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टिकट के लिए कयास और इंतजार
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इटावा। मकर संक्रांति का दिन और शीतलहर के बीच गर्म खिचड़ी, मंगौड़े, गजक, गरमागरम समोसा और चाय के साथ चुनावी चर्चाओं के चटकारे फिजा में घुलते रहे।
कांग्रेस, सपा, बसपा पहले ही टिकट घोषित कर चुके थे। इनमें से किसी पार्टी ने इटावा जिले की किसी भी सीट प्रत्याशी नहीं घोषित किया था। शनिवार को भाजपा ने भी इटावा से किनारा कर लिया।
हालांकि, भाजपा ने प्रत्याशियों की जो सूची जारी की उसने चर्चाओं में गर्मा दिया है। टिकट की उम्मीद रखने वाले नेताओं के समर्थक और विरोधियों की इस लिस्ट ने धड़कनें बढ़ा दीं।
दूसरी तरफ आमजन की चर्चा भी काफी रोमांचक हो गई। भाजपा उम्मीदवारों की सूची के लिए आमजन और राजनीतिक लोग सभी इंतजार कर रहे थे। दोपहर में जैसे ही लिस्ट घोषित हुई, तो तुरंत सोशल मीडिया पर नाम वायरल होने ल
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गे। लोगों की पहली प्रतिक्रिया थी, किस-किसका टिकट कटा, इटावा के प्रत्याशी घोषित हुए कि नहीं, जवाब मिला नहीं। भाजपा भी इटावा से किनारा कर गई। इसके बाद नामचीन सीटों पर कौन-कौन प्रत्याशी उतारा गया है, किस-किस का टिकट कटा है, इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई।
भाजपा की पहली सूची में 20 विधायकों के टिकट कटने पर इटावा में भी टिकट कटने और टिकट बचने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया। भाजपा के इटावा जिले में दो विधायक हैं।
पहले ये चर्चा थी कि बड़ी संख्या में टिकट काटे जाएंगे, लेकिन सिर्फ 20 टिकट कटने के अनुपात में यहां भी लोग हिसाब-किताब और अनुमान लगाने लगे।
पड़ोसी जिलों से घोषित किए गए प्रत्याशी
भाजपा, सपा और बसपा ने पड़ोसी जिले आगरा तक टिकट घोषित कर दिए। मामले में कांग्रेस और भी आगे निकल गई।
कांग्रेस ने आगरा, फर्रुखाबाद, औरैया, जालौन और एटा तक में अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी, लेकिन अभी इटावा में सभी पार्टियां नेताओं और समर्थकों को इंतजार करवा रहीं हैं।
आमजन भी बहुत बेसब्री से उम्मीदवारों की घोषणा का इंतजार कर रहा है। उसी हिसाब से कई नामों पर चर्चा भी की जा रही है। जैसे इटावा सदर से विधायक सरिता भदौरिया, हरकिशोर तिवारी, रघुराज शाक्य के नाम खूब चर्चा में रहे।
सदर विधायक को लेकर उनके समर्थकों और विरोधियों दोनों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। सरिता को टिकट मिलेगा या कटेगा, इसको लेकर खूब चर्चा रही। उधर, यदि हरिकिशोर तिवारी यदि सपा से उतरेंगे तो रघुराज शाक्य की क्या स्थिति होगी।
बसपा से बादशाह सिंह राजपूत का को लेकर चर्चा रही। हालांकि, भाजपा से विमल भदौरिया, सुबोध तिवारी, सपा से कुलदीप गुप्ता शंटू के नाम भी हवा में तैरते रहे।
भरथना में भी तीन नामों की चर्चा
भरथना विस सीट पर पिछली बार त्रिकोणीय मुकाबला था, अबकी भी कमोबेश यही स्थिति है, लेकिन यहां पर तीन पार्टियों से दावेदारी करने वाले तीन कमलेश चर्चा में हैं।
