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Etawah News: कहीं जेल जाने की बेबसी तो कहीं राम आएंगे...
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इटावा। हर बार की तरह इस बार बोर्ड परीक्षा की कॉपियों के मूल्यांकन में भले नोट न निकले हो लेकिन साल भर पढ़ाई न करने वाले परीक्षार्थियों का दर्द जरूर नजर आया। किसी परीक्षार्थी ने जेल में होने की वजह से पढ़ाई बाधित होने की बात लिखी है तो किसी ने राम आएंगे तो अंगना सजाएंगे भजन लिखकर ही परीक्षा की इतिश्री कर ली है।
मूल्यांकन में लगे परीक्षकों के मुताबिक हाईस्कूल की हिंदी की परीक्षा की कॉपी में एक परीक्षार्थी ने लिखा है कि सर, पारिवारिक विवाद के कारण पिछले कई महीनों से जेल में था। बाहर निकला तो सिर पर परीक्षाएं आ गईं। इस कारण पढ़ाई ठीक से न हो सकी। घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं है, कृपया पास कर दीजिए। इसी तरह हाईस्कूल की कॉपी में एक परीक्षक को लिखा मिला कि माता-पिता बीमार है इसलिए पढ़ाई नहीं कर पाए। आपसे गुजारिश है कि पास कर दीजिए। इंटरमीडिएट में सही ढंग से पढ़ाई कर लेंगे। हाईस्कूल गणित की एक कॉपी में कई पेजों पर राधे-राधे लिखा मिला। इसके साथ ही राम आएंगे तो अंगना सजाएंगे...जैसे कई भजन लिखे मिले। हालांकि कॉपी में कुछ ज्यादा न लिखा होने के कारण उस हिसाब से अंक नहीं दिए गए।
बता दें कि यूपी बोर्ड की ओर से इस बार जिले में राजकीय इंटर कॉलेज और इस्लामियां इंटर कॉलेज को मूल्यांकन केंद्र बनाया गया था। दोनों केंद्रों पर हाईस्कूल की 1.53 लाख और इंटरमीडिएट की 92 हजार कॉपियों का मूल्यांकन कार्य 18 से 31 मार्च तक पूरा कर लिया गया। गुरुवार को दोनों मूल्यांकन केंद्र पर पहुंचे शिक्षकों ने अपने जरूरी प्रपत्र भरे। परीक्षकों के मुताबिक उत्तर न आने की स्थिति में छात्रों ने नंबर पाने के लिए भावनात्मक कार्ड खेलने की पूरी कोशिश की है।
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भले ही कॉपियों में छात्र अपनी गरीबी और परेशानियों का हथकंडा अपनाया हो लेकिन परीक्षकों का कहना है कि वे बोर्ड के नियमों से बंधे हैं। एक परीक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भावनात्मक बातें पढ़ने में मार्मिक लगती हैं लेकिन हम केवल सही उत्तर और बोर्ड के मानकों के आधार पर ही अंक दे सकते हैं। सादे पन्ने या भावनात्मक अपीलों पर नंबर देने का कोई प्रावधान नहीं है।
बोर्ड की ओर से निर्धारित समय में जिले के दोनों केंद्रों पर बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन कार्य पूरा कर लिया गया है। दोनों केंद्रों पर कॉपियों को जांचने में पूरी पारदर्शिता बरती गई है। किसी भी तरह अपील और बहानों को तव्वजो नहीं दी गई है। परीक्षार्थियों को उनकी मेहनत के अनुसार ही अंक प्रदान किए गए हैं।
अतुल कुमार सिंह, डीआईओएस
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मूल्यांकन में लगे परीक्षकों के मुताबिक हाईस्कूल की हिंदी की परीक्षा की कॉपी में एक परीक्षार्थी ने लिखा है कि सर, पारिवारिक विवाद के कारण पिछले कई महीनों से जेल में था। बाहर निकला तो सिर पर परीक्षाएं आ गईं। इस कारण पढ़ाई ठीक से न हो सकी। घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं है, कृपया पास कर दीजिए। इसी तरह हाईस्कूल की कॉपी में एक परीक्षक को लिखा मिला कि माता-पिता बीमार है इसलिए पढ़ाई नहीं कर पाए। आपसे गुजारिश है कि पास कर दीजिए। इंटरमीडिएट में सही ढंग से पढ़ाई कर लेंगे। हाईस्कूल गणित की एक कॉपी में कई पेजों पर राधे-राधे लिखा मिला। इसके साथ ही राम आएंगे तो अंगना सजाएंगे...जैसे कई भजन लिखे मिले। हालांकि कॉपी में कुछ ज्यादा न लिखा होने के कारण उस हिसाब से अंक नहीं दिए गए।
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बता दें कि यूपी बोर्ड की ओर से इस बार जिले में राजकीय इंटर कॉलेज और इस्लामियां इंटर कॉलेज को मूल्यांकन केंद्र बनाया गया था। दोनों केंद्रों पर हाईस्कूल की 1.53 लाख और इंटरमीडिएट की 92 हजार कॉपियों का मूल्यांकन कार्य 18 से 31 मार्च तक पूरा कर लिया गया। गुरुवार को दोनों मूल्यांकन केंद्र पर पहुंचे शिक्षकों ने अपने जरूरी प्रपत्र भरे। परीक्षकों के मुताबिक उत्तर न आने की स्थिति में छात्रों ने नंबर पाने के लिए भावनात्मक कार्ड खेलने की पूरी कोशिश की है।
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भले ही कॉपियों में छात्र अपनी गरीबी और परेशानियों का हथकंडा अपनाया हो लेकिन परीक्षकों का कहना है कि वे बोर्ड के नियमों से बंधे हैं। एक परीक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भावनात्मक बातें पढ़ने में मार्मिक लगती हैं लेकिन हम केवल सही उत्तर और बोर्ड के मानकों के आधार पर ही अंक दे सकते हैं। सादे पन्ने या भावनात्मक अपीलों पर नंबर देने का कोई प्रावधान नहीं है।
बोर्ड की ओर से निर्धारित समय में जिले के दोनों केंद्रों पर बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन कार्य पूरा कर लिया गया है। दोनों केंद्रों पर कॉपियों को जांचने में पूरी पारदर्शिता बरती गई है। किसी भी तरह अपील और बहानों को तव्वजो नहीं दी गई है। परीक्षार्थियों को उनकी मेहनत के अनुसार ही अंक प्रदान किए गए हैं।
अतुल कुमार सिंह, डीआईओएस