{"_id":"61e99da007e6cf1f4324ad19","slug":"parachute-candidates-dominated-after-1985-etawah-news-knp6764060176","type":"story","status":"publish","title_hn":"1985 के बाद रहा पैराशूट प्रत्याशियों का दबदबा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
1985 के बाद रहा पैराशूट प्रत्याशियों का दबदबा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बकेवर। कांग्रेस व जनसंघ के प्रत्याशी के अलावा बाद में कोई भी स्थानीय प्रत्याशी यहां से विधायक नहीं बना सका। आयातित प्रत्याशी ही लखना सुरक्षित अब भरथना सुरक्षित सीट से विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे।
इटावा जनपद की पूर्व में रही लखना विधानसभा अब भरथना सुरक्षित सीट से हमेशा ही बाहरी प्रत्याशी ही जीता है। स्थानीय प्रत्याशी बहुत कम ही इस सीट पर विजय होकर विधानसभा जा पाया।
कांग्रेस से स्थानीय प्रत्याशी महारानी दोहरे, जनसंघ व जपा से दो बार स्थानीय प्रत्याशी रामलखन दोहरे दो-दो बार विधायक रहे। 1985 में हुए विधानसभा के चुनाव से इस सीट पर कोई भी स्थानीय प्रत्याशी नहीं जीत सका।
विज्ञापन
यह सीट पहले लखना विधानसभा सुरक्षित सीट के नाम से थी। 2007 के बाद हुए परिसीमन के बाद अब यह भरथना विधानसभा सीट (सुरक्षित) के नाम से है, परंतु परिवर्तित होने के बाद भी इस सीट का इतिहास परिवर्तित नहीं हुआ।
2007 के परिसीमन के बाद एक सीट लखना विधानसभा खत्म होकर भरथना विधानसभा के नाम से बना दी गई। पहले भरथना सीट अलग थी। लखना विधानसभा भी सुरक्षित सीट थी।
वर्तमान में भरथना विधानसभा भी सुरक्षित सीट है। लखना विधानसभा सीट से सपा से दो बार गया प्रसाद वर्मा विधायक रहे, जो इटावा के पास बिचपुरी खेड़ा के रहने वाले थे।
गया प्रसाद वर्मा के बाद उनकी पत्नी सुखदेवी वर्मा इस सीट से चार बार विधायक रहीं। भाजपा से इस सीट पर केके राज रामलहर में जीते, लेकिन वे भी इटावा के ही रहने वाले थे।
इसके अलावा 2007 में बसपा के सोशल इंजीनियरिंग के नारे से इस विधानसभा सीट से बसपा प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज करने वाले भीमराव आंबेडकर विधायक बने थे। वह भी इटावा में ही रहते थे।
मूलरूप से वह अजीतमल क्षेत्र औरैया जनपद के रहने वाले हैं। वहीं, पिछली बार 2017 में भाजपा से विधायक बनने वाली सावित्री कठेरिया भी इटावा शहर की ही निवासी हैं।
इस सीट पर वर्ष 2002 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े स्थानीय प्रत्याशी मुंशीलाल दोहरे जो गौतमपुरा गांव के रहने वाले थे, उनका गांव भरथना क्षेत्र में ही पड़ता था, लेकिन वे लगभग 21 सौ मतों से चुनाव हार गए थे, जबकि मुंशीलाल पहले अजीतमल सीट से विधायक रह चुके थे।
पिछले विस चुनाव में सपा प्रत्याशी रहे कमलेश कठेरिया जो इटावा शहर में रहते हैं, परंतु बकेवर के पास स्थित बिजौली गांव के ही रहने वाले हैं। यानी स्थानीय प्रत्याशी वर्ष 2017 में करीब दो हजार वोटों चुनाव से एक नजदीकी मुकाबले में चुनाव हार गया।
भरथना सीट से निर्वाचित विधायक
