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दो की जगह एक गड्ढे से बनाए शौचालय
ब्यूरो, अमर उजाला, इटावा
Updated Thu, 02 Mar 2017 11:57 PM IST
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव में बने शौचालय
- फोटो : अमर उजाला
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गांवों में शौचालय निर्माण में धांधली थमने का नाम नहीं ले रही। बढ़पुरा के दो गांवों में करीब 80 फीसदी शौचालय दो की जगह एक कच्चे गड्ढे से बना दिए गए। इसका खुलासा तब हुआ जब निर्मित शौचालयों की समीक्षा करते हुए डीएम शमीम अहमद ने बढ़पुरा व चकरनगर ब्लाक क्षेत्र के शौचालयों की जांच के निर्देश दिए।
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सरकार और प्रशासन की तमाम कोशिशें निरर्थक साबित होती दिख रही हैं। 2 अक्तूबर 2014 से लागू स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण के लिए लाभार्थी को 12 हजार रुपये अनुदान के तौर मुहैया कराए जाते हैं। मिशन के तहत व्यवस्था यह की गई है कि शौचालयों का निर्माण प्रधान करवा सकता है या फिर लाभार्थी स्वयं इसकी जिम्मेदारी ले सकता है। खास बात यह कि लाभार्थी चाहे तो 12 हजार रुपये अनुदान राशि से अधिक खर्च कर शौचालय को और बेहतर बना सकता है।
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इस व्यवस्था के बाद भी शौचालय का निर्माण बेहतर होने की जगह मानकहीन हो रहा है। बढ़पुरा ब्लाक क्षेत्र में इस वर्ष 1045 शौचालय बनवाए गए। डीएम ने पिछले दिनों शौचालय की समीक्षा की तो उन्होंने सीडीओ को जांच कराने के निर्देश दिए। जिस पर बढ़पुरा की जांच जिला समाज कल्याण अधिकारी और चकरनगर की एसडीएम मोहम्मद कमर को सौंपी गई।
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करीब 80 फीसदी मानकहीन मिला निर्माण कार्य
बढ़पुरा में ओडीएफ गांव फूफई और ग्राम पंचायत कैशोंपुर जादोंपुर के गांव रामपुर नावली में बने कुल 60 शौचालयों की जांच की गई। जिसमें फूफई गांव में करीब सभी शौचालय न सिर्फ ठीकठाक पाए गए बल्कि लोग उनका उपयोग करते भी मिले। वहीं रामपुर नावली में करीब 80 प्रतिशत शौचालय मानकहीन मिले।
शौचालयों के निर्माण में मुख्य मानक निर्धारित लंबाई-चौड़ाई के दो पक्के टैंक बनाने का है ताकि यह समय से पहले फुल न हों। साथ ही गंदगी भी बाहर न निकले, लेकिन इस गांव में शौचालयों के लिए सिर्फ एक सैप्टिक (कच्चा) टैंक बनाया गया है। जिसके भरने पर गंदगी के बाहर निकलने की आशंका रहती है। इसके अलावा कई शौचालयों में पुताई नहीं मिली। शौचालय के बाहर लाभार्थी का नाम और किस वर्ष कितनी लागत से शौचालय का निर्माण हुआ। यह भी अंकित नहीं मिला है।
अब थर्ड पार्टी से कराई जाएगी जांच
शौचालय निर्माण में बरती धांधली की जांच अब थर्ड पार्टी से कराई जाएगी। सीडीओ पीके श्रीवास्तव ने बताया कि अभी उन्हें जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। इस साल अब तक जितने भी शौचालय बने हैं। हर एक शौचालय की जांच नेहरू युवा केंद्र से जुड़े स्थानीय लोगों व प्रेरकों से कराई जाएगी। इसके लिए उन्हें प्रति शौचालय दो रुपये का भुगतान भी मिलेगा। स्थानीय होने के नाते इस जांच में शौचालयाें की हकीकत सामने आ जाएगी।
39636 शौचालय बनवाने का लक्ष्य
ग्रामीण क्षेत्र में स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले में 39636 शौचालय बनाने का लक्ष्य तय है। इसके सापेक्ष विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार अभी तक 10664 शौचालयों के लिए ग्राम पंचायतों को धनराशि मुहैया कराई जा चुकी है। जिसमें से करीब 1800 शौचालय निर्माणाधीन हैं। इसमें 3340 शौचालय लोहिया गांव में बनवाए गए हैं।