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Etawah News: 20 से 40 हजार दे जाओ...मनचाहा ट्रांसफर-पोस्टिंग ले जाओ

Thu, 29 Jan 2026 12:18 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 29 Jan 2026 12:18 AM IST
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Pay 20 to 40 thousand rupees... get the desired transfer-posting.
फोटो 24: ऑफिस में वायरल हुए वीडियो को मोबाइल पर देखते डीपीआरओ बनवारी सिंह। संवाद - फोटो : प्रयागराज जा रहे कांग्रेस के पूर्व एमएलसी दीपक सिंह को गौरीगंज में रोकते पुलिसकर्मी।
इटावा। कहने को तो यह पंचायत राज विभाग है लेकिन पिछले चार सालों से यहां पंचायती कम और पैसातंत्र ज्यादा हावी है। जिले के डीपीआरओ कार्यालय में ट्रांसफर और पोस्टिंग के नाम पर वसूली का खेल नया नहीं बल्कि चार साल से चल रहा था। ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए 20 से 40 हजार रुपये तक का रेट कार्ड फिक्स था। इससे भी बड़ी हैरत की बात तो यह है कि सपा सांसद जितेंद्र दोहरे के समधी डीपीआरओ बनवारी सिंह, जिनका रिश्वत लेते वीडियो मंगलवार को वायरल हुआ था। इसके बाद भी वह बुधवार को कार्यालय आए और पूरे दिन अपना निपटाकर चले गए।
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पंचायती राज विभाग का यह भ्रष्टाचार पहली बार सामने नहीं आया है। अक्तूबर 2024 में जब पानी सिर से ऊपर गुजर गया तो जिले के ग्राम प्रधानों और सचिवों ने इस धन उगाही के खिलाफ बिगुल फूंका था। डीपीआरओ के खिलाफ बाकायदा धरना दिया गया, नारेबाजी हुई और भ्रष्टाचार के सुबूत पेश किए गए लेकिन कार्रवाई शून्य रही।
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वजह साफ थी डीपीआरओ की पकड़ राजधानी में बैठे उच्चाधिकारियों तक इतनी मजबूत थी कि जांच की फाइलें दफ्तरों की धूल फांकती रहीं। कार्रवाई न होते देख और ऊपर से निलंबन व विभागीय कार्रवाई का डर दिखाकर प्रधानों और सचिवों को चुप रहने पर मजबूर कर दिया जा रहा। पूरे मामले में डीपीआरओ बनवारी सिंह का कहना है कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है। सभी आरोप निराधार हैं। जांच में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
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एक पंचायत सचिव ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि डीपीआरओ बनवारी सिंह 21 नवंबर 2021 में मेरठ से यहां स्थानांतरित होकर आए थे। आरोप है कि उन्होंने तैनाती के कुछ दिनों बाद ही ग्राम प्रधान, सचिव व सफाई कर्मचारियों को उत्पीड़न शुरू कर दिया था। साथ ही ट्रांसफर व पोस्टिंग के नाम पर 20 से 40 हजार रुपये की धनराशि तय कर दी। रुपये न मिलने पर उसे बिना वजह परेशान किया जाता है। विरोध करने पर कार्रवाई न होने पर कर्मचारियों के हौसले ढीले पड़ गए। खौफ का नतीजा यह है कि अब कर्मचारी विरोध करने के बजाय इस सिस्टम का हिस्सा बनने या चुपचाप सहने को मजबूर हैं।

-अक्तूबर 2024 में डीपीआरओ ने ग्राम प्रधानों और सचिवों पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में कार्रवाई की जिसे प्रधान संघ ने एकतरफा और उत्पीड़न करार दिया। बाद में प्रधान व सचिवाें को मनाकर विरोध प्रदर्शन समाप्त करवा दिया लेकिन डीपीआरओ के खिलाफ कोई जांच नहीं हुई।

-अक्टूबर 2024 में डीपीआरओ ने ग्राम पंचायत मोहरी में 42 लाख रुपये के घोटाले में प्रधान और सचिव के खिलाफ रिकवरी नोटिस जारी किया था।
-डीपीआरओ ने ग्राम पंचायत दामोदरपुर में निरीक्षण के दौरान दस्तावेजों में खामियां मिलने पर सचिव और प्रधान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए जिसे जनप्रतिनिधियों ने द्वेषपूर्ण कार्रवाई बताया था।
-सचिवों ने दीपावली पर बोनस न मिलना, फैमिली आईडी के नाम पर 50 से अधिक सचिवों का वेतन रोकना और गोशाला व जांच के नाम पर आर्थिक दोहन के आरोप लगाए गए थे।
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