{"_id":"61ad0119c5488861ae7ad77d","slug":"phir-bhee-bhaarateey-sanskrti-jinda-etawah-news-knp667911722","type":"story","status":"publish","title_hn":"फिर भी भारतीय संस्कृति जिंदा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फिर भी भारतीय संस्कृति जिंदा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इटावा। स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ में अमृत महोत्सव आयोजन समिति की ओर से रविवार को मोतीझील स्थित सरस्वती इंटर कालेज में प्रबुद्धजनों की गोष्ठी में मुख्य वक्ता अमरनाथ ने कहा कि स्वतंत्रता की लड़ाई में योगदान देने वाले भारत के सभी बलिदानियों को याद किया गया, जिन्होंने देश की आजादी में अपना योगदान दिया, लेकिन उनका इतिहास में कहीं भी नाम नहीं लिया गया।
उन्होंने बताया कि भारत को अंग्रेजों से देश को आजाद कराने में केवल एक ही संगठन की भूमिका नहीं रही, बल्कि ऐसे लाखों बलिदानियों के कारण भी देश आजाद हुआ है, जिनको किन्हीं विशेष कारणों से इतिहास में जगह नहीं मिली या उन्हें भुला दिया गया।
कहा कि भारत ने इतने आक्रांताओं के आक्रमण झेले, फिर भी आज भी हमारी भारतीय संस्कृति जिंदा है। बताया कि हम सभी प्रबुद्ध जनों को जिले के गांव-गांव जाकर स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को सम्मानित करना चाहिए एवं स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग के लिए जान जागरण करना चाहिए।
विज्ञापन
कहा कि हम सभी को वंदे मातरम् गान करना चाहिए और बच्चों को हमारी संस्कृति के बारे में बताना चाहिए। कहा कि हिंदी को लेकर हमारे युवा गर्व करें, हमें ऐसा वातावरण भी बनाना है। भारत प्राचीन काल से हमेशा हर क्षेत्र में आगे रहा है।
हम सब मिलकर भारत के उस स्वर्णिम युग को लौटाने के पूरे प्रयास की शुरुआत करें। अध्यक्षता पूर्व सैनिक भुजबल सिंह ने की, जिन्होंने गोष्ठी में 1857 व 71 के युद्ध के संस्मरण साझा किए।
गोष्ठी में समिति के संरक्षक शंभूनाथ, अध्यक्ष डॉ. राजेश त्रिपाठी, संयोजक राजेश सिंह, कन्हई सिंह, डॉ. सीमा जादौन, प्रीति दुबे, विजय पटेल, पर्यावरणविद एवं वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. आशीष त्रिपाठी शिक्षक डॉ. पीयूष दीक्षित एवं मीडिया प्रमुख मयंक भदौरिया समेत तमाम लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि भारत को अंग्रेजों से देश को आजाद कराने में केवल एक ही संगठन की भूमिका नहीं रही, बल्कि ऐसे लाखों बलिदानियों के कारण भी देश आजाद हुआ है, जिनको किन्हीं विशेष कारणों से इतिहास में जगह नहीं मिली या उन्हें भुला दिया गया।
विज्ञापन
कहा कि भारत ने इतने आक्रांताओं के आक्रमण झेले, फिर भी आज भी हमारी भारतीय संस्कृति जिंदा है। बताया कि हम सभी प्रबुद्ध जनों को जिले के गांव-गांव जाकर स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को सम्मानित करना चाहिए एवं स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग के लिए जान जागरण करना चाहिए।
विज्ञापन
कहा कि हम सभी को वंदे मातरम् गान करना चाहिए और बच्चों को हमारी संस्कृति के बारे में बताना चाहिए। कहा कि हिंदी को लेकर हमारे युवा गर्व करें, हमें ऐसा वातावरण भी बनाना है। भारत प्राचीन काल से हमेशा हर क्षेत्र में आगे रहा है।
हम सब मिलकर भारत के उस स्वर्णिम युग को लौटाने के पूरे प्रयास की शुरुआत करें। अध्यक्षता पूर्व सैनिक भुजबल सिंह ने की, जिन्होंने गोष्ठी में 1857 व 71 के युद्ध के संस्मरण साझा किए।
गोष्ठी में समिति के संरक्षक शंभूनाथ, अध्यक्ष डॉ. राजेश त्रिपाठी, संयोजक राजेश सिंह, कन्हई सिंह, डॉ. सीमा जादौन, प्रीति दुबे, विजय पटेल, पर्यावरणविद एवं वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. आशीष त्रिपाठी शिक्षक डॉ. पीयूष दीक्षित एवं मीडिया प्रमुख मयंक भदौरिया समेत तमाम लोग मौजूद रहे।