{"_id":"61fc1618e2580c1c4e56b084","slug":"political-etawah-news-knp6787004108","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाढ़ के पानी के साथ उतरा नेताओं की आंखों की पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाढ़ के पानी के साथ उतरा नेताओं की आंखों की पानी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चकरनगर। बाढ़ के दौरान जब लोग अंत्येष्टि स्थल व सुनसान जगहों पर डेरा डाले थे, तब नेता और अफसर दोनों ने खूब वादे किए। मदद का आश्वासन देते समय नेताओं की आंखों में आंसू दिखाई देते थे। बाढ़ का पानी उतरा तो ये अपने सभी वादे भी भूल गए। अब चुनावी बेला में क्षेत्र के लोगों ने कमर कस ली है। उनका कहना है कि नेताजी अब जब वोट मांगने आएंगे, तो उन्हें पुराने वादे याद दिलाएंगे।
वर्ष 2021 में बाढ़ आई थी। नदियों के किनारे बसे 30 गांव प्रभावित हुए थे। कई घर डूब गए थे और कइयों के घरों में पानी भर गया था। तमाम लोगों ने अंत्येष्टि स्थल, सूनसान जगहों पर शरण ली थी। नेता और प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान पर बसाने का आश्वासन दिया था। बाढ़ खत्म हुआ और वादे भी हवा हो गए। पीड़ित अपने क्षतिग्रस्त घरों में वापस लौट गए। उन्हीं आशियानों को ठीक कर रहने लगे। सभी को दर्द है कि गृहस्थी बाढ़ में फिर डूबेगी, फिर बेघर होंगे।
डिभोली निवासी जयश्री बताती हैं कि बाढ़ के दौरान घरों में जब पानी भरा तो बच्चों के साथ श्मशान घाट में डेरा डाल दिया। बच्चों को बरसात व बाढ़ के प्रकोप से बचाया। मंत्री से लेकर संतरी तक सब आए वादे किए और भूल गए। सुरक्षित जगह पर आवास दिलाने को कहा गया था। खिरीटी निवासी गोमती देवी ने बताया कि बाढ़ के दौरान जीवन बचाने के लिए हमने अंत्येष्टि स्थल व बीहड़ के ऊंचे स्थानों पर ठहरकर परिवार की जान बचाई थी। बाढ़ के दौरान हमदर्दी जताने वाले लौटकर नहीं आए। नेता तो बस वोट लेने के लिए झूठे वादे करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
वर्ष 2021 में बाढ़ आई थी। नदियों के किनारे बसे 30 गांव प्रभावित हुए थे। कई घर डूब गए थे और कइयों के घरों में पानी भर गया था। तमाम लोगों ने अंत्येष्टि स्थल, सूनसान जगहों पर शरण ली थी। नेता और प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान पर बसाने का आश्वासन दिया था। बाढ़ खत्म हुआ और वादे भी हवा हो गए। पीड़ित अपने क्षतिग्रस्त घरों में वापस लौट गए। उन्हीं आशियानों को ठीक कर रहने लगे। सभी को दर्द है कि गृहस्थी बाढ़ में फिर डूबेगी, फिर बेघर होंगे।
विज्ञापन
डिभोली निवासी जयश्री बताती हैं कि बाढ़ के दौरान घरों में जब पानी भरा तो बच्चों के साथ श्मशान घाट में डेरा डाल दिया। बच्चों को बरसात व बाढ़ के प्रकोप से बचाया। मंत्री से लेकर संतरी तक सब आए वादे किए और भूल गए। सुरक्षित जगह पर आवास दिलाने को कहा गया था। खिरीटी निवासी गोमती देवी ने बताया कि बाढ़ के दौरान जीवन बचाने के लिए हमने अंत्येष्टि स्थल व बीहड़ के ऊंचे स्थानों पर ठहरकर परिवार की जान बचाई थी। बाढ़ के दौरान हमदर्दी जताने वाले लौटकर नहीं आए। नेता तो बस वोट लेने के लिए झूठे वादे करते हैं।
विज्ञापन