{"_id":"ec1c109354ceca465c409003336bbc5d","slug":"rss-is-very-clever-organization-mulayam-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आरएसएस बहुत ही चालाक संगठन: मुलायम ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आरएसएस बहुत ही चालाक संगठन: मुलायम
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
Updated Mon, 05 Jan 2015 11:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंच एवं सहकारिता सम्मेलन में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने आरएसएस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहाकि आरएसएस बहुत ही चालक संगठन है। इससे सचेत रहने की आवश्यकता है। लोकसभा चुनाव में घर-घर जाकर प्रचार किया गया कि सपा जीती तो मुस्लिमों का शासन आ जाएगा। भाई, मुसलमानों का राज कैसे देश में आ सकता है। उनकी देश में जनसंख्या मात्र 11 फीसदी है और प्रदेश में 15 फीसदी।
विज्ञापन
उन्होंने प्रधानमंत्री को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे कहते हैं कि गंदगी दूर करो। असली गंदगी शौचालय न होने से है। प्रदेश सरकार ने शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार देना शुरू कर दिया है। इंडिया गेट पर झाड़ू चलाने से गंदगी दूर नहीं हो सकती है।
विज्ञापन
प्रधानमंत्री गांव में आकर किसी नाली की सफाई कर आदर्श प्रस्तुत करें। सपा मुखिया ने कहा कि भाजपा का धंधा झूठ बोलकर लोगों को ठगना है। सात माह में एक वादा पूरा नहीं हो पाया है। हमने जो वादे किए थे वे पूरे कर दिए हैं। कैंसर, किडनी रोग, लीवर, हार्ट का इलाज भी मुफ्त में होगा।
विज्ञापन
सहकारिता तथा पंचायतों के प्रतिनिधि चाहें तो देश की तस्वीर बदल सकते हैं। सैफई में एक भी पैसा सरकार का नहीं लगा है। सिर्फ प्रधानों का सहयोग लोगों ने किया है। सैफई का उदाहरण लेकर जाएं और गांव का विकास करें। उन्होंने कहा कि सरकार या गैर सरकारी ऋण लेने वाले किसी भी किसान की जमीन नीलाम नहीं होगी।
सपा सरकार ने ऐसा कानून बना दिया है। 40 हजार से अधिक बेरोजगार युवाओं को 15 जनवरी तक पुलिस की नौकरी मिल जाएगी। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य गांव का विकास करना है। आजादी के बाद कई गांव सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
छलका लोकसभा चुनाव में करारी हार का दर्द
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के मुंह से लोकसभा चुनाव में करारी हार का दर्द आखिर छलक ही पड़ा। भाषणों के दौरान बोले कि ऐसा हराया, ऐसा हराया कि हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी। जीते तो सिर्फ हमारे परिवार के ही पांच सदस्य। आजमगढ़ से मैं भी बड़ी मुश्किल से चुनाव जीत पाया।
वो भी काफी कम वोटों के अंतर से। प्रो. रामगोपाल, लोनिवि मंत्री शिववाल सिंह, सांसद धर्मेंद्र यादव यदि घर-घर न घूमे होते तो शायद मैं भी...। जबकि भाजपा के मोदी को 3.51 लाख के अंतर से जिता दिया। पूर्वांचल ने ऐसा गुस्सा हम पर पहली बार दिखाया है।
संसद में लोग हम पर कटाक्ष करते हैं तो मैं क ह देता हूं कि मेरे परिवार पर तो लोगों ने भरोसा जताया है। परिवार के भरोसे हम फिर आ जाएंगे। मोदी की हवा में सब के सब बह गए। हमारे कार्यों पर भी ध्यान नहीं दिया। हमने जो किया है कि वो किसी अन्य सरकारों ने नहीं किया। खैर.. देश की जनता बुद्धिमान है।
...जब मुलायम ने दिखाई हठ
सपा मुखिया करीब एक बजे मंच पर पहुंचे। भाषण देते समय अचानक मंत्रियों की ओर मुखातिब होकर बोले कि पंचायत प्रतिनिधियों के लिए कोई व्यवस्था की है या नहीं। फिर बोले पिछले साल तो किया था इस बार क्याें नहीं...। बुलाओ शिवपाल, रामगोपाल को।
मुखिया के मुंह से यह बात सुनकर सबके चेहरे लटक गए। कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया। शिवपाल सिंह उठे और मंच तक गए, कुछ बोले। इसके बाद भी सपा मुखिया नहीं माने बोले कि पूरी कैबिनेट है, अधिकारी भी हैं, भाई कुछ तो कहो। मैं तो देर से आया हूं, मुझे पता नहीं है कि तुम लोगों ने क्या किया है।
इसके बाद शिवपाल से चर्चा कर पंचायत मंत्री कैलाश यादव ने पास पहुंचकर घोषणा की कि पंचायत चुनाव के बाद भत्ता डेढ़ गुना कर दिया जाएगा। इसके बाद सपा मुखिया संतुष्ट हुए और आगे भाषण शुरू किया।
भाजपा-बसपा के शासन में ध्वस्त हुआ सहकारिता आंदोलन
इटावा। सपा के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद प्रो. रामगोपाल यादव ने भाजपा और बसपा पर निशाना साधा। कहा कि भाजपा और बसपा के शासन में सहकारिता आंदोलन ध्वस्त हो गया था। सपा सरकार इसे पटरी पर लेकर आई है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. रामगोपाल ने कहा कि मनरेगा और एमडीएम के कारण पंचायत चुनाव जीतने के लिए भी लोग करोड़ों रुपये खर्च करने लगे हैं।
लोहिया आवास के लिए प्रधान तथा अधिकारियों के द्वारा 20-20 हजार रुपये मांगे जा रहे हैं। एक डीएम ने एक साथ स्कूलों पर छापा डलवाया था। 37 स्कूलों कई दिनों से बंद पाए गए थे, लेकिन मिडडे-मील बराबर बन रहा था। पीडीएस में गड़बड़ी है, सरकार व्यवस्था में बदलाव का प्रयास कर रही है। सिस्टम में नीचे से सुधार लाने की आवश्यकता है। नेताजी ने 1967 में मात्र 25 हजार में चुनाव लड़ लिया था।