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श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं सुन श्रोता भाव विभोर
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फोटो संख्या 14- श्रीमदभागवत कथा सुनाते आचार्य उमाकांत शास्त्री
- फोटो : ETAWAH
बलरई। रामताल गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा प्रसंग के पांचवें दिन भागवताचार्य उमाकांत शास्त्री ने श्रोताओं को श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं और गोवर्धन पूजा की कथा सुनाई। श्रोता इसे सुनकर भाव विभोर हो गए।
भागवताचार्य ने बताया कि मथुरा का राजा कंस, श्रीकृष्ण को अपना काल समझते हुए बाल रूप में ही उन्हें मारने का षड्यंत्र करने लगा। कंस ने राक्षसी पूतना को भेजकर श्रीकृष्ण को मरवाने का प्रयास किया।
उसकी सारी योजनाएं विफल रहीं। गोवर्धन लीला का प्रसंग सुनाते हुए भागवताचार्य ने कहा कि राजा इंद्र को अपने आप पर बड़ा अभिमान था। उसे चूर करने के लिए श्रीकृष्ण भगवान ने गोवर्धन लीला रचाई।
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भागवत कथा में परीक्षित पंडित प्रभात त्रिपाठी, कांति प्रभा, अंशिका त्रिपाठी, अभिनव त्रिपाठी, आराध्या त्रिपाठी, कृतिका त्रिपाठी आदि ग्रामवासी मौजूद रहे।
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भागवताचार्य ने बताया कि मथुरा का राजा कंस, श्रीकृष्ण को अपना काल समझते हुए बाल रूप में ही उन्हें मारने का षड्यंत्र करने लगा। कंस ने राक्षसी पूतना को भेजकर श्रीकृष्ण को मरवाने का प्रयास किया।
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उसकी सारी योजनाएं विफल रहीं। गोवर्धन लीला का प्रसंग सुनाते हुए भागवताचार्य ने कहा कि राजा इंद्र को अपने आप पर बड़ा अभिमान था। उसे चूर करने के लिए श्रीकृष्ण भगवान ने गोवर्धन लीला रचाई।
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भागवत कथा में परीक्षित पंडित प्रभात त्रिपाठी, कांति प्रभा, अंशिका त्रिपाठी, अभिनव त्रिपाठी, आराध्या त्रिपाठी, कृतिका त्रिपाठी आदि ग्रामवासी मौजूद रहे।