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सीएम की खातिरदारी, जनता पर भारी

Sat, 10 Jan 2015 12:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा Updated Sat, 10 Jan 2015 12:18 AM IST
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officers got busy in mahotsav while public is in troubled

सैफई महोत्सव के चलते दो सप्ताह से प्रशासनिक कामकाज बेपटरी है। लोकतंत्र में शक्तिमान समझी जाने वाली जनता जनार्दन का बुरा हाल है। लोग दुख दर्द सुनाने के लिए मीलों दूर से चलकर आते हैं, यहां अफसरों के न मिलने पर निराश होकर लौट जाते हैं।

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गुरुवार को सैफई महोत्सव का समापन हो गया। शुक्रवार को लोग कामकाज पटरी पर लौटने की उम्मीद लेकर लोग आए थे। मगर अफसरों के चैंबर खाली मिले। कुछ के तो ताले भी नहीं खुले। कलेक्ट्रेट से लेकर विकास भवन तक सन्नाटा पसरा रहा। अफसर के न होने के कारण बाबू व अन्य कर्मचारी भी सीट से नदारद रहे। अब सेेकेंड सैटरडे और रविवार के बाद ही कामकाज पटरी पर लौटेगा।
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सुबह 11.45 बजे: डीएम दफ्तर
जिलाधिकारी डॉ. नितिन बंसल के चैंबर का गेट बंद था। दफ्तर के बाहर सन्नाटा पसरा था। बाहर कुछ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और महिला होमगार्ड धूप सेंक रहे थे। एक-एक कर कई लोग डीएम साहब को फरियाद सुनाने के लिए आ रहे थे। कुछ को जमीन पर दबंगों के द्वारा कब्जा किए जाने की शिकायत करनी थी तो कुछ लोगों को अधिकारियों की। कुछ ज्ञापन देने के लिए खड़े थे। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सभी को एक ही जवाब दे रहे थे कि साहब सैफई में हैं। कुछ लोगों ने यह पूछा कि महोत्सव तो खत्म हो गया है तो जवाब था कि मुख्यमंत्री तो हैं।
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सुबह 11.55 बजे: एडीएम कार्यालय
सुबह एडीएम ज्ञानेंद्र सिंह का दफ्तर तो खुला हु़आ था लेकिन वह नहीं थे। पूछने पर बताया गया कि बॉलीवुड नाइट में ड्यूटी पर थे। देर रात लौटे हैं। चूंकि सीएम साहब अभी सैफई में हैं इसलिए साहब सैफई निकल गए हैं। डीएम के न होने से कु़छ लोग एडीएम से मिलने के लिए आए, लेकिन मायूस होकर लौट गए। 12 बजे तक ही दूर दराज से फरियाद करने के लिए आए दो दर्जन से अधिक लोग लौट चुके थे।

12.00 बजे: सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय
सिटी मजिस्ट्रेट ईश्वरचंद्र का दफ्तर खुला हुआ था। चैंबर में कुछ बाबू बैठे थे, लेकिन सिटी मजिस्ट्रेट नहीं थे। शिकवा शिकायत करने के लिए आने वाले फरियादी साहब के न मिलने पर लौट रहे थे। कर्मचारियों ने बताया कि साहब नहीं है। कब आएंगे पूछने पर जवाब मिला मालूम नहीं। स्थित यह रही कि शिकायत सुनने और ज्ञापन लेने के लिए भी कोई प्रशासनिक अधिकारी मुख्यालय पर नहीं था।

समय-12.05 बजे: एसएसपी दफ्तर
एसएसपी डॉ. राकेश सिंह का ऑफिस रोज की तरह खुला था। दो-तीन पुलिस कर्मी बाहर खड़े हुए थे। कुछ लोग ग्रामीण क्षेत्र के थानाध्यक्षों की शिकायतें करने आए थे, तो कुछ अपने निजी मामलों की। एसएसपी और एएसपी दोनों ही दफ्तर में नहीं थे। फरियादियों ने साहब के आने के बारे में पूछा तो पुलिसकर्मियों ने बताया कि साहब सैफई में हैं, सोमवार को आना।


12.05 बजे: विकास भवन
विकास भवन में मुख्य विकास अधिकारी सहित अन्य दफ्तरों के कार्यालय हैं। विकास भवन में चारों ओर सन्नाटा नजर आया। सीडीओ डॉ. अशोक चंद्र का चैंबर बंद था। बाहर एक अर्दली स्टूल पर बैठा धूप सेंक रहा था। बाहर बसरेहर विकास खंड के कुछ लोग मिलने के लिए खड़े थे। अर्दली उनको बता रहा था कि साहब सैफई गए हुए हैं। अब तो सीधे सोमवार को आओ क्योंकि कल सेकेंड सैडरडे है और फिर रविवार। अन्य दफ्तरों में भी अधिकारियों के साथ कर्मचारी गायब थे।

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