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लोक कला के लिए संजीवनी बना सैफई महोत्सव: मालिनी
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा।
Updated Sat, 26 Dec 2015 11:46 PM IST
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लोकगीत गायिका मालिन अवस्थी का कहना है कि आज लोकगीतों को वह स्थान नहीं
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मिल रहा है जो मिलना चाहिए। पाश्चात्य सभ्यता की बह रही बयार में लोग अपनी
संस्कृति को पीछे छोड़ रहे हैं। सैफई महोत्सव के उद्घाटन कार्यक्रम में
शामिल होने पहुंची मालिन अवस्थी ‘अमर उजाला’ से बातचीत कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि सैफई महोत्सव लोक कला के लिए संजीवनी बन गया है। आज जहां लोक कला को पीछे छोड़ पाश्चात्य गीत संगीत को आगे बढ़ाया जा रहा है, वहीं सैफई महोत्सव में लोक कला को न सिर्फ बढ़ावा दिया जा रहा है बल्कि लोक कला से जुडे़ कलाकारों को सम्मानित कर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सैफई महोत्सव से लोक कला को ऊपर उठने का मौका मिला है। यही कारण है कि आज देश भर में सैफई महोत्सव की धूम है। इससे न सिर्फ कलाकारों को आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों और नई पीढ़ी का भी जुड़ाव लोक कला से हो रहा है।
कलाकारों के साथ रहकर सैकड़ों की संख्या में स्कूली बच्चे लोक कला का प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। यह बच्चे इस कला को आगे लेकर जाएंगे। अगर ऐसे ही प्रयास देश भर में हो तो हमारी धरोहर लोक कला देश के साथ-साथ विदेशों में भी धूम मचा सकती है।
उन्होंने कहा कि सैफई महोत्सव लोक कला के लिए संजीवनी बन गया है। आज जहां लोक कला को पीछे छोड़ पाश्चात्य गीत संगीत को आगे बढ़ाया जा रहा है, वहीं सैफई महोत्सव में लोक कला को न सिर्फ बढ़ावा दिया जा रहा है बल्कि लोक कला से जुडे़ कलाकारों को सम्मानित कर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सैफई महोत्सव से लोक कला को ऊपर उठने का मौका मिला है। यही कारण है कि आज देश भर में सैफई महोत्सव की धूम है। इससे न सिर्फ कलाकारों को आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों और नई पीढ़ी का भी जुड़ाव लोक कला से हो रहा है।
कलाकारों के साथ रहकर सैकड़ों की संख्या में स्कूली बच्चे लोक कला का प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। यह बच्चे इस कला को आगे लेकर जाएंगे। अगर ऐसे ही प्रयास देश भर में हो तो हमारी धरोहर लोक कला देश के साथ-साथ विदेशों में भी धूम मचा सकती है।