार करवाया जा रहा है।
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