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रोजी रोटी से जोड़े बगैर हिंदी का विकास संभव नहीं

Sat, 14 Nov 2015 11:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा Updated Sat, 14 Nov 2015 11:15 PM IST
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The couple can not prosper without a livelihood Hindi

इटावा। देश के विख्यात राष्ट्रीय कवि डा. हरिओम पवार असहिष्णुता को लेकर पुरस्कार लौटाए जाने को राजनैतिक स्टंट मानते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव को प्रभावित करने के लिए ही इसका इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि दादरी की घटना निश्चित तौर पर निंदनीय है परंतु देश में ऐसी अनेक घटनाएं हुईं तब साहित्यकारों की संवेदनशीलता नहीं जागी। उन्होंने हिंदी के विकास के परिप्रेक्ष्य में कहा कि जब तक हिंदी को रोजी रोटी से नहीं जोड़ा जाता तब तक हिंदी का विकास संभव नहीं है।

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डा. पवार ने कहा कि 60 वर्ष तक सत्ता में रहने वाले सत्ता छिन जाने से खीझे हुए हैं। पहले भाजपा भी कांग्रेस को सत्ता से हटाने के लिए अनेक तरीके के प्रयास किए जाते रहे। अब वही काम कांग्रेस भी कर रही है। उन्होंने कहा कि मैने पहले ही कह दिया था कि असहिष्णुता को लेकर पुरस्कार वापस करने का षड़यंत्र सिर्फ बिहार चुनाव के अंतिम चरण के चुनाव तक चलेगा।
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उन्होंने पुरस्कार वापस करने की प्रक्रिया पर चुटकी लेते हुए कहा कि देश में कुल 1450 लोगों को पुरस्कार मिले। इसमें से 38 ने पुरस्कार वापस करने की घोषणा की। 8 पुरस्कार वापस करने गए इसमें से तीन ने सिर्फ चेक वापस किए लेकिन पुरस्कार वापस करने का शोर बहुत हुआ।  उन्होंने कहा कि अब टीपू सुल्तान को लेकर शोर शुरू हो गया है।
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इसका कारण कर्नाटक में चुनाव होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि आज ही बिट्रेन में रहने वाले साहित्यकार ने भारत में हिंदू तालिबानी शासक की बात कही। वह देश में 40 वर्षों से        नहीं है। 

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