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Etawah News: कुत्तों में फैल रहा पार्वो वायरस
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फोटो-10 (फोटो-10)-- वैक्सीनेशन के बाद बैठा जर्मन शेफर्ड नस्ल का कुत्ता। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
निवाड़ीकला। मौसम में बदलाव से मवेशी भी बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। कुत्तों में पार्वो वायरस का खतरा भी मंडरा रहा है। इस वायरस की चपेट में आने से कई कुत्तों की मौत हो चुकी है। पशु अस्पतालों में प्रतिदिन इस वायरल से ग्रसित कुत्तों की संख्या बढ़ रही है।
तमाम लोगों को कुत्ते पालने का शौक है। कई लोग विदेशी नस्ल के कुत्ते पाले हुए हैं। इस समय पार्वो वायरस कुत्तों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। पशु चिकित्सकों का कहना हैं कि इस वायरस से बचने का उपाय सिर्फ वैक्सीन ही है। जिसे समय-समय पर लगवाया जाए। इस वायरस से कुत्तों की आंत में संक्रमण हो सकता है।
बड़े कुत्तों की अपेक्षा वायरस कम उम्र के कुत्तों के लिए ज्यादा घातक है। क्योंकि यह वायरस उन्हें बहुत जल्द अपनी जद में ले लेता है। समय पर इलाज न होने से कुत्ते को खून की उल्टी भी होने लगती हैं। केनिन पार्वो विषाणु से यह संक्रमण फैलता है। इस वायरस से ग्रसित कुत्ते के संपर्क में आने से स्वस्थ कुत्ते को भी बीमार कर देता है।
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इनसेट...
क्या हैं पार्वो वायरस :-
जानवरों में तमाम तरह की बीमारियां फैलती हैं, जिनमें कुत्तों के लिए सबसे घातक बीमारी पार्वो ही है। इससे अपने कुत्तों को बचाने के लिए समय-समय पर टीकाकरण कराना चाहिए। पहला टीका डेढ़ महीने की उम्र में, दूसरा ढाई और तीसरा साढ़े तीन महीने की उम्र में लगवाना चाहिए। फिर प्रति वर्ष डॉक्टरों की सलाह पर दूसरे टीके भी लगवाने चाहिए।
इनसेट...
कुत्तों में पार्वो के लक्षण
पार्वो की चपेट में आने से कुत्ता खाना पीना छोड़ देता है। खूनी दस्त और उल्टियां प्रारंभ हो जाती है। बीमार कुत्ते के मल में बदबू आने लगती हैं। तापमान गिर जाता हैं। जानकार बताते हैं कि यह वायरस देशी कुत्तों की अपेक्षा विदेशी कुत्तों पर ज्यादा हमला करता हैं और वे जल्द ही इसके घेरे में आ जाते हैं। अधिकतर लोगों ने जर्मन शेफर्ड कुत्ते पा रखे हैं। ऐसे में पालकों को ध्यान रखना होगा कि उनका कुत्ता किसी दूसरे कुत्ते के संपर्क में ना आए।
बोले डॉक्टर :-
मौसम बदलने से पार्वो वायरस सक्रिय हो जाता हैै। जिन कुत्तों का वैक्सीनेशन हो जाता है, वह तो बच जाते हैं और जिनका नहीं होता है, उनके के लिए यह वायरस काफी खतरनाक है। इसमें मृत्युदर भी अधिक रहती है। पूरे सीजन में महेवा और बकेवर अस्पतालों में दो दर्जन से अधिक कुत्तों का इलाज किया जा चुका है। कुछ की मौत भी हो चुक है। इससे बचाव का एकमात्र उपाय टीकाकरण ही है।-- डॉ. शरद कुमार, पशुचिकित्साधिकारी महेवा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
निवाड़ीकला। मौसम में बदलाव से मवेशी भी बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। कुत्तों में पार्वो वायरस का खतरा भी मंडरा रहा है। इस वायरस की चपेट में आने से कई कुत्तों की मौत हो चुकी है। पशु अस्पतालों में प्रतिदिन इस वायरल से ग्रसित कुत्तों की संख्या बढ़ रही है।
तमाम लोगों को कुत्ते पालने का शौक है। कई लोग विदेशी नस्ल के कुत्ते पाले हुए हैं। इस समय पार्वो वायरस कुत्तों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। पशु चिकित्सकों का कहना हैं कि इस वायरस से बचने का उपाय सिर्फ वैक्सीन ही है। जिसे समय-समय पर लगवाया जाए। इस वायरस से कुत्तों की आंत में संक्रमण हो सकता है।
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बड़े कुत्तों की अपेक्षा वायरस कम उम्र के कुत्तों के लिए ज्यादा घातक है। क्योंकि यह वायरस उन्हें बहुत जल्द अपनी जद में ले लेता है। समय पर इलाज न होने से कुत्ते को खून की उल्टी भी होने लगती हैं। केनिन पार्वो विषाणु से यह संक्रमण फैलता है। इस वायरस से ग्रसित कुत्ते के संपर्क में आने से स्वस्थ कुत्ते को भी बीमार कर देता है।
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क्या हैं पार्वो वायरस :-
जानवरों में तमाम तरह की बीमारियां फैलती हैं, जिनमें कुत्तों के लिए सबसे घातक बीमारी पार्वो ही है। इससे अपने कुत्तों को बचाने के लिए समय-समय पर टीकाकरण कराना चाहिए। पहला टीका डेढ़ महीने की उम्र में, दूसरा ढाई और तीसरा साढ़े तीन महीने की उम्र में लगवाना चाहिए। फिर प्रति वर्ष डॉक्टरों की सलाह पर दूसरे टीके भी लगवाने चाहिए।
इनसेट...
कुत्तों में पार्वो के लक्षण
पार्वो की चपेट में आने से कुत्ता खाना पीना छोड़ देता है। खूनी दस्त और उल्टियां प्रारंभ हो जाती है। बीमार कुत्ते के मल में बदबू आने लगती हैं। तापमान गिर जाता हैं। जानकार बताते हैं कि यह वायरस देशी कुत्तों की अपेक्षा विदेशी कुत्तों पर ज्यादा हमला करता हैं और वे जल्द ही इसके घेरे में आ जाते हैं। अधिकतर लोगों ने जर्मन शेफर्ड कुत्ते पा रखे हैं। ऐसे में पालकों को ध्यान रखना होगा कि उनका कुत्ता किसी दूसरे कुत्ते के संपर्क में ना आए।
बोले डॉक्टर :-
मौसम बदलने से पार्वो वायरस सक्रिय हो जाता हैै। जिन कुत्तों का वैक्सीनेशन हो जाता है, वह तो बच जाते हैं और जिनका नहीं होता है, उनके के लिए यह वायरस काफी खतरनाक है। इसमें मृत्युदर भी अधिक रहती है। पूरे सीजन में महेवा और बकेवर अस्पतालों में दो दर्जन से अधिक कुत्तों का इलाज किया जा चुका है। कुछ की मौत भी हो चुक है। इससे बचाव का एकमात्र उपाय टीकाकरण ही है।