भाजपा से सावित्री कठेरिया विधायक हैं। भाजपा की लिस्ट आने के बाद यहां पर टिकट कटने और बचने का गणित लोगों की जुबान पर रहा। इस बीच दावेदारों की भी चर्चा रही।
दावेदारों में भाजपा से सावित्री कठेरिया के अलावा पूर्व मंत्री गौरीशंकर के पुत्र सिद्धार्थ शंकर, पूर्व लोकसभा प्रत्याशी कमलेश कठेरिया, बसपा से आए उदयवीर सिंह जाटव के नामों की चर्चा रही।
पूर्व विधायक केके राज के भी टिकट की जोर आजमाइश की चर्चा है। उधर, सपा से प्रेमदास कठेरिया के पुत्र कमलेश कठेरिया, अनिल दोहरा, राघवेंद्र गौतम और समीर दोहरे की चर्चा रही। उधर पूर्व मंत्री गयाप्रसाद वर्मा और पूर्व विधायक सुखदेवी के बेटे सुशांत वर्मा की दावेदारी भी चर्चा में है।
बसपा से कमलेश आंबेडकर की चर्चा
बसपा एमएलसी भीमराव आंबेडकर की पत्नी कमलेश की चर्चा अधिक है। उधर, जसवंतनगर सीट पर चर्चा कम ही है। चर्चा कम होने की वजह मुलायम परिवार की यह परंपरागत सीट है।
यहां लोगों की जिज्ञासा अधिक है कि शिवपाल सिंह यादव खुद चुनाव लड़ेंगे अथवा प्रसपा उम्मीदवार के रूप में अपने बेटे आदित्य यादव को उतारेंगे। भाजपा से मुकेश यादव, महेश गुप्ता, सुग्रीव धाकरे नाम चर्चा में रहे।
हालांकि, बाबा हरिनारायण सिंह भी भाजपा से जुगत भिड़ा रहे हैं। हालांकि, वे पहले बसपा से चुनाव लड़ चुके हैं। इस सीट से कांग्रेस से दावेदारों के रूप में अरुण यादव, अजय यादव गुड्डू और यादवेंद्र यादव के नाम चर्चा में हैं। बसपा से अभी कोई बड़ा चर्चित नाम उभरकर नहीं आया है।
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कांग्रेस, सपा, बसपा पहले ही टिकट घोषित कर चुके थे। इनमें से किसी पार्टी ने इटावा जिले की किसी भी सीट प्रत्याशी नहीं घोषित किया था। शनिवार को भाजपा ने भी इटावा से किनारा कर लिया।
हालांकि, भाजपा ने प्रत्याशियों की जो सूची जारी की उसने चर्चाओं में गर्मा दिया है। टिकट की उम्मीद रखने वाले नेताओं के समर्थक और विरोधियों की इस लिस्ट ने धड़कनें बढ़ा दीं।
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दूसरी तरफ आमजन की चर्चा भी काफी रोमांचक हो गई। भाजपा उम्मीदवारों की सूची के लिए आमजन और राजनीतिक लोग सभी इंतजार कर रहे थे। दोपहर में जैसे ही लिस्ट घोषित हुई, तो तुरंत सोशल मीडिया पर नाम वायरल होने ल
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गे। लोगों की पहली प्रतिक्रिया थी, किस-किसका टिकट कटा, इटावा के प्रत्याशी घोषित हुए कि नहीं, जवाब मिला नहीं। भाजपा भी इटावा से किनारा कर गई। इसके बाद नामचीन सीटों पर कौन-कौन प्रत्याशी उतारा गया है, किस-किस का टिकट कटा है, इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई।
भाजपा की पहली सूची में 20 विधायकों के टिकट कटने पर इटावा में भी टिकट कटने और टिकट बचने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया। भाजपा के इटावा जिले में दो विधायक हैं।