2017 में सावित्री कठेरिया (भाजपा), 2012 में सुखदेवी वर्मा (सपा), लखना विस सुरक्षित सीट से-2007 में भीमराव आंबेडकर (बसपा), 2002 में सुखदेवी वर्मा (सपा), 1996 सुखदेवी वर्मा (सपा), 1993 सुखदेवी वर्मा (सपा), 1991 केके राज (भाजपा), 1989 गया प्रसाद वर्मा (सजपा), 1985 गया प्रसाद वर्मा (दमकिपा)।
विज्ञापन
इटावा जनपद की पूर्व में रही लखना विधानसभा अब भरथना सुरक्षित सीट से हमेशा ही बाहरी प्रत्याशी ही जीता है। स्थानीय प्रत्याशी बहुत कम ही इस सीट पर विजय होकर विधानसभा जा पाया।
विज्ञापन
कांग्रेस से स्थानीय प्रत्याशी महारानी दोहरे, जनसंघ व जपा से दो बार स्थानीय प्रत्याशी रामलखन दोहरे दो-दो बार विधायक रहे। 1985 में हुए विधानसभा के चुनाव से इस सीट पर कोई भी स्थानीय प्रत्याशी नहीं जीत सका।
विज्ञापन
यह सीट पहले लखना विधानसभा सुरक्षित सीट के नाम से थी। 2007 के बाद हुए परिसीमन के बाद अब यह भरथना विधानसभा सीट (सुरक्षित) के नाम से है, परंतु परिवर्तित होने के बाद भी इस सीट का इतिहास परिवर्तित नहीं हुआ।
2007 के परिसीमन के बाद एक सीट लखना विधानसभा खत्म होकर भरथना विधानसभा के नाम से बना दी गई। पहले भरथना सीट अलग थी। लखना विधानसभा भी सुरक्षित सीट थी।
वर्तमान में भरथना विधानसभा भी सुरक्षित सीट है। लखना विधानसभा सीट से सपा से दो बार गया प्रसाद वर्मा विधायक रहे, जो इटावा के पास बिचपुरी खेड़ा के रहने वाले थे।
गया प्रसाद वर्मा के बाद उनकी पत्नी सुखदेवी वर्मा इस सीट से चार बार विधायक रहीं। भाजपा से इस सीट पर केके राज रामलहर में जीते, लेकिन वे भी इटावा के ही रहने वाले थे।
इसके अलावा 2007 में बसपा के सोशल इंजीनियरिंग के नारे से इस विधानसभा सीट से बसपा प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज करने वाले भीमराव आंबेडकर विधायक बने थे। वह भी इटावा में ही रहते थे।
मूलरूप से वह अजीतमल क्षेत्र औरैया जनपद के रहने वाले हैं। वहीं, पिछली बार 2017 में भाजपा से विधायक बनने वाली सावित्री कठेरिया भी इटावा शहर की ही निवासी हैं।
इस सीट पर वर्ष 2002 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े स्थानीय प्रत्याशी मुंशीलाल दोहरे जो गौतमपुरा गांव के रहने वाले थे, उनका गांव भरथना क्षेत्र में ही पड़ता था, लेकिन वे लगभग 21 सौ मतों से चुनाव हार गए थे, जबकि मुंशीलाल पहले अजीतमल सीट से विधायक रह चुके थे।
पिछले विस चुनाव में सपा प्रत्याशी रहे कमलेश कठेरिया जो इटावा शहर में रहते हैं, परंतु बकेवर के पास स्थित बिजौली गांव के ही रहने वाले हैं। यानी स्थानीय प्रत्याशी वर्ष 2017 में करीब दो हजार वोटों चुनाव से एक नजदीकी मुकाबले में चुनाव हार गया।
भरथना सीट से निर्वाचित विधायक
2017 में सावित्री कठेरिया (भाजपा), 2012 में सुखदेवी वर्मा (सपा), लखना विस सुरक्षित सीट से-2007 में भीमराव आंबेडकर (बसपा), 2002 में सुखदेवी वर्मा (सपा), 1996 सुखदेवी वर्मा (सपा), 1993 सुखदेवी वर्मा (सपा), 1991 केके राज (भाजपा), 1989 गया प्रसाद वर्मा (सजपा), 1985 गया प्रसाद वर्मा (दमकिपा)।