{"_id":"62e6d4116c88b678374a6f20","slug":"other-etawah-news-knp7105345114","type":"story","status":"publish","title_hn":"इटावा: हुसैन ने कर्बला में कुर्बानी देकर दीन व इंसानियत को बचाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इटावा: हुसैन ने कर्बला में कुर्बानी देकर दीन व इंसानियत को बचाया
विज्ञापन
इटावा। इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला की याद में गम का प्रतीक मोहर्रम का महीना रविवार से शुरू हो गया। पहले दिन शहर में कई जगह शिया समुदाय की ओर से मजलिसों का आयोजन किया गया। इसमें कर्बला के शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए।
घटिया अजमत अली स्थित इमाम बारगाह में आदिल अख्तर गुड्डू, मिश्री टोला में रजी हैदर व राजा और दरगाह मौला अब्बास महेरे पर नफीसुल जैदी ने मजलिसों का आयोजन किया। मौलाना सैयद अनवारुल हसन जैदी इमामे जुमा ने कहा रसूल और एहलबैत ने अमनचैन, भाईचारे व इंसानियत के साथ रहने का पैगाम दिया। मजलिसों में आने वाले सभी मजहब के लोगों का सम्मान करना चाहिए। इमाम हुसैन का इस्लाम, नमाज और इंसानियत पर बहुत बड़ा एहसान है। कर्बला में अपना सब कुछ लुटाकर हुसैन ने इस्लाम, नमाज और इंसानियत को बचाया। अल्लाह तक पहुंचने का मार्ग कुरान और जिक्रे हुसैन है। पक्की सराय स्थित बड़े इमामबाड़े में गुलामुस सैयदेन, शरीफ मंजिल सैदबाड़ा स्थित पुराने इमामबाड़े में राहत अकील, आलमपुरा इमामबाड़े में शारिक सगीर शानू, घटिया अजमत अली इमामबाड़े और नौरंगाबाद इमामबाड़ा में वक्फ तमीजन व काजमी में मुतावल्ली राहत हुसैन रिजवी की ओर से मजलिसें कराई गईं।
मजलिसों में तस्लीम रजा, सलीम रजा, जहूर नकवी ने सोजख्वानी, खुर्शीद जाफरी, अख्तर अब्बास, सलमान रिजवी, आबिद रजा, कैफ वारसी ने सलाम और रूबाई पेश की। तनवीर हसन ने नोहखवानी की। अंजुमन हैदरी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शावेज नकवी ने बताया दो मोहर्रम एक अगस्त को सुबह सात बजे घटिया अजमत अली पर अल्हाज कमर अब्बास नकवी के मकान पर मजलिस होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
घटिया अजमत अली स्थित इमाम बारगाह में आदिल अख्तर गुड्डू, मिश्री टोला में रजी हैदर व राजा और दरगाह मौला अब्बास महेरे पर नफीसुल जैदी ने मजलिसों का आयोजन किया। मौलाना सैयद अनवारुल हसन जैदी इमामे जुमा ने कहा रसूल और एहलबैत ने अमनचैन, भाईचारे व इंसानियत के साथ रहने का पैगाम दिया। मजलिसों में आने वाले सभी मजहब के लोगों का सम्मान करना चाहिए। इमाम हुसैन का इस्लाम, नमाज और इंसानियत पर बहुत बड़ा एहसान है। कर्बला में अपना सब कुछ लुटाकर हुसैन ने इस्लाम, नमाज और इंसानियत को बचाया। अल्लाह तक पहुंचने का मार्ग कुरान और जिक्रे हुसैन है। पक्की सराय स्थित बड़े इमामबाड़े में गुलामुस सैयदेन, शरीफ मंजिल सैदबाड़ा स्थित पुराने इमामबाड़े में राहत अकील, आलमपुरा इमामबाड़े में शारिक सगीर शानू, घटिया अजमत अली इमामबाड़े और नौरंगाबाद इमामबाड़ा में वक्फ तमीजन व काजमी में मुतावल्ली राहत हुसैन रिजवी की ओर से मजलिसें कराई गईं।
विज्ञापन
मजलिसों में तस्लीम रजा, सलीम रजा, जहूर नकवी ने सोजख्वानी, खुर्शीद जाफरी, अख्तर अब्बास, सलमान रिजवी, आबिद रजा, कैफ वारसी ने सलाम और रूबाई पेश की। तनवीर हसन ने नोहखवानी की। अंजुमन हैदरी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शावेज नकवी ने बताया दो मोहर्रम एक अगस्त को सुबह सात बजे घटिया अजमत अली पर अल्हाज कमर अब्बास नकवी के मकान पर मजलिस होगी।
विज्ञापन