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रावण का वध करने में राम सेना को लगे नौ घंटे
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा।
Updated Fri, 23 Oct 2015 11:05 PM IST
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जसवंतनगर (इटावा)। जसवंतनगर का रावण पूरे पंचांग योग यानि पंचक मुहूर्त में
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शुक्रवार को मारा गया। राम सेना को लंकेश रावण के वध में पूरे नौ घंटे
लगे। उसको परास्त करने में जुटे राम को जब विभीषण ने उसकी नाभि में वाण
प्रहार की सलाह दी। रावण धाराशायी हुआ और यहां का रामलीला मैदान भगवान राम
की जय जय कार से गूंज उठा। अपने पूरे कुल का नाश करा चुका रावण दोपहर 1
बजे अपनी सेना को लेकर युद्ध के लिए नगर की सड़कों पर निकला तो यहां बाजार
तथा जैन मोहल्ला रोड पर कई जगह उसकी आरती और पूजा की गई।
बाद में नरसिंह मंदिर से राम और रावण के दलों में प्राचीन तीर तलवारों ,धनुष तथा अन्य हथियारों से रोमांचकारी युद्ध प्रदर्शन आरंभ हुआ। सड़कों पर कई घंटे युद्ध चलने के बाद राम लीला मैदान में रावण दल के नारायंतक और अहिरावण मारे गए। आखिर में राम रावण के मध्य युद्ध चला और रात्रि 10 बजे रावण पर राम को विजय मिली। इसके बाद पूर्वी कोने पर लगे रावण के पुतले को भीड़ ने धराशायी कर उसके टुकड़े घरों में रखने को ले गए। रावण की भूमिकाएं सोनी शुक्ला, धीरज पाठक, बालकृष्ण दुबे ने निभाई। युद्ध व्यवस्था में राजीव बबलू ,अजेंद्र गौर, रामनरेश पप्पू, हीरा आदि ने सहयोग किया।
बाद में नरसिंह मंदिर से राम और रावण के दलों में प्राचीन तीर तलवारों ,धनुष तथा अन्य हथियारों से रोमांचकारी युद्ध प्रदर्शन आरंभ हुआ। सड़कों पर कई घंटे युद्ध चलने के बाद राम लीला मैदान में रावण दल के नारायंतक और अहिरावण मारे गए। आखिर में राम रावण के मध्य युद्ध चला और रात्रि 10 बजे रावण पर राम को विजय मिली। इसके बाद पूर्वी कोने पर लगे रावण के पुतले को भीड़ ने धराशायी कर उसके टुकड़े घरों में रखने को ले गए। रावण की भूमिकाएं सोनी शुक्ला, धीरज पाठक, बालकृष्ण दुबे ने निभाई। युद्ध व्यवस्था में राजीव बबलू ,अजेंद्र गौर, रामनरेश पप्पू, हीरा आदि ने सहयोग किया।