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जातीय समीकरण के आधार पर घोषित उम्मीदवारों पर लगी मुहर
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
Updated Fri, 06 Jan 2017 11:19 PM IST
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बसपा प्रतीक
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के गृह क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी ने जातीय समीकरण को ध्यान में रखने हुए उम्मीदवारों के नाम पर मुहर लगाई है। कुछ समय पहले पार्टी के मंडलीय सम्मेलन में घोषित किए गए उम्मीदवारों पर ही पार्टी प्रमुख मायावती की मुहर लग गई है। इससे बसपाई पूरी तन्मयता से मैदान में जुट गए हैं। शुक्रवार को प्रत्याशी घोषित होने के बाद बसपा कार्यकर्ताओं ने मिठाई बांटकर खुशियों का इजहार किया।
बसपा ने इटावा सदर से नरेंद्र नाथ चतुर्वेदी उर्फ बल्लू चौधरी को मैदान में उतारा है। यह पहले भी बसपा के टिकट पर मैदान में उतर चुके हैं, लेकिन हार गए थे। पार्टी के पुराने कार्यकर्ता है। सदर सीट को ब्राह्मण बहुल माना जाता है। इसी तरह जसवंत नगर में शाक्य मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। बसपा ने जसवंत नगर से देर्वेंश शाक्य को मैदान में उतारा है। यह युवा होने के साथ ही पार्टी के कैडर भी रहे हैं। पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। भरथना सुरक्षित सीट से राघवेंद्र गौतम को मैदान में उतारा गया है।
यह पार्टी के कैडर होने के साथ वर्ष 2012 में भी इसी सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। जिले में वर्ष 2012 के चुनाव में बसपा के पास कोई सीट नहीं थी। इससे पहले 2007 में बसपा ने सुरक्षित सीट से भीमराव अंबेडकर को चुनाव लड़ाकर एक सीट हासिल की थी। इसके बाद 2012 में तीनों सीटें सपा के खाते में चली गई। अब फिर से बसपा इटावा में अपनी पकड़ मजबूत बनाने की दिशा में प्रयास कर रही है। बसपा ने तीनों सीटों पर जातिगत गणित के हिसाब से ही प्रत्याशियों का चयन किया है। तीन सीटों में एक पर सामान्य वर्ग से दूसरी सीट पर पिछड़े वर्ग के प्रत्याशी को उतारा गया है।
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बसपा ने इटावा सदर से नरेंद्र नाथ चतुर्वेदी उर्फ बल्लू चौधरी को मैदान में उतारा है। यह पहले भी बसपा के टिकट पर मैदान में उतर चुके हैं, लेकिन हार गए थे। पार्टी के पुराने कार्यकर्ता है। सदर सीट को ब्राह्मण बहुल माना जाता है। इसी तरह जसवंत नगर में शाक्य मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। बसपा ने जसवंत नगर से देर्वेंश शाक्य को मैदान में उतारा है। यह युवा होने के साथ ही पार्टी के कैडर भी रहे हैं। पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। भरथना सुरक्षित सीट से राघवेंद्र गौतम को मैदान में उतारा गया है।
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यह पार्टी के कैडर होने के साथ वर्ष 2012 में भी इसी सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। जिले में वर्ष 2012 के चुनाव में बसपा के पास कोई सीट नहीं थी। इससे पहले 2007 में बसपा ने सुरक्षित सीट से भीमराव अंबेडकर को चुनाव लड़ाकर एक सीट हासिल की थी। इसके बाद 2012 में तीनों सीटें सपा के खाते में चली गई। अब फिर से बसपा इटावा में अपनी पकड़ मजबूत बनाने की दिशा में प्रयास कर रही है। बसपा ने तीनों सीटों पर जातिगत गणित के हिसाब से ही प्रत्याशियों का चयन किया है। तीन सीटों में एक पर सामान्य वर्ग से दूसरी सीट पर पिछड़े वर्ग के प्रत्याशी को उतारा गया है।
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