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रोगियों की भरमार, कोरोना कर सकता है वार
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शहर से लेकर गांवों तक रोगियों की भरमार है। फरवरी में चले जनआरोग्य मेलों में प्रचार प्रसार की कमी के बावजूद मधुमेह, लीवर और सांस की बीमारी से पीड़ित 3619 मरीज और 72 कुपोषित बच्चे पहुंचे थे।
निजी और बड़े सरकारी अस्पतालों के आंकड़े इससे कहीं अधिक है। ये बानगी जिले में मरीजों का एहसास कराने के लिए काफी है और ऐसे ही लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि गंभीर रोग के शिकार लोगों को कोरोना से मौत का खतरा ज्यादा रहता है।
जिले में कोरोना से पहली मौत निमोनिया रोगी की हुई। इसके अगले ही दिन किडनी रोगी युवती और पेट रोगी बालक की जान चली गई। हालांकि युवती और बालक में अभी कोरोना की पुष्टि नहीं हुई है।
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लेकिन, उनके लक्षणों ने परिवार और मोहल्ले के लोगों को चिंतित कर रखा है। दोनों का अंतिम संस्कार भी कोरोना मृतकों की तरह किया गया। चूंकि जिले में कोरोना के मरीज शहर से लेकर गांवों तक पहुंच गए हैं।
इससे मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों के लिए सावधानी की ज्यादा जरूरत है। जिले में मरीजों की संख्या भी कम नहीं है। फरवरी के केवल चार रविवार को सभी पीएचसी में चार जनआरोग्य मेले लगाए गए। इन मेलों में पहुंचे ज्यादातर लोग किसी न किसी रोग के शिकार पाए गए। सबसे ज्यादा 1850 रोगी सांस के रहे।
इसके बाद 1097 रोगी मधुमेह और 672 लीवर की परेशानी वाली रोगी मिले थे। इलाज के लिए आए बच्चों में 72 कुपोषण का शिकार थे।
कोरोना महामारी की देश में दस्तक के साथ ही रोगियों, बुजुर्गों और बच्चों का ध्यान रखने पर जोर दिया जा रहा है। चूंकि अब जिले में कोरोना मरीजों का आंकड़ा बढ़ रहा है, इसलिए मरीजों को लेकर ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।
सीएमओ डॉ. एनएस तोमर ने बताया कि किसी भी गंभीर रोग से पीड़ित व्यक्ति पर कोरोना का दुष्प्रभाव ज्यादा होता है। चूंकि बीमार व्यक्ति में रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम हो जाती है और कोरोना कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति के लिए बहुत घातक है।
मधुमेह के रोगियों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। मधुमेह रोगी पर एंटीबायोटिक दवाएं बहुत धीमी काम करती हैं, इसलिए उन्हें कोरोना होने पर जीवन को ज्यादा खतरा है।
सीएमओ ने कहा कि मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को लेकर ज्यादा सावधान रहें। उन्हें भीड़ में न ले जाएं। मरीजों का बड़े अस्पताल में इलाज कराने ले जाएं तो पूरी सावधानी बरतें। सावधानी और सतर्कता बहुत जरूरी है।
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निजी और बड़े सरकारी अस्पतालों के आंकड़े इससे कहीं अधिक है। ये बानगी जिले में मरीजों का एहसास कराने के लिए काफी है और ऐसे ही लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि गंभीर रोग के शिकार लोगों को कोरोना से मौत का खतरा ज्यादा रहता है।
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जिले में कोरोना से पहली मौत निमोनिया रोगी की हुई। इसके अगले ही दिन किडनी रोगी युवती और पेट रोगी बालक की जान चली गई। हालांकि युवती और बालक में अभी कोरोना की पुष्टि नहीं हुई है।
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लेकिन, उनके लक्षणों ने परिवार और मोहल्ले के लोगों को चिंतित कर रखा है। दोनों का अंतिम संस्कार भी कोरोना मृतकों की तरह किया गया। चूंकि जिले में कोरोना के मरीज शहर से लेकर गांवों तक पहुंच गए हैं।
इससे मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों के लिए सावधानी की ज्यादा जरूरत है। जिले में मरीजों की संख्या भी कम नहीं है। फरवरी के केवल चार रविवार को सभी पीएचसी में चार जनआरोग्य मेले लगाए गए। इन मेलों में पहुंचे ज्यादातर लोग किसी न किसी रोग के शिकार पाए गए। सबसे ज्यादा 1850 रोगी सांस के रहे।
इसके बाद 1097 रोगी मधुमेह और 672 लीवर की परेशानी वाली रोगी मिले थे। इलाज के लिए आए बच्चों में 72 कुपोषण का शिकार थे।
कोरोना महामारी की देश में दस्तक के साथ ही रोगियों, बुजुर्गों और बच्चों का ध्यान रखने पर जोर दिया जा रहा है। चूंकि अब जिले में कोरोना मरीजों का आंकड़ा बढ़ रहा है, इसलिए मरीजों को लेकर ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।
सीएमओ डॉ. एनएस तोमर ने बताया कि किसी भी गंभीर रोग से पीड़ित व्यक्ति पर कोरोना का दुष्प्रभाव ज्यादा होता है। चूंकि बीमार व्यक्ति में रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम हो जाती है और कोरोना कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति के लिए बहुत घातक है।
मधुमेह के रोगियों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। मधुमेह रोगी पर एंटीबायोटिक दवाएं बहुत धीमी काम करती हैं, इसलिए उन्हें कोरोना होने पर जीवन को ज्यादा खतरा है।
सीएमओ ने कहा कि मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को लेकर ज्यादा सावधान रहें। उन्हें भीड़ में न ले जाएं। मरीजों का बड़े अस्पताल में इलाज कराने ले जाएं तो पूरी सावधानी बरतें। सावधानी और सतर्कता बहुत जरूरी है।