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पंचायत उद्योग केंद्र बनने लगे सेनेटरी नैपकिन
अमर उजाला ब्यूरो इटावा।
Updated Sat, 23 Jan 2016 11:29 PM IST
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करीब दशक भर से बंद पड़ा पंचायत उद्योग केंद्र एक बार फिर से सक्रिय हुआ है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की कन्नौज लोकसभा क्षेत्र से सांसद पत्नी डिंपल यादव की पहल पर इस केंद्र में महिलाओं व किशोरियों के लिए सेनेटरी नैपकिन तैयार किए जा रहे हैं। इस केंद्र की शुरुआत होने से 12 गरीब महिलाओं को रोजगार भी मिला है। पिछले महीने यहां उत्पादन शुरू हुआ। इस महीने सात हजार नैपकिन स्वास्थ्य विभाग को भेजे गए हैं।
सिविल लाइंस क्षेत्र में स्थित पंचायत उद्योग केंद्र में प्रिंटिंग प्रेस पर स्टेशनरी तैयार होती थी। जिसकी सप्लाई विभिन्न विभागों में की जाती थी। एक दशक पूर्व यह काम बंद हो गया था।
तब से पंचायत उद्योग केंद्र मात्र शोपीस बना हुआ था। पिछले महीने से इस पंचायत उद्योग केंद्र में महिलाओं एवं किशोरियों के माहवारी प्रबंधन के लिए सेनेटरी नेपकिन का उत्पादन शुरू किया गया।
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लखनऊ में इस योजना का कन्नौज सांसद डिंपल यादव ने उद्घाटन किया। जिले में पंचायत उद्योग केंद्र को दोबारा शुरू करने के लिए डीएम ने रिवाल्विंग फंड से पंचायतराज विभाग को पांच लाख रुपये की धनराशि प्रदान की।
जिसमें सेनेटरी नैपकिन बनाने की हाइड्रोलिक प्रेस मशीन, रुई धुनने की मशीन, वजन मशीन, पैड भरने की मशीन, बैड सीलिंग मशीन, अल्ट्रा वायलेट केबिनेट मशीन मंगाई गई और केंद्र का रंग रोगन किया गया।
यहां 12 महिलाओं को ठेका पर रखा गया है। जबकि देखरेख का जिम्मा केंद्र प्रबंधक/ ग्राम पंचायत अधिकारी सैफई इम्तियाज अतहर को सौंपा गया है। उन्होंने बताया कि 3 दिसंबर से सेनेटरी नैपकिन तैयार होने लगी है। हाल ही 7 हजार नैपकिन पैकेट स्वास्थ्य विभाग को भेजे गए हैं।
पंचायत उद्योग केंद्र में तैयार सेनेटरी नैपकिन स्वास्थ्य, शिक्षा, जिला कारागार आदि विभागों के माध्यम से महिलाओं व किशोरियों को मुफ्त में प्रदान किए जाएंगे। सरकारी विभागों को ये नैपकिन 15 रुपये पैकेट के हिसाब से बेचे जाएंगे।
यानि सरकार उत्पादन कराएगी और सरकार ही खरीदेगी। लेकिन ब्लॉक स्तर, छात्रावासों और जिला कारागार, संवासिनी गृह आदि में यह निशुल्क प्रदान किए जाएंगे। सरकार की मंशा है कि सरकारी विभाग नैपकिन के मद में जो खर्च करते हैं। वह अब यह खर्च पंचायत उद्योग केंद्र से नैपकिन की खरीद में करेंगे।
केंद्र में हर रोज दिशा नाम से 400 सेनेटरी नैपकिन पैकेट तैयार हो रहे हैं। एक पैकेट में नैपकिन के छह पीस रखे जाते हैं। नैपकिन के रॉ मैटेरियल के तौर पर रुई, गोंद, कागज, पाउच आदि वृंदावन से और पैकिंग रैपर लखनऊ से मंगाया जा रहा है।
