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बदले-बदले आंगनबाड़ी में आएंगे नन्हें-मुन्ने

Sun, 21 Feb 2021 11:08 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 21 Feb 2021 11:08 PM IST
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Little ones will come to Anganwadi in exchange
बढ़पुरा ब्लाक के अवारी गांव का आंगनबाड़ी केंद्र - फोटो : ETAWHA
इटावा। शासन की नई नीति के अनुसार अब आंगनबाड़ी केंद्र सिर्फ पुष्टाहार खिलाने तक ही सीमित नहीं रहेंगे। बल्कि वहां आने वाले बच्चों को प्री प्राइमरी भी पढ़ाया जाएगा। इसके लिए आंगनबाड़ी केंद्रों की सूरत बदलने का काम चल रहा है। बच्चों को तस्वीरों के माध्यम से गिनती, महीनों के नाम, अक्षर ज्ञान आदि सिखाए जाएंगे। कुल 1300 केंद्रों को प्री प्राइमरी स्कूलों की तरह से सजाया संवारा जा रहा है। इन केंद्रों को अब (ईसीसीई) अर्ली चाइल्ड केयर एंड एजूकेशनल के रूप में जाना जाएगा। यहां 3 से 6 वर्ष के बच्चों की देखभाल के साथ उन्हें प्रशिक्षित भी किया जाएगा।
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जिले में कुल 1564 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों को प्री प्राइमरी के रूप में विकसित करने से पूर्व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। डायट पर ब्लॉक लेवल ट्रेनिंग और डिस्ट्रिक्ट लेवल ट्रेनिंग हो चुकी है। अब बीआरसी पर ट्रेनर अन्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने का काम करेंगे। फरवरी तक केंद्रों पर एक दिन छोड़कर बच्चों को बुलाया जा रहा है। तीन से पांच वर्ष के बच्चे बृहस्पतिवार एवं शनिवार तथा पांच से छह वर्ष के बच्चे सोमवार और बुधवार को आएंगे।
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एक अप्रैल से आंगनबाड़ी केंद्रों पर ईसीसीई शुरू होगी। केंद्रों की दीवारों पर पेंटिंग में पहाड़े, विभिन्न प्रकार के पेड़, जानवर आदि के फोटो सजे होंगे। जिन्हें देखकर बच्चे गिनती पहाड़े सीख सकेंगे। अपने आसपास पाई जाने वाली वस्तुओं के बारे में जानकारी कर सकेंगे। दीवार पर ईको बोर्ड भी लगा होगा। जिस पर बच्चे अपनी इच्छानुसार गिनती पहाड़े लिख सकेंगे।
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1300 आंगनबाड़ी केंद्र मॉडल बने
मुख्य विकास अधिकारी राजा गणपति आर ने बताया कि जिले के कुल 1300 केंद्रों को मॉडल के रूप में विकसित किया गया है। यहां टाइल्स के साथ वॉल पेंटिंग, फर्नीचर, बेबी टायलेट, वॉश बेसिन, खिलौने, बोर्ड आदि की सुविधा प्रदान की गई है। 10 मार्च तक इनके पुनरोद्धार का काम पूरा हो जाएगा। एक अप्रैल से इन केंद्रों पर विधिवत बच्चों को नई व्यवस्था के अनुरूप शिक्षा प्रदान की जाएगी।

बच्चों को मिलेगा पोषाहार
जिला कार्यक्रम अधिकारी सुरेश कुमार यादव ने बताया कि पोषाहार के रूप में अब बच्चों को दलिया नहीं दिया जाएगा। दलिया की जगह गेहूूं और चावल के स्थान पर चावल, मस्टर्ड आयल, दूध और घी दिया जाएगा। पोषाहार का वितरण एनआरएलएम के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के माध्यम से किया जाएग। इस व्यवस्था में अभी 563 समूह लगाए गए हैं।
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