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ट्रेन से नहीं उतरने दिया शव
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
Updated Fri, 15 Jan 2016 12:28 AM IST
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नई दिल्ली से दरभंगा जा संपर्क क्रांति में गुरूवार को एसी कोच में गंभीर रूप से बीमार यात्री की मौत हो गई। सूचना पर ट्रेन को इटावा स्टेशन पर रोका गया। स्टेशन पर रेलवे के डाक्टर में ट्रेन में पहुंचकर यात्री की जांच की और उसे मृत घोषित कर दिया।
इसके बाद जब मृतक का शव स्टेशन पर उतारा जाने लगा तो परिजनों ने इसका विरोध किया और शव उतारने से इंकार कर दिया। उधर सहयात्री भी शव उतारने का विरोध कर हंगामा करने लगेे। जिसके बाद डीआरएम के निर्देश पर स्टेशन अधीक्षक ने यात्रियों से नो आब्जेक्सन लिखाकर ट्रेन को आगे के लिए रवाना किया।
इस दौरान ट्रेन डेढ़ घंटे तक इटावा स्टेशन पर ही खड़ी रही। जनपद मधुवनी बिहार के ग्राम हरहरी थाना रूद्रपुर निवासी मनोज कुमार झा ( 41) पत्नी पिंकू व कुमार मंगलम के साथ तीन जनवरी को दिल्ली गए थे।
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पैर के आपरेशन के बाद पीड़ित मनोज का उपचार कराकर उसकी पत्नी व पुत्र गुरुवार को दरभंगा जाने के लिए संपर्क क्रांति के एस कोच में बैठे। ट्रेन को चले हुए अभी डेढ़ घंटे ही हुए थे कि अचानक ही मनोज की तबियत बिगड़ने लगी।
पत्नी पिंकू ने इसकी सूचना ट्रेन में चल रहे टीटीई को दी, जिसके बाद ट्रेन को इटावा रेलवे स्टेशन पर रोकने के निर्देश कंट्रोल रूम ने दिए। शाम 6 :25 बजे नान स्टाप ट्रेन को इटावा स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर पांच पर रोका गया।
स्टेशन अधीक्षक आर के त्रिपाठी के साथ मौके पर पहुंचे रेलवे के डा. रफी अहमद ने चेकअप कर उन्हें मृत घोषित किया। जिसके बाद मनोज के शव को ट्रेन से उतारने की कार्यवाई शुरू कर दी गई। जैसे ही जीआरपी शव को ट्रेन से उतारने को पहुंची पत्नी पिंकू ने शव ट्रेन से उतारने से मना कर दिया।
उसका कहना था कि उसके साथ उसका छह वर्ष का बेटा है और सर्दी के मौसम के कपडे़ भी उसके पास नहीं हैं। ऐसे में शव के साथ वह कहां भटकेगी। महिला की गुहार के बाद भी जब कोच कंडक्टर ने शव उतारे बिना ट्रेन आगे न ले जाने की बात कही तो ट्रेन में सवार यात्री भड़क गए।
यात्रियों ने रेल अधिकारियों व टीटीई को खरी खोटी सुनाते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। यात्रियों के विरोध के बाद मामला डीआरएम वीके त्रिपाठी तक जा पहुंचा। डीआरएम ने मोबाइल पर स्टेशन अधीक्षक को निर्देश दिए कि अगर कोच के अन्य यात्री कोच में शव होने पर आपत्ती नहीं कर रहे हैं तो उनसे लिखित लेकर ट्रेन को रवाना किया जाए।
जिसके बाद कोच में सवार कई यात्रियों से लिखित नो ओब्जेक्सन लिया गया और इसके बाद ट्रेन को 7 बजकर 55 मिनट पर ट्रेन को रवाना किया गया।
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इसके बाद जब मृतक का शव स्टेशन पर उतारा जाने लगा तो परिजनों ने इसका विरोध किया और शव उतारने से इंकार कर दिया। उधर सहयात्री भी शव उतारने का विरोध कर हंगामा करने लगेे। जिसके बाद डीआरएम के निर्देश पर स्टेशन अधीक्षक ने यात्रियों से नो आब्जेक्सन लिखाकर ट्रेन को आगे के लिए रवाना किया।
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इस दौरान ट्रेन डेढ़ घंटे तक इटावा स्टेशन पर ही खड़ी रही। जनपद मधुवनी बिहार के ग्राम हरहरी थाना रूद्रपुर निवासी मनोज कुमार झा ( 41) पत्नी पिंकू व कुमार मंगलम के साथ तीन जनवरी को दिल्ली गए थे।
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पैर के आपरेशन के बाद पीड़ित मनोज का उपचार कराकर उसकी पत्नी व पुत्र गुरुवार को दरभंगा जाने के लिए संपर्क क्रांति के एस कोच में बैठे। ट्रेन को चले हुए अभी डेढ़ घंटे ही हुए थे कि अचानक ही मनोज की तबियत बिगड़ने लगी।
पत्नी पिंकू ने इसकी सूचना ट्रेन में चल रहे टीटीई को दी, जिसके बाद ट्रेन को इटावा रेलवे स्टेशन पर रोकने के निर्देश कंट्रोल रूम ने दिए। शाम 6 :25 बजे नान स्टाप ट्रेन को इटावा स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर पांच पर रोका गया।
स्टेशन अधीक्षक आर के त्रिपाठी के साथ मौके पर पहुंचे रेलवे के डा. रफी अहमद ने चेकअप कर उन्हें मृत घोषित किया। जिसके बाद मनोज के शव को ट्रेन से उतारने की कार्यवाई शुरू कर दी गई। जैसे ही जीआरपी शव को ट्रेन से उतारने को पहुंची पत्नी पिंकू ने शव ट्रेन से उतारने से मना कर दिया।
उसका कहना था कि उसके साथ उसका छह वर्ष का बेटा है और सर्दी के मौसम के कपडे़ भी उसके पास नहीं हैं। ऐसे में शव के साथ वह कहां भटकेगी। महिला की गुहार के बाद भी जब कोच कंडक्टर ने शव उतारे बिना ट्रेन आगे न ले जाने की बात कही तो ट्रेन में सवार यात्री भड़क गए।
यात्रियों ने रेल अधिकारियों व टीटीई को खरी खोटी सुनाते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। यात्रियों के विरोध के बाद मामला डीआरएम वीके त्रिपाठी तक जा पहुंचा। डीआरएम ने मोबाइल पर स्टेशन अधीक्षक को निर्देश दिए कि अगर कोच के अन्य यात्री कोच में शव होने पर आपत्ती नहीं कर रहे हैं तो उनसे लिखित लेकर ट्रेन को रवाना किया जाए।
जिसके बाद कोच में सवार कई यात्रियों से लिखित नो ओब्जेक्सन लिया गया और इसके बाद ट्रेन को 7 बजकर 55 मिनट पर ट्रेन को रवाना किया गया।