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संसद नौटंकी लगती है रासमंडली वालों की...
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
Updated Thu, 29 Dec 2016 11:15 PM IST
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प्रदर्शनी पंडाल में कवि सम्मेलन में गूंजे ठहाके
- फोटो : अमर उजाला
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संसद के भीतर वालों को मनमानी जो छूट हुई, इस सत्तर वर्षों में खुल्लम खुल्ला छूट हुई, संसद नौटंकी लगती है रासमंडली वालों की, भारत मां का दिल है दिल्ली-दिल्ली है दिलवालों की। प्रदर्शनी पंडाल में बुधवार रात जनपदीय कवि सम्मेलन में कवियों ने यह पक्तियां सुनाई।
रचनाकारों ने मौजूदा राजनैतिक, आर्थिक व सामाजिक विकृतियों पर जमकर कटाक्ष करते हुए नव वर्ष से नए युग की संकल्पना प्रस्तुत की। इंद्रधनुषी कवि नेम सिंह रमन की अध्यक्षता में हुए कवि सम्मेलन का उद्घाटन इटावा महोत्सव के जनरल सेक्रेटरी व उपजिलाधिकारी सुभाषचंद्र प्रजापति ने किया।
कवि सम्मेलन के दौरान एक ओर जहां मंचासीन कवियों का जमावड़ा था। वहीं दूसरी ओर उदीयमान नवोदित कवियों की भी लंबी श्रंखला मंच पर काव्यपाठ के लिए उत्साहित थी। संयोजक विशंभर नाथ भटेले ने व्यंग्यकार सतीश दीक्षित अनपढ़ का अभिनंदन किया। समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव व शायर अशोक यादव ने काव्यपाठ करते हुए मोदी को इन पंक्तियों में धन्यवाद दिया। ...नोटो के लिए जी का जंजाल मुबारक हो, इस दौरे मुसीबत में हमको-तुमको, सबको बीबी का चुरा रक्खा वो माल मुबारक हो।
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कुछ इसी तरह जनवादी कवि अनिल दीक्षित ने भी अपने वामपंथी तेवर दिखाते हुए मोदी सरकार पर कटाक्ष किए। जबकि वरिष्ठ कवि अवधेश भ्रमर ने आगामी चुनाव में मतदाताओं से कुछ इस अंदाज में कहा मतदाताओं डरो नहीं कविता रण के मैदान में, परिवर्तन का विगुल बजा दो यूपी के मतदान में।
लोक गीतकार हरिश्चंद्र गुप्त ने अपने चिरपरिचित अंदाज में काव्यपाठ किया। वहीं प्रेम बाबू यादव ने वोटन के वलवा में, मरिगयो ललैयां हाय अम्मा ईश्वर है और का करैया। लोकगीत गाते हुए चुनावी माहौल के हिंसात्मक रूप लेने पर कटाक्ष किए। संस्कृत प्रवक्ता व कवि प्रदीप मिश्र ने लोकतंत्र में हंस अल्पमत कौओं का हुड़दंग, लिए तराजू हाथ में पलड़ों में पासंग लाइनें पढ़ी। युवा कवि देवेश शास्त्री ने कवियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कविता सहज स्वभाव है, उस पर कृत्रिम धुंध, महज गलेबाजी में खिचते-पिचके छंद। प्रेम नरायण त्रिपाठी ने राजनीति पर व्यंग्य वाण छोड़ते हुए कहा चोरों के बाजार में हम बिके बेभाव, मक्कारी और धूर्तता बिन पैसे ले जाव।
