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ओडीएफ गांव में 180 शौचालय अधूरे
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इटावा। ओडीएफ गांव मोहनपुर राहिन में आधे से अधिक शौचालय अभी तक अधूरे पड़े हैं। ग्रामीणों ने प्रधान से लेकर ब्लॉक और तहसील में शिकायतें की लेकिन निर्माण नहीं कराया जा रहा है। मजबूरन गांव के लोग खुले में शौच जाते हैं।
मोहनपुर राहिन की आबादी करीब 4400 है। इस गांव को स्वच्छ भारत मिशन के तहत 209 शौचालय मिले थे। करीब एक साल पहले कागजों पर शौचालयों का निर्माण दिखाकर गांव को ओडीएफ कर दिया गया। जबकि, हकीकत ये है कि करीब 180 लाभार्थियों के शौचालय अभी तक अधूरे पड़े हैं। किसी शौचालय में शीट नहीं लगी है तो किसी में छत नहीं है। किसी में टैंक नहीं बनाया गया है तो किसी की नींव बनाकर ही काम बंद कर दिया गया। अधूरे शौचालयों में लोग लकड़ी व कंडे भरे हैं और खुले में शौच जाते हैं। दरअसल लाभार्थियों को पैसा देने के बजाए प्रधान और सचिव ने ठेकेदार के माध्यम से काम शुरू कराया था।
गांव की रामबेटी, फूलश्री सुमन देवी, फूल भाषा देवी, प्रीति देवी, पूजा देवी और किरण देवी ने कहा कि शौचालय मिलने से आस बंधी थी कि खेतों में शौच जाने से मुक्ति मिलेगी लेकिन कागजी खानापूरी कर दी गई। एक साल से
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शौचालय अधूरे पड़े हैं। अब सुबह तड़के और रात में अधेरा होने पर शौच जाना पड़ता है। दिन में पेट में दिक्कत होने पर बड़ी मुश्किल होती है। गांव के रामचंद, सुभाष, श्रीचंद, संतोषकुमार, कुलदीप कुमार, बीपी सिंह, ओसाद
खां, शिशुपाल, सत्यपाल, लुकमान खां, सिराजुद्दीन, रक्षपाल, अजीज खान भूरे सिंह सुनील कुमार मुकेश कुमार , मुस्ताक खां, मुकीम खां, रविंद्र कुमार, शिवचरण, जयवीर सिंह, कुलदीप कुमार ने बताया कि उनके शौचालय भी अधूरे पड़े हैं। इन लोगों का कहना था कि गांव में 90 फीसदी शौचालय एक साल से अधूरे पड़े हैं। कई बार इसकी शिकायत ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, ब्लॉक और तहसील में कर चुके हैं किंतु अधिकारी सुनवाई ही नहीं कर रहे हैं। ओडीएफ गांव में ज्यादातर लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। ग्राम प्रधान विनय यादव ने ग्राम पंचायत में तीन बार में 209 शौचालय का निर्माण कराया गया है। कुछ शौचालय अधूरे है, उन्हें जल्द ही पूूरा करा दिया जाएगा।
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मोहनपुर राहिन की आबादी करीब 4400 है। इस गांव को स्वच्छ भारत मिशन के तहत 209 शौचालय मिले थे। करीब एक साल पहले कागजों पर शौचालयों का निर्माण दिखाकर गांव को ओडीएफ कर दिया गया। जबकि, हकीकत ये है कि करीब 180 लाभार्थियों के शौचालय अभी तक अधूरे पड़े हैं। किसी शौचालय में शीट नहीं लगी है तो किसी में छत नहीं है। किसी में टैंक नहीं बनाया गया है तो किसी की नींव बनाकर ही काम बंद कर दिया गया। अधूरे शौचालयों में लोग लकड़ी व कंडे भरे हैं और खुले में शौच जाते हैं। दरअसल लाभार्थियों को पैसा देने के बजाए प्रधान और सचिव ने ठेकेदार के माध्यम से काम शुरू कराया था।
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गांव की रामबेटी, फूलश्री सुमन देवी, फूल भाषा देवी, प्रीति देवी, पूजा देवी और किरण देवी ने कहा कि शौचालय मिलने से आस बंधी थी कि खेतों में शौच जाने से मुक्ति मिलेगी लेकिन कागजी खानापूरी कर दी गई। एक साल से
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शौचालय अधूरे पड़े हैं। अब सुबह तड़के और रात में अधेरा होने पर शौच जाना पड़ता है। दिन में पेट में दिक्कत होने पर बड़ी मुश्किल होती है। गांव के रामचंद, सुभाष, श्रीचंद, संतोषकुमार, कुलदीप कुमार, बीपी सिंह, ओसाद
खां, शिशुपाल, सत्यपाल, लुकमान खां, सिराजुद्दीन, रक्षपाल, अजीज खान भूरे सिंह सुनील कुमार मुकेश कुमार , मुस्ताक खां, मुकीम खां, रविंद्र कुमार, शिवचरण, जयवीर सिंह, कुलदीप कुमार ने बताया कि उनके शौचालय भी अधूरे पड़े हैं। इन लोगों का कहना था कि गांव में 90 फीसदी शौचालय एक साल से अधूरे पड़े हैं। कई बार इसकी शिकायत ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, ब्लॉक और तहसील में कर चुके हैं किंतु अधिकारी सुनवाई ही नहीं कर रहे हैं। ओडीएफ गांव में ज्यादातर लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। ग्राम प्रधान विनय यादव ने ग्राम पंचायत में तीन बार में 209 शौचालय का निर्माण कराया गया है। कुछ शौचालय अधूरे है, उन्हें जल्द ही पूूरा करा दिया जाएगा।