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शान से निकला मौला अली का जुलूस
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
Updated Sun, 03 May 2015 09:15 PM IST
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पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद (सअ) के दामाद व चौथे खलीफा हजरत अली की यौमे पैदाइश पर रामगंज से जुलूस मौला अली कमेटी ने जुलूस निकाला। इसमें अलम, चौकी, जरी आदि शामिल थी।
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शहर के कदीमी रास्तों से होते हुए जुलूस का समापन रामगंज इमामबाड़े में हुआ। रास्ते में लोगों ने शर्बत और पानी की सबील लगाई। कई जगह लंगर का भी आयोजन हुआ।
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रामगंज इमामबाड़े में हजरत अली की यौमे पैदाइश पर सुबह महफिल हुई। इसमें शायरों ने हजरत अली की शान में नातिया कलाम पढ़े। इसके बाद फातिहा किया गया। कमेटी के लोगों के अलावा आसपास के काफी लोगों ने शिरकत की।
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इसके बाद मगरिब की नमाज के बाद जुलूस-ए-मौला अली निकाला गया। जुलूस रामगंज इमामबाड़ा से निकलकर कबीरगंज, झम्मन लाल कलारी, कटरा साहब खां, रामगंज चौराहा, नेविल रोड, शाह कमर, साबित गंज, नौरंगाबाद चौराहा, तिकोनिया, कोतवाली, पछराहा, चीकर बुआ, बल्देव चौराहा, तहसील चौराहा, रामगंज ढाल से होता हुआ इमामबाड़ा पहुंचकर समाप्त हुआ। रास्ते में लोगों ने शर्बत और पानी की सबील लगाई। जुलूस के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे।
रविवार होने की वजह से कहीं पर जाम की भी स्थिति नहीं बनी। जुलूस में हाजी अजीम वारसी, नदीम उर्फ राजू, शमीम खां, आले मोहम्मद, जमील, वसीम, निजामुद्दीन, आमिर, कासिम, शानू, वसीक, शाहिद, फैजान, जीशान, शकील, सलीम, गुलाम वारिस, शमशुल वारसी, जमशेद आदि शामिल रहे।
...अली की शान बबरकत है मुस्तफा की तरह
सैदवाड़ा स्थित शरीफ मंजिल में हजरत अली की यौमे पैदाइश पर महफिल की गई। इसमें शायर तस्लीम रजा ने यह शेर अली की हक को जरूरत है मुस्तफा की तरह, अली की शान बबरकत है मुस्तफा की तरह।
सलीम रजा का यह शेर अली की जात में सब औलिया के जलवे हैं, पसंद किया गया। नफीस आब्दी का यह शेर मुश्किल में एक बार कहा था अली अली, कहना पड़ा न मुझको दोबारा अली अली भी पसंद किया गया। सचिन वारसी का शेर लब पर नाम आते ही हर मुसीबत टली, मेरे मौला अली मेरे मौला अली को भी दाद मिली।
इसमें आलिम रिजवी, तनवीर हसन ने भी शेर पढ़े। महफिल में अली मेहंदी, एसएम हादी, मो. अब्बास, इबाद, मोहम्मद मियां, शावेज नकवी, राहत हुसैन, अरशद मरगूब, अली साबिर, हाजी रईस जाफरी, इंतजार नकवी, श्यान, सोनू, जीशान, साहिल, समर, तहसीन रजा लोगों ने शिरकत की। संयोजक राहत अकील ने किया और मौलाना जैदी ने शायरों को सम्मानित किया गया।