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रोक के बाद भी जलाई जा रही पराली
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बकेवर। कृषि विभाग किसानों को पराली न जलाने और उससे खाद बनाने के लिए जागरूक कर रहा है। इसके बाद भी खेतों में पराली जलाई जा रही है।
पराली जलाने पर रोक होने की वजह से प्रशासनिक और कृषि विभाग के अधिकारियों ने जागरुकता के लिए कई गोष्ठियां कीं। किसानों को पराली के जरिये समृद्ध बनने की सीख दी जा रही है लेकिन क्षेत्र के अधिकांश गांवों में तस्वीर इसके उलट है।
किसानों का कहना है कि उनके सामने पराली जलाना मजबूरी है।
धान कटने के बाद खेत में उसके अवशेष को एकत्र कराने में काफी समय व धन खर्च होता है। इस बार बारिश के कारण पैदावार कम होने से आर्थिक तंगी झेल रहे हैं। खेत खाली करने में समय ज्यादा लगता है। इस बीच खेत की आर्द्रता समाप्त होने का डर रहता है। इसलिए पराली जला देते हैं। एडीओ कृषि राजेश चौबे ने बताया कि पराली जलाने की जानकारी नहीं है। किसानों को फिर से समझाया जाएगा।
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पराली जलाने पर रोक होने की वजह से प्रशासनिक और कृषि विभाग के अधिकारियों ने जागरुकता के लिए कई गोष्ठियां कीं। किसानों को पराली के जरिये समृद्ध बनने की सीख दी जा रही है लेकिन क्षेत्र के अधिकांश गांवों में तस्वीर इसके उलट है।
किसानों का कहना है कि उनके सामने पराली जलाना मजबूरी है।
धान कटने के बाद खेत में उसके अवशेष को एकत्र कराने में काफी समय व धन खर्च होता है। इस बार बारिश के कारण पैदावार कम होने से आर्थिक तंगी झेल रहे हैं। खेत खाली करने में समय ज्यादा लगता है। इस बीच खेत की आर्द्रता समाप्त होने का डर रहता है। इसलिए पराली जला देते हैं। एडीओ कृषि राजेश चौबे ने बताया कि पराली जलाने की जानकारी नहीं है। किसानों को फिर से समझाया जाएगा।
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