पहले ये चर्चा थी कि बड़ी संख्या में टिकट काटे जाएंगे, लेकिन सिर्फ 20 टिकट कटने के अनुपात में यहां भी लोग हिसाब-किताब और अनुमान लगाने लगे।
पड़ोसी जिलों से घोषित किए गए प्रत्याशी
भाजपा, सपा और बसपा ने पड़ोसी जिले आगरा तक टिकट घोषित कर दिए। मामले में कांग्रेस और भी आगे निकल गई।
कांग्रेस ने आगरा, फर्रुखाबाद, औरैया, जालौन और एटा तक में अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी, लेकिन अभी इटावा में सभी पार्टियां नेताओं और समर्थकों को इंतजार करवा रहीं हैं।
आमजन भी बहुत बेसब्री से उम्मीदवारों की घोषणा का इंतजार कर रहा है। उसी हिसाब से कई नामों पर चर्चा भी की जा रही है। जैसे इटावा सदर से विधायक सरिता भदौरिया, हरकिशोर तिवारी, रघुराज शाक्य के नाम खूब चर्चा में रहे।
सदर विधायक को लेकर उनके समर्थकों और विरोधियों दोनों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। सरिता को टिकट मिलेगा या कटेगा, इसको लेकर खूब चर्चा रही। उधर, यदि हरिकिशोर तिवारी यदि सपा से उतरेंगे तो रघुराज शाक्य की क्या स्थिति होगी।
बसपा से बादशाह सिंह राजपूत का को लेकर चर्चा रही। हालांकि, भाजपा से विमल भदौरिया, सुबोध तिवारी, सपा से कुलदीप गुप्ता शंटू के नाम भी हवा में तैरते रहे।
भरथना में भी तीन नामों की चर्चा
भरथना विस सीट पर पिछली बार त्रिकोणीय मुकाबला था, अबकी भी कमोबेश यही स्थिति है, लेकिन यहां पर तीन पार्टियों से दावेदारी करने वाले तीन कमलेश चर्चा में हैं।
भाजपा से सावित्री कठेरिया विधायक हैं। भाजपा की लिस्ट आने के बाद यहां पर टिकट कटने और बचने का गणित लोगों की जुबान पर रहा। इस बीच दावेदारों की भी चर्चा रही।
दावेदारों में भाजपा से सावित्री कठेरिया के अलावा पूर्व मंत्री गौरीशंकर के पुत्र सिद्धार्थ शंकर, पूर्व लोकसभा प्रत्याशी कमलेश कठेरिया, बसपा से आए उदयवीर सिंह जाटव के नामों की चर्चा रही।
पूर्व विधायक केके राज के भी टिकट की जोर आजमाइश की चर्चा है। उधर, सपा से प्रेमदास कठेरिया के पुत्र कमलेश कठेरिया, अनिल दोहरा, राघवेंद्र गौतम और समीर दोहरे की चर्चा रही। उधर पूर्व मंत्री गयाप्रसाद वर्मा और पूर्व विधायक सुखदेवी के बेटे सुशांत वर्मा की दावेदारी भी चर्चा में है।
बसपा से कमलेश आंबेडकर की चर्चा
बसपा एमएलसी भीमराव आंबेडकर की पत्नी कमलेश की चर्चा अधिक है। उधर, जसवंतनगर सीट पर चर्चा कम ही है। चर्चा कम होने की वजह मुलायम परिवार की यह परंपरागत सीट है।
यहां लोगों की जिज्ञासा अधिक है कि शिवपाल सिंह यादव खुद चुनाव लड़ेंगे अथवा प्रसपा उम्मीदवार के रूप में अपने बेटे आदित्य यादव को उतारेंगे। भाजपा से मुकेश यादव, महेश गुप्ता, सुग्रीव धाकरे नाम चर्चा में रहे।
हालांकि, बाबा हरिनारायण सिंह भी भाजपा से जुगत भिड़ा रहे हैं। हालांकि, वे पहले बसपा से चुनाव लड़ चुके हैं। इस सीट से कांग्रेस से दावेदारों के रूप में अरुण यादव, अजय यादव गुड्डू और यादवेंद्र यादव के नाम चर्चा में हैं। बसपा से अभी कोई बड़ा चर्चित नाम उभरकर नहीं आया है।