रात के अंतिम पहर तक पंडाल में काव्यधारा के प्रवाह में डा. राजीव राज, रोहित चौधरी, रजनीश त्रिपाठी, महेश मंगल के बीच काव्य साधक के रुप में महेंद्र सिंह परवाना, दीपचंद्र त्रिपाठी निर्बल, गिरीश कुमार पांडेय, मेघावसु पाठक, सह संयोजक सुरेशचंद्र दुबे, कुलदीप दुबे, श्रीराम राही, सत्य नरायण शर्मा, प्रतिमा चतुर्वेदी, आमिर अफजल, रविपाल खामोश, संजय तोमर, रामकृष्ण यादव, प्रमोद तिवारी ‘‘हंस’’ आदि के बीच नवोदित कवि दीपक तिवारी व प्रतीक्षा चौधरी ने भी काव्यपाठ किया। सेवा निवृत्त प्रधानाचार्य व कवि बृजानंद शर्मा, डा. सुशील सम्राट ने संचालन किया।
रचनाकारों ने मौजूदा राजनैतिक, आर्थिक व सामाजिक विकृतियों पर जमकर कटाक्ष करते हुए नव वर्ष से नए युग की संकल्पना प्रस्तुत की। इंद्रधनुषी कवि नेम सिंह रमन की अध्यक्षता में हुए कवि सम्मेलन का उद्घाटन इटावा महोत्सव के जनरल सेक्रेटरी व उपजिलाधिकारी सुभाषचंद्र प्रजापति ने किया।
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कवि सम्मेलन के दौरान एक ओर जहां मंचासीन कवियों का जमावड़ा था। वहीं दूसरी ओर उदीयमान नवोदित कवियों की भी लंबी श्रंखला मंच पर काव्यपाठ के लिए उत्साहित थी। संयोजक विशंभर नाथ भटेले ने व्यंग्यकार सतीश दीक्षित अनपढ़ का अभिनंदन किया। समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव व शायर अशोक यादव ने काव्यपाठ करते हुए मोदी को इन पंक्तियों में धन्यवाद दिया। ...नोटो के लिए जी का जंजाल मुबारक हो, इस दौरे मुसीबत में हमको-तुमको, सबको बीबी का चुरा रक्खा वो माल मुबारक हो।
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कुछ इसी तरह जनवादी कवि अनिल दीक्षित ने भी अपने वामपंथी तेवर दिखाते हुए मोदी सरकार पर कटाक्ष किए। जबकि वरिष्ठ कवि अवधेश भ्रमर ने आगामी चुनाव में मतदाताओं से कुछ इस अंदाज में कहा मतदाताओं डरो नहीं कविता रण के मैदान में, परिवर्तन का विगुल बजा दो यूपी के मतदान में।
लोक गीतकार हरिश्चंद्र गुप्त ने अपने चिरपरिचित अंदाज में काव्यपाठ किया। वहीं प्रेम बाबू यादव ने वोटन के वलवा में, मरिगयो ललैयां हाय अम्मा ईश्वर है और का करैया। लोकगीत गाते हुए चुनावी माहौल के हिंसात्मक रूप लेने पर कटाक्ष किए। संस्कृत प्रवक्ता व कवि प्रदीप मिश्र ने लोकतंत्र में हंस अल्पमत कौओं का हुड़दंग, लिए तराजू हाथ में पलड़ों में पासंग लाइनें पढ़ी। युवा कवि देवेश शास्त्री ने कवियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कविता सहज स्वभाव है, उस पर कृत्रिम धुंध, महज गलेबाजी में खिचते-पिचके छंद। प्रेम नरायण त्रिपाठी ने राजनीति पर व्यंग्य वाण छोड़ते हुए कहा चोरों के बाजार में हम बिके बेभाव, मक्कारी और धूर्तता बिन पैसे ले जाव।
रात के अंतिम पहर तक पंडाल में काव्यधारा के प्रवाह में डा. राजीव राज, रोहित चौधरी, रजनीश त्रिपाठी, महेश मंगल के बीच काव्य साधक के रुप में महेंद्र सिंह परवाना, दीपचंद्र त्रिपाठी निर्बल, गिरीश कुमार पांडेय, मेघावसु पाठक, सह संयोजक सुरेशचंद्र दुबे, कुलदीप दुबे, श्रीराम राही, सत्य नरायण शर्मा, प्रतिमा चतुर्वेदी, आमिर अफजल, रविपाल खामोश, संजय तोमर, रामकृष्ण यादव, प्रमोद तिवारी ‘‘हंस’’ आदि के बीच नवोदित कवि दीपक तिवारी व प्रतीक्षा चौधरी ने भी काव्यपाठ किया। सेवा निवृत्त प्रधानाचार्य व कवि बृजानंद शर्मा, डा. सुशील सम्राट ने संचालन किया।