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रामबाग आश्रम: पहली सुनवाई में नहीं हो सका फैसला

Sat, 25 Jun 2016 12:33 AM IST
अमर उजाला इटावा
अमर उजाला इटावा Updated Sat, 25 Jun 2016 12:33 AM IST
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Rambagh Ashram: the first trial could not decide
भरथना एसडीएम कोर्ट में अपना पक्ष लेकर पहुंचे दावेदार महंत अवधेशदास अपने समर्थकों के साथ - फोटो : अमर उजाला

बकेवर। रामबाग आश्रम लुधियानी में महंती को लेकर उपजे विवाद की पहली सुनवाई शुक्रवार को एसडीएम भरथना के कोर्ट में हुई। मामले में शुक्रवार को कोई फैसला नहीं हो सका। अब अगली सुनवाई के लिए 15 जुलाई की तारीख मुकर्रर की गई है। दोनों पक्षों के वकीलों ने अपने-अपने वकालतनामे  दाखिल किए। फिलहाल आश्रम पर रिसीवर की नियुक्ति बनी रहेगी। रिसीवर के जो आदेश हैं वे यथावत लागू रहेेंगे।

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  ज्ञात हो लुधियानी के रामबाग आश्रम मन्दिर पर मुख्य महंत परमानंद दास का 8 मई को उज्जैन कुंभ में देहांत होने के बाद मंदिर के मुख्य महंत बनने को लेकर विवाद खड़ा हो गया । लुधियानी के लोग अपने गांव के सियाराम दास को महंत बनाना चाहते है जबकि मंदिर कमेटी के सुदर्शन सिंह चौहान व अन्य साधू संत परमानंद दास का अंतिम संस्कार करने वाले अवधेशदास को मंदिर का मुख्य महंत बनाना चाह रहे थे।
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दोनों पक्षों में इस बात को लेकर  तनाव पूर्ण स्थिति हो गयी थी।  पुलिस प्रशास ने आश्रम स्थल पर पीएसी तैनात कर रखी है। मंदिर आश्रम की व्यवस्था देखरेख के लिए तहसीलदार भरथना को रिसीवर नियुक्त किया गया।   बकेवर के लुधियानी के रामबाग आश्रम ठाकुर रामजानकी मंदिर पर मुख्य महंती के विवाद को लेकर शुक्रवार से सुनवाई शुरू हुई।
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सुबह लुधियानी के सियाराम दास जी अपने करीब आधा दर्जन सहयोगियों के साथ एसडीएम कोर्ट पहुंचे। वहीं, मंदिर के महंत की दावेदारी कर रहे दूसरे  संत अवधेश दास  जी व सुदर्शन सिंह अपने साथ करीब चार ट्रैक्टरों से समर्थकों सहित पहुंचे। उनके साथ लगभग सौ साधु-संत थे।

दोनों पक्षों ने अपने-अपने वकीलों के माध्यम से मंदिर आश्रम से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत किए। एसडीएम भरथना मीटिंग में व्यस्त होने के चलते देर से अपने कार्यालय पहुंचे। सियाराम दास जी के वकील रामपाल सिंह राठौर व संत अवधेशदास के वकील सुरेशचंद्र यादव ने अपना वकालतनामा व विवाद से संबंधित कागजात प्रस्तुत किए।


कागजात व वकालतनामा लगने के बाद कोई बहस नहीं हो सकी। अब 15 जुलाई की तारीख इस मामले में दी गई है। फिलहाल मामले में रिसीवर का ही आधिपत्य रहेगा। पुलिस पीएसी के साये में ही पूजा पाठ होगी।

 

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