एडीपीआरओ रोहित कुमार ने बताया कि सेनेटरी नैपकिन को शुरू करने के पीछे सरकार का मकसद पंचायतराज उद्योग की इनकम को बढ़ाना है। साथ ही महिलाओं में स्वच्छता के प्रति जागरुकता पैदा करना है। इसी दिशा में यह सकारात्मक प्रयास है।
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सिविल लाइंस क्षेत्र में स्थित पंचायत उद्योग केंद्र में प्रिंटिंग प्रेस पर स्टेशनरी तैयार होती थी। जिसकी सप्लाई विभिन्न विभागों में की जाती थी। एक दशक पूर्व यह काम बंद हो गया था।
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तब से पंचायत उद्योग केंद्र मात्र शोपीस बना हुआ था। पिछले महीने से इस पंचायत उद्योग केंद्र में महिलाओं एवं किशोरियों के माहवारी प्रबंधन के लिए सेनेटरी नेपकिन का उत्पादन शुरू किया गया।
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लखनऊ में इस योजना का कन्नौज सांसद डिंपल यादव ने उद्घाटन किया। जिले में पंचायत उद्योग केंद्र को दोबारा शुरू करने के लिए डीएम ने रिवाल्विंग फंड से पंचायतराज विभाग को पांच लाख रुपये की धनराशि प्रदान की।
जिसमें सेनेटरी नैपकिन बनाने की हाइड्रोलिक प्रेस मशीन, रुई धुनने की मशीन, वजन मशीन, पैड भरने की मशीन, बैड सीलिंग मशीन, अल्ट्रा वायलेट केबिनेट मशीन मंगाई गई और केंद्र का रंग रोगन किया गया।
यहां 12 महिलाओं को ठेका पर रखा गया है। जबकि देखरेख का जिम्मा केंद्र प्रबंधक/ ग्राम पंचायत अधिकारी सैफई इम्तियाज अतहर को सौंपा गया है। उन्होंने बताया कि 3 दिसंबर से सेनेटरी नैपकिन तैयार होने लगी है। हाल ही 7 हजार नैपकिन पैकेट स्वास्थ्य विभाग को भेजे गए हैं।
पंचायत उद्योग केंद्र में तैयार सेनेटरी नैपकिन स्वास्थ्य, शिक्षा, जिला कारागार आदि विभागों के माध्यम से महिलाओं व किशोरियों को मुफ्त में प्रदान किए जाएंगे। सरकारी विभागों को ये नैपकिन 15 रुपये पैकेट के हिसाब से बेचे जाएंगे।
यानि सरकार उत्पादन कराएगी और सरकार ही खरीदेगी। लेकिन ब्लॉक स्तर, छात्रावासों और जिला कारागार, संवासिनी गृह आदि में यह निशुल्क प्रदान किए जाएंगे। सरकार की मंशा है कि सरकारी विभाग नैपकिन के मद में जो खर्च करते हैं। वह अब यह खर्च पंचायत उद्योग केंद्र से नैपकिन की खरीद में करेंगे।
केंद्र में हर रोज दिशा नाम से 400 सेनेटरी नैपकिन पैकेट तैयार हो रहे हैं। एक पैकेट में नैपकिन के छह पीस रखे जाते हैं। नैपकिन के रॉ मैटेरियल के तौर पर रुई, गोंद, कागज, पाउच आदि वृंदावन से और पैकिंग रैपर लखनऊ से मंगाया जा रहा है।
एडीपीआरओ रोहित कुमार ने बताया कि सेनेटरी नैपकिन को शुरू करने के पीछे सरकार का मकसद पंचायतराज उद्योग की इनकम को बढ़ाना है। साथ ही महिलाओं में स्वच्छता के प्रति जागरुकता पैदा करना है। इसी दिशा में यह सकारात्मक प्रयास है।