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कबाड़ बीनने और खरीदने वाले कूड़ा निस्तारण में बनेंगे मददगार
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इटावा। नगर पालिका परिषद शहर को साफ सुथरा रखने के लिए अब सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम लागू करेगी। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत सात सदस्यीय टीम ने पूरे नगर में भ्रमण कर इसकी कार्ययोजना बना ली है। टीम प्रदेश के नगर विकास मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट के अनुमोदन के बाद इसे नगर पालिका परिषद अपने यहां लागू कर देगी।
शासन की मंशा है कि घरों से निकलने वाले कूड़े को वहीं सेएमआरएफ (मैटेरियल रिकवरी फैसेलिटी) के जरिये अलग-अलग कर निस्तारित कर दिया जाए। ताकि कूड़ा निस्तारण प्लांट पर कूड़े के बड़े बड़े ढेर न लगेें।
कूड़ा मैनेजमेंट को लेकर नगर पालिका कबाड़ का काम करने वालों की मदद भी लेगी। उन्हें यूनिफार्म और निश्चित मानदेय देकर कूड़ा मैनेजमेंट सिस्टम का हिस्सा बनाएगी। यह कार्ययोजना सफल हो गई तो शहर को साफ सुथरा और हरा भरा बनाने में काफी मदद मिलेगी।
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स्वच्छ भारत मिशन के सुदीश केएस एवं ए जायसवाल सात सदस्यीय टीम के साथ विभिन्न जगहों को देखकर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। यह टीम कूड़ा निस्तारण में सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने को लेकर कैसे प्रयास होने चाहिए इस पर भी काम कर रही है।
लोगों को कूड़ा कचरा प्रबंध के प्रति जवाबदेह भी बनाया जाएगा। शहर में 500 या 1000 की आबादी पर एमआरएफ सेंटर बनेंगे। घरों से कूड़ा करकट आकर एक जगह इकट्ठा हो जाएगा। इसके बाद उसमें से कूड़े को निस्तारित कर एमआरएफ सेंटरों में भेजा जाएगा।
निस्तारित कूड़ा कचरा कामेत स्थित प्लांट पर ले जाया जाएगा। इसका उद्देश्य यही है कि निस्तारण प्लांट पर एक साथ पड़ने वाले लोड को कम किया जा सके। कार्य गुणवत्तापरक हो सके।
ईओ नगर पालिका अनिल कुमार ने सात सदस्यीय टीम के साथ इस मामले को लेकर बैठक की। उन्होंने बताया कि शहर में इस योजना को लागू करने के लिए कितने संसाधन चाहिए। इसकी भी रिपोर्ट बनाई जा रही है। कूड़ा करकट निस्तारण मेें कितनी गाड़ियां, कितने श्रमिक चाहिए इसका खाका भी तैयार किया जा रहा है। पहली बार नगर पालिका सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में कबाड़ बीनने वालों एवं कबाड़ खरीदने वालों को भी इस अभियान से जोड़ेगी।
कबाड़ बीनने वालों को नगर पालिका से एक निश्चित मानदेय एवं वर्दी दी जाएगी। वे सॉलिड वेस्ट से निकलने वाले कबाड़ को दुकान पर जाकर बेचेंगे। इससे होने वाली आमदनी नगर पालिका की आय का हिस्सा बनेगी। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया इसी महीने में पूरी कर ली जाएगी।
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शासन की मंशा है कि घरों से निकलने वाले कूड़े को वहीं सेएमआरएफ (मैटेरियल रिकवरी फैसेलिटी) के जरिये अलग-अलग कर निस्तारित कर दिया जाए। ताकि कूड़ा निस्तारण प्लांट पर कूड़े के बड़े बड़े ढेर न लगेें।
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कूड़ा मैनेजमेंट को लेकर नगर पालिका कबाड़ का काम करने वालों की मदद भी लेगी। उन्हें यूनिफार्म और निश्चित मानदेय देकर कूड़ा मैनेजमेंट सिस्टम का हिस्सा बनाएगी। यह कार्ययोजना सफल हो गई तो शहर को साफ सुथरा और हरा भरा बनाने में काफी मदद मिलेगी।
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स्वच्छ भारत मिशन के सुदीश केएस एवं ए जायसवाल सात सदस्यीय टीम के साथ विभिन्न जगहों को देखकर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। यह टीम कूड़ा निस्तारण में सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने को लेकर कैसे प्रयास होने चाहिए इस पर भी काम कर रही है।
लोगों को कूड़ा कचरा प्रबंध के प्रति जवाबदेह भी बनाया जाएगा। शहर में 500 या 1000 की आबादी पर एमआरएफ सेंटर बनेंगे। घरों से कूड़ा करकट आकर एक जगह इकट्ठा हो जाएगा। इसके बाद उसमें से कूड़े को निस्तारित कर एमआरएफ सेंटरों में भेजा जाएगा।
निस्तारित कूड़ा कचरा कामेत स्थित प्लांट पर ले जाया जाएगा। इसका उद्देश्य यही है कि निस्तारण प्लांट पर एक साथ पड़ने वाले लोड को कम किया जा सके। कार्य गुणवत्तापरक हो सके।
ईओ नगर पालिका अनिल कुमार ने सात सदस्यीय टीम के साथ इस मामले को लेकर बैठक की। उन्होंने बताया कि शहर में इस योजना को लागू करने के लिए कितने संसाधन चाहिए। इसकी भी रिपोर्ट बनाई जा रही है। कूड़ा करकट निस्तारण मेें कितनी गाड़ियां, कितने श्रमिक चाहिए इसका खाका भी तैयार किया जा रहा है। पहली बार नगर पालिका सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में कबाड़ बीनने वालों एवं कबाड़ खरीदने वालों को भी इस अभियान से जोड़ेगी।
कबाड़ बीनने वालों को नगर पालिका से एक निश्चित मानदेय एवं वर्दी दी जाएगी। वे सॉलिड वेस्ट से निकलने वाले कबाड़ को दुकान पर जाकर बेचेंगे। इससे होने वाली आमदनी नगर पालिका की आय का हिस्सा बनेगी। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया इसी महीने में पूरी कर ली जाएगी।